Railway News : बिजली गिरने से नहीं थमेगी ट्रेनों की रफ्तार, डिस्कनेक्टर असेंबली सिस्टम लागू करेगा रेलवे
मानसून के दौरान आसमान से गिरने वाली बिजली अब रेलवे की रफ्तार में रोड़ा नहीं बनेगी। बिजली गिरने से ओएचई (ओवरहेड इक्विपमेंट) लाइन ट्रिप हो जाती थी और ट्रेनें कहीं भी खड़ी हो जाती थीं।
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मानसून के दौरान आसमान से गिरने वाली बिजली अब रेलवे की रफ्तार में रोड़ा नहीं बनेगी। बिजली गिरने से ओएचई (ओवरहेड इक्विपमेंट) लाइन ट्रिप हो जाती थी और ट्रेनें कहीं भी खड़ी हो जाती थीं। अब रेलवे इस समस्या का स्थायी समाधान करने जा रहा है। उत्तर मध्य रेलवे समेत सभी जोनल रेलवे डिस्कनेक्टर असेंबली प्रणाली को लागू करने जा रहे हैं।
यह आधुनिक सिस्टम बिजली गिरने पर खराब हुए लाइटनिंग अरेस्टर उपकरण को पलक झपकते ही मुख्य चालू लाइन से अलग कर देगा। इससे पूरी बिजली लाइन ट्रिप नहीं होगी और न ही सब-स्टेशनों को कोई नुकसान पहुंचेगा। इससे ट्रेनों का परिचालन निर्बाध रूप से जारी रहेगा।
पहले लाइटनिंग अरेस्टर के पंक्चर होने पर कई किलोमीटर तक बिजली गुल हो जाती थी। ट्रेनें रुक जाती थीं। रेलवे अब उपकरणों की तकनीकी खराबी को पकड़ने के लिए पहली बार अत्याधुनिक थर्मोविजन कैमरा तकनीक को अनिवार्य करने जा रहा है। इस थर्मल इमेजिंग कैमरे के जरिये बिजली सब-स्टेशनों की नियमित जांच की जाएगी ताकि कोई भी उपकरण पूरी तरह खराब होने या जलने से पहले ही चिह्नित कर बदला जा सके।
कैसे करता है कार्य
रेलवे डिस्कनेक्टर असेंबली 25 केवी ट्रैक्शन विद्युत प्रणाली का एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्युत लाइन या उपकरण को सुरक्षित रूप से विद्युत स्रोत से अलग करना है। यह स्वयं फॉल्ट करंट या लोड करंट को बाधित नहीं करता, बल्कि सर्किट ब्रेकर के साथ मिलकर कार्य करता है। रखरखाव, निरीक्षण, आपातकालीन परिस्थितियों और विद्युत नेटवर्क के नियंत्रण में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। दृश्य पृथक्करण प्रदान करने के कारण यह रेलवे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है और सम्पूर्ण ट्रैक्शन प्रणाली की विश्वसनीयता एवं कार्यकुशलता को बढ़ाता है। यही कारण है कि आधुनिक रेलवे विद्युत प्रणाली में डिस्कनेक्टर असेंबली को सुरक्षा और संचालन का एक अनिवार्य अंग माना जाता है।