फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Re- writing of history in the perspective needed

भारतीय परिपेक्ष्य में इतिहास का दोबारा लेखन जरूरी

Sun, 11 Oct 2015 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 11 Oct 2015 01:23 AM IST
विज्ञापन
Re- writing of history in the perspective needed
इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ की ओर से सरदार बल्लभ भाई पटेल की स्मृति में शनिवार को आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने भारती सामाजिक व्यवस्था के परिपेक्ष्य में इतिहास के पुनर्लेखन की बात कही। गोष्ठी का विषय था भारत का आर्थिक इतिहास और सरदार वल्लभ भाई पटेल की राष्ट्रनिर्माण में भूमिका।
विज्ञापन


सामाजिक चिंतक डॉ.त्रिभुवन सिंह ने कहा कि कई इतिहासकारों ने भारतीय संस्कृति को विकृत किया है। उन्होंने कहा कि जातिभेद और छुआछूत की व्यवस्था वर्तमान की ही विसंगतियां हैं। भारत में वर्ण-सवर्ण-अवर्ण की व्यवस्था कर्मणा के सिद्धांत पर आधारित रही है न कि जन्ममा सिद्धांत पर। महान चिंतक कौटिल्य ने भी कहा है कि अपने सेवक से मलमूत्र-जूठन उठवाने वाले की संपत्ति जब्त कर लेनी चाहिए।
विज्ञापन


इसलिए भारतीय दृष्टिकोण से इतिहास का पुनर्लेखन आवश्यक है। अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर बीएन सिंह ने सांस्कृतिक और एकात्म मानववाद पर विचार रखा। संयोजन छात्रसंघ के संयुक्त मंत्री श्रवण कुमार जायसवाल और शोध छात्र सर्वेश सिंह ने किया। गोष्ठी में अभिषेक सिंह चौहान, राणा यशवंत प्रताप सिंह, अमित सिंह, देवमणि, सुरेश मौर्या, सुमन मौर्या, गीता सिंह, ज्योति, धीरज, प्रांशु आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed