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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Reducing the pre-determined interest rate on FD is illegal, the court said – the promise cannot be broken.

High Court : एफडी पर पूर्व निर्धारित ब्याज दर घटाना गैरकानूनी, कोर्ट ने कहा- वादा तोड़ नहीं सकते

Sat, 29 Nov 2025 07:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 29 Nov 2025 07:57 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि फिक्स डिपॉजिट (एफडी) पर निर्धारित ब्याज दर बैंक एकतरफा कम नहीं कर सकते। एफडी ग्राहक और बैंक के बीच करार का दस्तावेज है। लिहाजा, बैंक अपने किए वादे से मुकर नहीं सकता। यह गैरकानूनी है।

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Reducing the pre-determined interest rate on FD is illegal, the court said – the promise cannot be broken.
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि फिक्स डिपॉजिट (एफडी) पर निर्धारित ब्याज दर बैंक एकतरफा कम नहीं कर सकते। एफडी ग्राहक और बैंक के बीच करार का दस्तावेज है। लिहाजा, बैंक अपने किए वादे से मुकर नहीं सकता। यह गैरकानूनी है।

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इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अजित कुमार, न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने बुलंदशहर के नेम कुमार जैन व उनके भाई समेत कई अन्य की याचिका निस्तारित कर दी। साथ ही उनकी एफडी पर पूर्व से निर्धारित ब्याज दर के मुताबिक पूरा ब्याज व उसमें की गई कटौती के बकाये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

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नेम कुमार, बसंत कुमार ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स वर्तमान में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में ब्याज दर 10.75 प्रतिशत और 10.25 प्रतिशत पर एफडी ली थी। इसे बैंक ने घटाकर 9.25% और 8.25% कर दिया। इसके खिलाफ इन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के वकील ने दलील दी कि एफडी जारी होते समय जो ब्याज दर तय की जाती है, वह बैंक का संविदात्मक वादा है। इसे परिपक्वता से पहले एकतरफा घटाना न केवल अनुचित, बल्कि कानून के विरुद्ध है।

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बैंक की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में दलील दी कि ब्याज दर में कमी आरबीआई और इंडियन बैंक एसोसिएशन के सर्कुलरों के अनुरूप की गई है। याचियों के दिवंगत पिता सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी थे। वह एफडी के मुख्य खाताधारक नहीं थे। इसलिए अतिरिक्त ब्याज दर का लाभ देना संभव नहीं था।

कोर्ट ने कहा कि आरबीआई नियम बैंक को एफडी पर पूर्व निर्धारित ब्याज दर ही देने के लिए बाध्य करते हैं। घोषित ब्याज दर को कम करने का कोई अधिकार बैंक को नहीं है। यदि बैंक ने गलती से अधिक ब्याज घोषित कर दिया, तब भी ग्राहक को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने पूर्व में सरोजनी जैन केस में दिए फैसले को इस प्रकरण में पूरी तरह सही माना।

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