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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Relief for Umakant Yadav; former MP granted bail after spending over six years in jail.

हाईकोर्ट : उमाकांत यादव को मिली राहत, छह साल से अधिक जेल में रहने पर पूर्व सांसद को मिली जमानत

Fri, 11 Sep 2026 12:09 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 11 Sep 2026 12:09 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर के लाइन बाजार थाने में दर्ज धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज से जुड़े मामले में पूर्व सांसद उमाकांत यादव को जमानत दे दी है।

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Relief for Umakant Yadav; former MP granted bail after spending over six years in jail.
पूर्व सांसद उमाकांत यादव। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर के लाइन बाजार थाने में दर्ज धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज से जुड़े मामले में पूर्व सांसद उमाकांत यादव को जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति विक्रम डी.चौहान की एकल पीठ ने कहा कि आरोपी छह साल से जेल में है। अभी तक मुकदमे में आरोप तक तय नहीं हुए हैं। ऐसे में आगे हिरासत में रखना स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ है। हालांकि, अन्य मामलों के चलते अभी वह जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे।

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शिकायतकर्ता संजीव जायसवाल ने 2017 में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि उन्होंने 2015 में रजिस्टर्ड बिक्री विलेख के जरिये जमीन खरीदी थी। उमाकांत यादव ने अभिलेख में हेरफेर कर अपना नाम जमीन के रिकॉर्ड में चढ़वा लिया। इस मामले में उमाकांत यादव ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की।

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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि मामला मूलरूप से जमीन के मालिकाना हक का दीवानी विवाद है। याची करीब 74 साल का है और बीमारी से पीड़ित है। आपराधिक इतिहास के अधिकांश मामले पुराने हैं। उनमें कई में राहत भी मिल चुकी है।

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हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य ऐसा कोई ठोस तथ्य नहीं दिखा सका, जिससे साबित हो कि उमाकांत यादव ने स्वयं राजस्व अभिलेख में हेरफेर किया था। मामले में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है, लेकिन अब तक आरोप तय नहीं किए गए हैं। चार्जशीट में 10 गवाह हैं। सह-आरोपियों से संबंधित आपराधिक पुनरीक्षण में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण मुकदमे की कार्यवाही लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी। कोर्ट ने माना कि लंबे समय तक मुकदमा आगे नहीं बढ़ना और आरोपी का लगातार जेल में रहना स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। इसी के सथ कोर्ट ने जमानत अर्जी स्वीकार करते रिहा करने का आदेश दिया। 

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