झटका : नियमों को ताक पर रखकर लिपिक से जेई बने 106 अभियंताओं को हटाने की संस्तुति
प्रमुख सचिव ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भी सूची मांगी है। ऐसे में प्रयागराज समेत अन्य जिलों में प्रोन्नत कर जेई के पदों पर तैनात किए गए अवर अभियंताओं का हटना अब तय माना जा रहा है। नौ वर्ष पहले 2013 में सपा सरकार के दौरान 124 लिपिकों को जेई बना दिया गया था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पीडब्ल्यूडी में दूरस्थ शिक्षा केंद्रों के डिप्लोमा के आधार पर लिपिकीय संवर्ग से पदोन्नति पाने वाले 106 अवर अभियंताओं को हटाने की संस्तुति कर दी गई है। दस्तावेजों की जांच के लिए गठित रिव्यू कमेटी की ओर से दूरस्थ शिक्षा केंद्रों के डिप्लोमा को अमान्य ठहराए जाने के बाद सोमवार को प्रमुख सचिव नितिन रमेश गोकर्ण के समक्ष इस प्रकरण को प्रस्तुत किया गया।
प्रमुख सचिव ने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भी सूची मांगी है। ऐसे में प्रयागराज समेत अन्य जिलों में प्रोन्नत कर जेई के पदों पर तैनात किए गए अवर अभियंताओं का हटना अब तय माना जा रहा है। नौ वर्ष पहले 2013 में सपा सरकार के दौरान 124 लिपिकों को जेई बना दिया गया था।
नियम को ताक पर रखकर लिपिक से अवर अभियंता (जेई) के पद पर प्रोन्नति पाने वाले अभियंताओं को हटाने की संस्तुति कर दी गई है। सोमवार को पीडब्ल्यूडी के प्रमुख नितिन रमेश गोकर्ण ने इस मामले की जानकारी तलब की। उन्होंने प्रमुख अभियंता नियोजन समेत अन्य अफसरों के साथ इस मामले की जानकारी ली। प्रमुख सचिव की सख्ती के बाद प्रमुख अभियंता एके श्रीवास्तव की रिव्यु कमेटी ने 106 प्रमोटी अवर अभियंताओं (जेई) का डिप्लोमा अवैध ठहराते हुए रिपोर्ट पर दस्तखत कर दिए।
पता चला है कि कमेटी के परीक्षण में मात्र 18 प्रमोटी जेई के डिप्लोमा ही वैध पाए गए हैं। इस दौरान अफसरों ने प्रमुख सचिव को बताया गया कि इस प्रोन्नति के लिए जारी नियमावली के तहत जेई के 95 फीसदी पदों को आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती के जरिए भरा जाना था। जबकि, पांच प्रतिशत पदों पर विभाग में नियुक्त समूह ग के लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति दी जानी थी। लेकिन, पदोन्नति में मानक का ध्यान नहीं रखा गया।
जांच में डिग्री अमान्य करार दिया गया
अवर अभियंता के पांच फीसदी पद लिपिकों की पदोन्नति के जरिए भरे जाने थे, लेकिन नियमों को ताक पर रख दिया गया। इतना ही नहीं, इसके लिए इंजीनियरिंग का डिप्लोमा करने वाले लिपिकों को पात्र माना गया था। लेकिन, तमाम लिपिकों ने राजस्थान के एक विश्वविद्यालय के अलावा कई निजी संस्थानों से दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से दो वर्षीय डिप्लोमा हासिल कर लिया। फिर, इसी डिप्लोमा के आधार पर 122 लिपिकों को जेई बना दिया गया। जबकि, नियुक्ति से पहले डिप्लोमा का सक्षम संवैधानिक संस्था से सत्यापन करवाया जाना चाहिए था।
ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) और डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो (डीईबी) की ओर से भी दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से लिए गए डिप्लोमा को अमान्य करार दिया जा चुका है। बावजूद इसके अभी तक इस मामले की पत्रावली दबाकर रखी गई थी और गलत तरीके से प्रमोशन पाने वाले अवर अभियंताओं से ही काम लिया जाता रहा।
प्रोन्नति देने वाले कार्मिकों की भूमिका भी शक केदायरे में
सूत्रों के मुताबिक, जब इन बाबुओं को प्रोन्नत किया जा रहा था, उस वक्त भी पीडब्ल्यूडी मुख्यालय में तैनात तत्कालीन स्टाफ आफिसर ने इस पर आपत्ति जताए हुए वरिष्ठ अधिकारियों को चेताया था। लेकिन, उस वक्त इस पर ध्यान नहीं दिया गया। पीडब्ल्यूडी के ही एक अधिकारी कहते हैं कि नियमविरुद्ध प्रोन्नति क्यों दी गई। इसके कारणों की जांच करा ली जाए, तो प्रोन्नति देने के लिए जिम्मेदारी अधिकारी व कर्मचारी भी कार्रवाई से बच नहीं पाएंगे।