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ध्वनि प्रदूषण के रावण को गहरी चोट
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हाईकोर्ट के आदेश से ध्वनि प्रदूषण के रावण को गहरी चोट लगी है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार इस बार नवरात्र में ध्वनि का स्तर मानकों के अनुरूप रहा। शहरियों के सेहत के लिहाज से यह अच्छा संकेत बताया जा रहा है।
मानक के अनुसार व्यवसायिक क्षेत्रों में 65 तथा आवासीय इलाके में 55 डेसीबल तक ध्वनि का स्तर होना चाहिए। इसके विपरीत पिछले वर्ष तक नवरात्र के दौरान तथा दशहरा के दिन शहर में ध्वनि का स्तर 80 डेसीबल तक पहुंच जाता था। जहां डीेजे बजते थे वहां यह आंकड़ा 100-105 के बीच होता था लेकिन इस बार इतना शोर नहीं हुआ। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नवरात्र तथा दशहरा के मद्देनजर जिले में जगह-जगह ध्वनि स्तर की माप की जा रही है। दशहरा के अगले दिन फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी। बोर्ड के क्षेत्रीय प्रमुख जेबी सिंह ने बताया कि अब तक के प्राप्त आंकड़ों के अनुसार नवरात्र के दौरान शहर में ध्वनि का औसत स्तर 60 से 65 के बीच रहा। यह आंकड़ा व्यवसायिक स्थलों तथा दुर्गा पंडाल के आसपास के क्षेत्रों का है। यानी, ध्वनि का स्तर मानक से नीचे रहा। उन्होंने बताया कि रिहायशी इलाकों में भी ध्वनि प्रदूषण का स्तर मानक के अनुरूप रहा। यह आवाज भी लोगों, वाहनों तथा अन्य वजहों से रही। ध्वनि प्रदूषण तथा मानव स्वास्थ्य के लिहाज से यह अच्छा संकेत है। जेबी सिंह ने बताया कि दशहरा के दिन भी ध्वनि प्रदूषण की जांच की जाएगी। इसके बाद इस दौरान होने वाली ध्वनि की रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
मस्तिष्क को बीमार कर देता है ध्वनि प्रदूषण
मानक से तेज आवाज मनुष्य के साथ जानवरों के लिए भी काफी खतरनाक है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार तेज आवाज के बीच रहने से चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। घबड़ाहट की बीमारी का भी शिकार हो जाता है। सुनाई कम देने लगता है। मनुष्य पर इसके अन्य दुष्प्रभाव भी पड़ते हैं।
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मानक के अनुसार व्यवसायिक क्षेत्रों में 65 तथा आवासीय इलाके में 55 डेसीबल तक ध्वनि का स्तर होना चाहिए। इसके विपरीत पिछले वर्ष तक नवरात्र के दौरान तथा दशहरा के दिन शहर में ध्वनि का स्तर 80 डेसीबल तक पहुंच जाता था। जहां डीेजे बजते थे वहां यह आंकड़ा 100-105 के बीच होता था लेकिन इस बार इतना शोर नहीं हुआ। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नवरात्र तथा दशहरा के मद्देनजर जिले में जगह-जगह ध्वनि स्तर की माप की जा रही है। दशहरा के अगले दिन फाइनल रिपोर्ट आ जाएगी। बोर्ड के क्षेत्रीय प्रमुख जेबी सिंह ने बताया कि अब तक के प्राप्त आंकड़ों के अनुसार नवरात्र के दौरान शहर में ध्वनि का औसत स्तर 60 से 65 के बीच रहा। यह आंकड़ा व्यवसायिक स्थलों तथा दुर्गा पंडाल के आसपास के क्षेत्रों का है। यानी, ध्वनि का स्तर मानक से नीचे रहा। उन्होंने बताया कि रिहायशी इलाकों में भी ध्वनि प्रदूषण का स्तर मानक के अनुरूप रहा। यह आवाज भी लोगों, वाहनों तथा अन्य वजहों से रही। ध्वनि प्रदूषण तथा मानव स्वास्थ्य के लिहाज से यह अच्छा संकेत है। जेबी सिंह ने बताया कि दशहरा के दिन भी ध्वनि प्रदूषण की जांच की जाएगी। इसके बाद इस दौरान होने वाली ध्वनि की रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
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मस्तिष्क को बीमार कर देता है ध्वनि प्रदूषण
मानक से तेज आवाज मनुष्य के साथ जानवरों के लिए भी काफी खतरनाक है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार तेज आवाज के बीच रहने से चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। घबड़ाहट की बीमारी का भी शिकार हो जाता है। सुनाई कम देने लगता है। मनुष्य पर इसके अन्य दुष्प्रभाव भी पड़ते हैं।
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