प्रयागराज : हनुमत निकेतन में दान-चढ़ाव में मनमानी पर रिसीवर नियुक्त, एडीजे ने दिया आदेश
मंदिर के नियमित दर्शनार्थी सुशील त्रिपाठी की ओर दाखिल अर्जी में हनुमत निकेतन मंदिर ट्रस्ट की ओर से बैठकें न बुलाने, दान-चढ़ावा में मनमानी करने, दानपात्रों को न खोलने और मंदिर परिसर में परिजनों के नाम से मिष्ठान की दुकानों के संचालन करने की बात कही गई।
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एडीजे कोर्ट ने सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन मंदिर में रिसीवर नियुक्त करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने डीएम को रिसीवर के रूप में नियुक्त करने का आदेश जारी किया है। यह आदेश सुशील त्रिपाठी बनाम हनुमत निकेतन मंदिर के मुकदमे की सुनवाई करते हुए दिया गया है।
मंदिर के नियमित दर्शनार्थी सुशील त्रिपाठी की ओर दाखिल अर्जी में हनुमत निकेतन मंदिर ट्रस्ट की ओर से बैठकें न बुलाने, दान-चढ़ावा में मनमानी करने, दानपात्रों को न खोलने और मंदिर परिसर में परिजनों के नाम से मिष्ठान की दुकानों के संचालन करने की बात कही गई। अर्जी के मुताबिक हनुमत निकेतन मंदिर न्यास के संचालन की व्यवस्था न्यास की नियमावली में दी गई है, लेकिन, न्यास के मंत्री सच्चिदानंद मिश्र अवैधानिक तरीके से दानपात्र की धनराशि और अन्य आय-व्यय के लेखाजोखा में मनमानी कर स्वयं और परिवार के लिए धनार्जन कर रहे हैं।
उन्होंने अपनी पत्नी के नाम मंदिर परिसर में मिश्रा मिष्ठान भंडार के नाम से मिठाई की दुकान और कारखाना न्यास की अनुमति के बिना खोल रखा है। इतना ही नहीं वहां वाहन स्टैंड के संचालन के साथ ही परिसर को व्यक्तिगत उत्सवों के लिए किराये पर उठाकर कमाई की जा रही है। मिश्रा मिष्ठान भंडार का किराया भी मंदिर के कोष में जमा नहीं किया जा रहा है। दान पात्र को बीते दो वर्ष से नहीं खोला जा रहा है।
2020 के बाद से नहीं बुलाई गई ट्रस्ट की बैठक
न्यास मंडल की बैठक भी मंत्री अपनी हठधर्मिता की वजह से वर्ष 2020 के बाद से नहीं बुला रहे हैं। इतना ही नहीं मंत्री ने हनुमत निकेतन को अपना व्यक्तिगत संस्थान घोषित कर रखा है। इसके अलावा मंदिर के सेवकों और पुजारियों के मानदेय भुगतान के लिए संचालित संयुक्त बैंक खाते को भी अव्यवस्थित कर अवरोध उत्पन्न कर दिया गया है।
ऐसे में मंदिर के संचालन के लिए रिसीवर नियुक्त किया जाना आवश्यक है। याचिकाकर्ता सुशील त्रिपाठी की ओर से अपनी ओर से न्यास के मंत्री पर लगाए गए आरोपों के समर्थन में कई साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। 20 मार्च को इस मामले की सुनवाई हुई। इसमें साक्ष्यों के परीक्षण और ट्रस्ट डीड के अवलोकन के बाद वहां रिसीवर की नियुक्ति की जरूरत को न्यायोचित ठहराया। एडीजे कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को सुनने के बाद जिलाधिकारी को हनुमत निकेतन का रिसीवर नियुक्त कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अब डीएम ही ट्रस्ट डीड के अनुसार मंदिर का प्रबंधन करेंगे और करवाएंगे।
अभी कोर्ट के आदेश की प्रति मुझे प्राप्त नहीं हुई है। कोर्ट ने ऐसा आदेश दिया है तो उसका पालन कराया जाएगा। - नवनीत सिंह चहल, जिलाधिकारी।