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Prayagraj : भूमि अधिग्रहण मामले में कलेक्टर का अवार्ड रद्द नहीं कर सकता रेफरेंस कोर्ट
Sun, 19 Apr 2026 03:11 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 19 Apr 2026 03:11 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण मामले में गठित रेफरेंस कोर्ट कलेक्टर की ओर से निर्धारित मुआवजे के अवार्ड(आदेश) को न रद्द कर सकता है और न ही दोबारा निर्धारण के लिए वापस भेज सकता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण मामले में गठित रेफरेंस कोर्ट कलेक्टर की ओर से निर्धारित मुआवजे के अवार्ड (आदेश) को न रद्द कर सकता है और न ही दोबारा निर्धारण के लिए वापस भेज सकता है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने सिद्धार्थनगर के मामले में राज्य सरकार की अपील स्वीकार कर ली। कहा के मुआवजा निर्धारण के लिए मामले को दोबारा डीएम को भेज कर रेफरेंस कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण किया है।
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कोर्ट ने कहा कि धारा-18 के तहत गठित रेफरेंस कोर्ट अपीलीय नहीं, बल्कि मूल अधिकारिता वाली अदालत है। इसलिए उसके पास मामले को रिमांड (वापस भेजने) की शक्ति नहीं है। मामले में कलेक्टर की ओर से तय मुआवजे से असंतुष्ट भू-स्वामी इफ्तेखार अहमद और इजाज अहमद ने रेफरेंस कोर्ट का दरवाजा टखटाया था। रेफरेंस कोर्ट ने अवार्ड को रद्द कर मामला कलेक्टर को वापस भेज दिया था। इस आदेश को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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कोर्ट ने रेफरेंस कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए फैसले में कहा कि रेफरेंस कोर्ट के पास केवल दो विकल्प होते हैं या तो वह कलेक्टर के अवार्ड को बरकरार रखे या फिर साक्ष्यों के आधार पर मुआवजा बढ़ाए। अवार्ड को निरस्त कर नए सिरे से निर्धारण का निर्देश देना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
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