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समझ से परे है रेलवे का 85 फीसदी से किराया छोड़ने का गणित 

Sat, 09 May 2020 12:44 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 09 May 2020 12:44 AM IST
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railway news update: The math to leave 85 per cent fare of railways is beyond comprehension
prayagraj news - फोटो : prayagraj
एक मई से चलाई गईतमाम श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सफर करने वाले मजदूरों के लिए रेलवे द्वारा 85 फीसदी  एवं राज्य सरकार द्वारा 15 फीसदी किराया वहन करने करने की बात की जा रही है।लेकिन इन ट्रेनों से सफर करके पहुंचे सैकड़ों मजदूरों के पास उपलब्ध टिकट कुछ औरही बयां कर रहे हैं। इन श्रमिकों को कहना है कि वह जिस स्थान से ट्रेन पकड़कर चढ़ेथे, वहां संबंधित राज्य सरकार नेटिकट की एवज में उनसे किराया लिया। प्रयागराज पहुंचे श्रमिकों ने अपने टिकट भीदिखाए। 
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प्रयागराजमें अब तक सात श्रमिक स्पेशल आ चुकी हैं। आठवीं श्रमिक स्पेशल गुजरात के वडोदरा सेशनिवार की सुबह आ रही है। इसके पूर्व सात में से छह श्रमिक स्पेशल गुजरात से हीआई। इसमें भी चार स्पेशल सूरत से आई। इस ट्रेन से आए श्रमिकों के पास जो टिकट रहेउसमें सूरत से प्रयागराज तक किराया 595 रुपये अंकित था।  कुछ श्रमिकों का आरोप था कि सूरत में इस टिकट केलिए ठेकेदारों एवं कुछ अन्य लोगों ने 700 से एक हजार रुपये तक वसूले। वहीं रेलवे अफसरों काकहना है कि रेलवे बोर्ड की गाइड लाइन है कि वह टिकटों को प्रशासन के हवाले करेगाऔर प्रशासन ही वह टिकट श्रमिकों को उपलब्ध कराएगा।
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डीआरएम प्रयागराज अमिताभ भीइसकी पुष्टि दो दिन पहले कर चुके हैं। उधर रेलवे द्वारा किराये में जो 85 फीसदी की छूट देने की बात कही गई है उसका गणित कुछओर ही है। दरअसल रेलवे आमतौर पर जो किराया यात्रियों से लेती है उसमें 40 से 43 फीसदी की सब्सिडी शामिल होती है। अभी श्रमिकस्पेशल जो चल रही हैं उसमें सामाजिक दूरी यात्रियों के बीच बनी रहे तो सभी सीटेंबुक नहीं की जा रही है। यानी कि अगर किसी स्लीपर कोच में 80 बर्थ है तो उसमें 50 बर्थ ही यात्रियों को आवंटित की जा रही हैं।
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इसमें दोनों मिडिल बर्थ और एक साइड अपर बर्थ बुक नहीं की जा रही। इतना ही नहीं ट्रेनखाली होने के बाद वापस अपने गंतव्य स्टेशन तक जाती है। इस दौरान ऑपरेटिंग का जोखर्चा आ रहा है वह भी इसमें जोड़ा जा रहा है। इसी कुल खर्च को जोड़कर 85 फीसदी दिखाने का प्रयास किया गया है। हालांकिरेलवे अफसर इस बारे में कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। हालांकि किराये में छूट कारेलवे की ओर से कोई सर्कुलर भी जारी नहीं किया गया है। ऐसे में इस बात के कयासलगाए जा रहे हैं कि किराये में 85 फीसदी की छूट किसी भ्रामक जानकारी से कम नहीं है।
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