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यूपी राज्य सेतु निगम को मिली शास्त्री पुल के कायाकल्प की जिम्मेदारी
Thu, 26 Aug 2021 10:08 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 26 Aug 2021 10:08 PM IST
सार
पीडब्ल्यूडी की ओर से इस सेतु की मरम्मत का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रयागराज-वाराणसी राजमार्ग पर स्थित इस सेतु से रोजाना 50 हजार से अधिक वाहनों का आवागमन होता है। इसमें भी ओवरलोड वाहनों की अधिकता होती है।
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शास्त्री पुल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झूंसी में गंगा पर बने लाल बहादुर शास्त्री सेतु का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। पूर्वांचल को जोड़ने वाले इस सेतु की सतह बारिश में उखड़कर कई जगह गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई है। दशक भर में रख रखाव पर करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी इसके ज्वाइंट एक्सटेंशन क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे में इसकी जल्द मरम्मत की तैयारी है। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को इसके कायाकल्प के लिए डीपीआर बनवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डीपीआर बनने के बाद टेंडर कराया जाएगा।
पीडब्ल्यूडी की ओर से इस सेतु की मरम्मत का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रयागराज-वाराणसी राजमार्ग पर स्थित इस सेतु से रोजाना 50 हजार से अधिक वाहनों का आवागमन होता है। इसमें भी ओवरलोड वाहनों की अधिकता होती है। भारी मालवाहक वाहनों का इस सेतु पर दिन रात तांता लगा रहता है। ऐसे में अधिक दबाव होने और समय से मरम्मत न कराए जाने की वजह से इसके कई ज्वाइंट एक्सटेंशन और पिलर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बीते वर्ष रेलिंग टूटने के साथ ही दो पिलर धंस कर टेढ़े हो गए थे। कहा जा रहा है कि एक दशक पहले पुल की सतह की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन उसके बाद सिर्फ गड्ढों को भरने की रस्म अदायगी ही की जाती रही है।
ऐसे में इस बार बारिश में इस सेतु की सतह और भी क्षतिग्रस्त होकर गई जगह गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई है। एक तरफ से गड्ढे भरे जाते हैं और दूसरी ओर उखड़ जा रहे हैं। इस सेतु की निगरानी पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड तृतीय के जिम्मे है। इस खंड के एक्सईएन एक्सईएन अजय कुमार गोयल कहते हैं कि सतह के गड्ढे भरे जा रहे हैं, लेकिन बारिश की वजह से गिट्टियां उखड़ जा रही हैं। ऐसे में इसकी मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, ताकि इस पुल की उम्र और क्षमता बढ़ाई जा सके। पीडब्ल्यूडी की ओर से इस सेतु के ज्वाइंट एक्सटेंशन, बियरिंग की मरम्मत कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि इस सेतु की मरम्मत कौन कार्यदायी संस्था कराएगी, यह अभी तय नहीं है। एक्सईएन गोयल के मुताबिक डीपीआर बनने के बाद इस पर शासन की ओर से निर्णय लिया जाएगा।
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पीडब्ल्यूडी की ओर से इस सेतु की मरम्मत का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रयागराज-वाराणसी राजमार्ग पर स्थित इस सेतु से रोजाना 50 हजार से अधिक वाहनों का आवागमन होता है। इसमें भी ओवरलोड वाहनों की अधिकता होती है। भारी मालवाहक वाहनों का इस सेतु पर दिन रात तांता लगा रहता है। ऐसे में अधिक दबाव होने और समय से मरम्मत न कराए जाने की वजह से इसके कई ज्वाइंट एक्सटेंशन और पिलर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बीते वर्ष रेलिंग टूटने के साथ ही दो पिलर धंस कर टेढ़े हो गए थे। कहा जा रहा है कि एक दशक पहले पुल की सतह की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन उसके बाद सिर्फ गड्ढों को भरने की रस्म अदायगी ही की जाती रही है।
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ऐसे में इस बार बारिश में इस सेतु की सतह और भी क्षतिग्रस्त होकर गई जगह गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई है। एक तरफ से गड्ढे भरे जाते हैं और दूसरी ओर उखड़ जा रहे हैं। इस सेतु की निगरानी पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड तृतीय के जिम्मे है। इस खंड के एक्सईएन एक्सईएन अजय कुमार गोयल कहते हैं कि सतह के गड्ढे भरे जा रहे हैं, लेकिन बारिश की वजह से गिट्टियां उखड़ जा रही हैं। ऐसे में इसकी मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, ताकि इस पुल की उम्र और क्षमता बढ़ाई जा सके। पीडब्ल्यूडी की ओर से इस सेतु के ज्वाइंट एक्सटेंशन, बियरिंग की मरम्मत कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। हालांकि इस सेतु की मरम्मत कौन कार्यदायी संस्था कराएगी, यह अभी तय नहीं है। एक्सईएन गोयल के मुताबिक डीपीआर बनने के बाद इस पर शासन की ओर से निर्णय लिया जाएगा।
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