श्रृंगार गौरी में पूजा का मामला : अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की याचिका पर जिला जज से मांगा रिकॉर्ड
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने जिला अदालत के क्षेत्राधिकार आपत्ति संबंधी पत्रावली की छायाप्रति मांगी है। सुनवाई के दौरान निगरानी याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कुछ कागजात दाखिल करने के लिए समय मांगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वाराणसी के ज्ञानवापी स्थित श्रृंगार गौरी में नियमित पूजा के अधिकार को लेकर वाराणसी की अदालत में हिंदू महिलाओं द्वारा दाखिल सिविल वाद की ग्राह्यता पर मुस्लिम पक्ष की आपत्ति निरस्त करने के जिला जज के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल याचिका की अगली सुनवाई 19 अक्तूबर को होगी। हाईकोर्ट ने सोमवार को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला जज से केस से संबंधित कुछ रिकॉर्ड मांगे।
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने जिला अदालत के क्षेत्राधिकार आपत्ति संबंधी पत्रावली की छायाप्रति मांगी है। सुनवाई के दौरान निगरानी याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कुछ कागजात दाखिल करने के लिए समय मांगा। वरिष्ठ अधिवक्ता एस एफ ए नकवी ने कहा कि कुछ ऐसे कागजात हैं, जिन्हें प्रस्तुत किया जाना जरूरी है। जो याचिका के साथ दाखिल नहीं हुए हैं।
कोर्ट ने याची को समय देने के बजाय जिला जज वाराणसी को ही सीपीसी के आदेश सात नियम 11 से संबंधित दाखिल सभी कागजात की सत्यापित छाया प्रति पेश करने का निर्देश दिया है। वाराणसी के जिला जज ने 12 सितंबर को हिंदू पक्ष की महिलाओं द्वारा शृंगार गौरी की नियमित पूजा अर्चना की मांग में दाखिल वाद के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की आपत्ति खारिज कर दी थी और मुकदमे की सुनवाई करने का आदेश दिया है, जिसे चुनौती दी गई है।
दिल्ली की राखी सिंह समेत पांच महिलाओं ने वाराणसी की जिला अदालत में पिछले साल वाद दाखिल कर शृंगार गौरी की पूजा अर्चना किए जाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सुनवाई वाराणसी के जिला जज की कोर्ट में चल रही है।
12 सितंबर को आया था फैसला
मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर महीनों चली सुनवाई के बाद जिला जज की कोर्ट ने अगस्त महीने में अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। जिला जज एके विश्वेश की कोर्ट ने 12 सितंबर को फैसला सुनाया था। जिला जज ने मुस्लिम पक्ष की आपत्ति को खारिज करते हुए राखी सिंह केस को चलते रहने की इजाजत दी थी।
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मुस्लिम ने एक बार फिर दोहराया गया है कि 1991 के प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट के तहत इस मामले की सुनवाई नहीं की जा सकती है। अर्जी में हाईकोर्ट का फैसला आने तक वाराणसी की अदालत में चल रही सुनवाई पर रोक लगाए जाने की भी मांग की गई है। ज्ञानवापी विवाद से जुड़े पांच मामले पहले से ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित हैं। हालांकि राखी सिंह का केस पहली बार हाईकोर्ट आया है।