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प्रसव पीड़िता को भर्ती करने से किया इनकार, खुले में दिया बच्चे को जन्म

Tue, 26 Mar 2019 01:09 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 26 Mar 2019 01:09 AM IST
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Refusal to recruit childbirth victim, child born in open
metro hospital fire - फोटो : लाल सिंह

एसआरएन अस्पताल में एक बार फिर मानवता तार-तार हो गई। प्रसव कराने आई महिला की किसी ने एक न सुनी। उसे भर्ती करने से ही इनकार कर दिया गया। इलाज के लिए गिड़गिड़ाती महिला ने सोमवार सुबह अस्पताल में सीढ़ी के बगल बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद भी डॉक्टर संवेदनहीन बने रहे। हंगामा, हो-हल्ला मचने के बाद जच्चा-बच्चा को भर्ती किया गया। महिला के पति ने इस दौरान आरोप लगाया कि नर्सों ने उसकी पत्नी की पिटाई भी की। इधर, फजीहत होती देख अस्पताल प्रशासन ने बाद में महिला को भर्ती कर लिया लेकिन, डॉक्टरों और नर्सों के रवैये से सहमी महिला कुछ घंटे बाद ही छुट्टी कराकर घर चली गई।

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एसआईसी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। करछना के राजकुमार पाल खेती किसानी करते हैं। रविवार रात वह अपनी गर्भवती पत्नी ममता देवी को लेकर एसआरएन अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद आपरेशन कराने को लेकर उनकी डॉक्टर और नर्स से कहासुनी हो गई। ममता आपरेशन के लिए राजी नहीं थी। ममता का आरोप है कि इसके बाद नर्सिंग स्टाफ ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया। एक नर्स ने उसे थप्पड़ भी जड़ा जबकि दूसरी नर्स ने भी उसे पीटा। वहां से भगाए जाने के बाद राजकुमार गर्भवती पत्नी को लेकर पुरानी बिल्डिंग में सीढ़ी के पास बैठ गया। रात कराहते हुए बीती। सोमवार सुबह प्रसव पीड़ा से परेशान ममता सीढ़ी के बगल लेट गई। वहीं उसने खुले में ही बच्चे को जन्म दिया।
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ओटी तीन की दाई ने बच्चे रोने की आवाज सुनी तो वहां पहुंची।

थोड़ी ही देर में वहां मजमा लग गया। अस्पताल स्टाफ और अन्य तीमारदारों ने चादर, तौलिया आदि से घेरा बनाया। इस बीच वहां पहुंचे राजकुमार ने वार्ड में जाकर पत्नी और बच्चे को भर्ती करने की मिन्नतें कीं लेकिन, नर्सिंग स्टाफ नहीं पसीजा। वहां जुटे लोग डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ की संवेदनहीनता पर नाराजगी जताते हुए हो-हल्ला करने लगे। मामला गरम होने लगा तो वार्ड ब्वाय और नर्स वहां पहुंचे। तीमारदारों की मदद से ममता और बच्चे को भर्ती कराया गया। इस बीच वहां पहुंची विभागाध्यक्ष डॉ. अमृता चौरसिया विभाग पहुंचीं। मामले की जानकारी होने पर उन्होंने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को फटकार लगाई। मगर अस्पताल स्टाफ और नर्सों का रवैया देख दोपहर बाद राजकुमार ने पत्नी और बच्चे को घर ले जाने की जिद पकड़ ली। उसके लिखित प्रार्थना पत्र पर जच्चा बच्चा को डिस्चार्ज कर दिया गया।
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