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जेएनयू में फीस वृद्धि, दमन के खिलाफ निकाला जुलूस
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Rally organised showing solidarity with JNU
- फोटो : CITY DESK
आजाद पार्क से सुभाष चौराह तक निकाले गए जुलूस में लगे नारे ‘हमारा हाथ जेएनयू के साथ
संगठनों ने की मांग ‘शिक्षा का निजीकरण व कैंपस में दमन पर तत्काल रोक लगाए सरकार
प्रयागराज। जेएनयू में फीस वृद्धि और दमन के खिलाफ बुधवार को विभिन्न संगठनों की ओर से आजाद पार्क से जुलूस निकाला गया जो सुभाष चौराहा पर पहुंचकर सभा में परिवर्तित हो गया। सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जेएनयू को तबाह करने की मुहिम में केंद्र सरकार ने वहां फीस वृद्धि और छात्रावासों के नियमों में बदलाव के माध्यम से छात्र-छात्राओं पर पहरेदारी जैसे कई छात्र विरोधी कदम उठाए हैं।
जेएनयू में सस्ती शिक्षा को समाप्त करने की कोशिशों के खिलाफ जब विद्यार्थियों ने संसद की तरफ कूच किया तो उनका बर्बर दमन कराया गया। सस्ती शिक्षा और रोजगार दे पाने में नाकाम मोदी सरकार प्रतिरोध और बदलाव का स्तम्भ बने जेएनयू को ध्वस्त करने पर आमादा है। नागरिक समाज उनके संघर्ष को समर्थन देता और सरकार से मांग करता है कि वहां के छात्रों का दमन बंद कर उनकी मांगों को माना जाए।
वक्ताओं ने बीएचयू में संस्कृत के नवनियुक्त प्राध्यापक डॉ फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन को भारत के सांविधानिक मूल्यों पर हमला बताया। कहा, इसे किसी भी कीमत पर बर्दास्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शन करने वालों में रामजी राय, आशीष मित्तल, प्रो अली अहमद फातमी, अविनाश कुमार मिश्र, गायत्री गांगुली, राजवेंद्र सिंह, आनंद मालवीय, नसीम, रामसागर, अमित, सीमा आजाद, कमल उसरी, पद्मासिंह, भीमलाल, अखिल विकल्प, सुनील मौर्य, रितेश विद्यार्थी, शक्ति रजवार, सुनील यादव, आरिफ चंद्रपाल, आरिफ रामचंद्र, निरंजन देव, सोनू यादव आदि शामिल थे।
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संगठनों ने की मांग ‘शिक्षा का निजीकरण व कैंपस में दमन पर तत्काल रोक लगाए सरकार
प्रयागराज। जेएनयू में फीस वृद्धि और दमन के खिलाफ बुधवार को विभिन्न संगठनों की ओर से आजाद पार्क से जुलूस निकाला गया जो सुभाष चौराहा पर पहुंचकर सभा में परिवर्तित हो गया। सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जेएनयू को तबाह करने की मुहिम में केंद्र सरकार ने वहां फीस वृद्धि और छात्रावासों के नियमों में बदलाव के माध्यम से छात्र-छात्राओं पर पहरेदारी जैसे कई छात्र विरोधी कदम उठाए हैं।
जेएनयू में सस्ती शिक्षा को समाप्त करने की कोशिशों के खिलाफ जब विद्यार्थियों ने संसद की तरफ कूच किया तो उनका बर्बर दमन कराया गया। सस्ती शिक्षा और रोजगार दे पाने में नाकाम मोदी सरकार प्रतिरोध और बदलाव का स्तम्भ बने जेएनयू को ध्वस्त करने पर आमादा है। नागरिक समाज उनके संघर्ष को समर्थन देता और सरकार से मांग करता है कि वहां के छात्रों का दमन बंद कर उनकी मांगों को माना जाए।
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वक्ताओं ने बीएचयू में संस्कृत के नवनियुक्त प्राध्यापक डॉ फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन को भारत के सांविधानिक मूल्यों पर हमला बताया। कहा, इसे किसी भी कीमत पर बर्दास्त नहीं किया जाएगा। प्रदर्शन करने वालों में रामजी राय, आशीष मित्तल, प्रो अली अहमद फातमी, अविनाश कुमार मिश्र, गायत्री गांगुली, राजवेंद्र सिंह, आनंद मालवीय, नसीम, रामसागर, अमित, सीमा आजाद, कमल उसरी, पद्मासिंह, भीमलाल, अखिल विकल्प, सुनील मौर्य, रितेश विद्यार्थी, शक्ति रजवार, सुनील यादव, आरिफ चंद्रपाल, आरिफ रामचंद्र, निरंजन देव, सोनू यादव आदि शामिल थे।

Rally organised showing solidarity with JNU- फोटो : CITY DESK
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