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प्रो. हांगलू के गलत निर्णय से फंसे वेतन के करोड़ों रुपये

Fri, 10 Jan 2020 01:42 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 10 Jan 2020 01:42 AM IST
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ratan lal hangloo allahabad university
ratan lal hangloo allahabad university - फोटो : CITY DESK
पत्राचार संस्थान को बंद करने के बाद कर्मचारियों को नहीं किया समायोजित
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सहायक निदेशक के मामले में सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी है एसएलपी
प्रयागराज, 9 जनवरी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के पूर्व कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू का एक गलत निर्णय से पत्रचार पाठ्यक्रम एवं सतत शिक्षा संस्थान के 100 से अधिक कर्मचारियों के वेतन के रूप में करोड़ों रुपये फंसे हुए हैं। इनमें संस्थान की सहायक निदेशक रहीं रेखा सिंह को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी हैं। हालांकि इविवि प्रशासन ने इसके बाद भी उनके बकाया एरियर का भुगतान नहीं किया है।
पत्राचार संस्थान की स्थापना वर्ष 1976 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अभिन्न अंग के रूप में हुई थीं। इसके लिए 100 से अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। कुलपति का पदभार संभालने के बाद प्रो. हांगलू ने इस संस्थान को बंद करने का प्रस्ताव केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेज दिया। पत्रचार संस्थान के कर्मचारियों की ओर से अजय त्रिपाठी का कहना है कि संस्थान को बंद करने का प्रस्ताव तो मंत्रालय को भेज दिया गया लेकिन कर्मचारियों को कहीं भी समायोजित नहीं किया किया।
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कर्मचारियों का वेतन भी रोक दिया गया। आर्थिक तंगी झेल रहे कुछ कर्मचारी बीमार पड़े तो इलाज के अभाव में उनकी मौत हो गई। इसी संस्थान का एक कर्मचारी अल्लापुर सब्जी मंडी सड़क किनारे सब्जी बेचता है। कर्मचारियों ने प्रो. हांगलू से बार-बार वार्ता का प्रयास किया लेकिन वह तैयार नहीं हुए और अपने असंवदेनशील एवं तानाशाही पूर्ण निर्णय पर अड़े रहे। इसके निर्णय के विरोध में संस्थान की सहायक निदेशक रहीं रेखा सिंह ने पहले हाईकोर्ट और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।
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सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद इविवि प्रशासन ने वहां एसएलपी दाखिल की और सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी को भी खारिज कर दिया। एसएलपी खारिज होने के बाद भी इविवि प्रशासन बकाया भुगतान देने को तैयार नहीं है। प्रो. हांगलू के एक गलत निर्णय के कारण पत्राचार कर्मियों के तकरीबन 30 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। कर्मचारियों ने इविवि के कार्यवाह कुलपति से मांग की है कि संस्थान कर्मियों के बकाए का भुगतान कराएं और कर्मचारियों को रिक्त पदों पर समायोजित करें, ताकि 30-35 वर्षों से सेवारत कर्मचारियों और उनके परिवार वालों को राहत मिल सके।
कर्मचारियों ने ऋचा, रोहित का किया अभिनंदन
- पत्राचार संस्थान के कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह एवं रोहित मिश्र का अभिनंदन किया। कर्मचारियों ने कहा कि ऋचा और रोहित के नेतृत्व में चले आंदोलन के कारण ही प्रो. हांगलू की असलियत सामने आ सकी और उन्हें विश्वविद्यालय छोड़कर जाना पड़ा। ऋचा और रोहित ने कहा कि कर्मचारियों के बकाया भुगतान और समायोजित के मुद्दे पर उनके साथ हैं।

प्रो. हांगलू के जाने पर इविवि में बंटी मिठाई
- प्रो. हांगलू के इस्तीफे और इविवि से विदाई के बाद पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र ने हनुमान दर्शन किए और इविवि परिसर में 51 किलो लड्डू का वितरण किया। विश्वविद्यालय के प्रत्येक विभाग में जाकर छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को मिठाई खिलाई। इस दौरान ऑटा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राम किशोर शास्त्री ने कहा कि यह जीत बताती है कि सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं। पूर्व महामंत्री निर्भय द्विवेदी ने कहा कि विश्वविद्यालय का पुराना गौरव वापस लाने की लड़ाई जारी रहेगी। इस दौरान नवीन, अभिषेक, अतुल, अनिरुद्ध, कार्तिकेय, दानिश आदि मौजूद रहे।
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