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प्रयागराज: शहीद महेश की शहादत से बेखबर खेल रहे बच्चे,आने-जाने वालों से पूछ रहे यह सवाल...

Tue, 19 Feb 2019 11:58 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Tue, 19 Feb 2019 11:58 AM IST
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Pulwama attack: Road not made for Shaheed Mahesh Yadav' house

शहीद महेश यादव के परिजनों की मदद को लोगों के हाथ बढ़ रहे हैं। दिघिया के जयशंकर शुक्ला ने शहीद के बच्चों की पढ़ाई लिखाई का खर्च वहन करने के लिए परिजनों से कहा है। जयशंकर शुक्ला के प्रतिनिधि के रूप में शहीद के घर गए सोनाई के अभय तिवारी, दिघिया के पिंटू शुक्ला ने परिजनों को ढांढ़स बंधाया और दोनों बच्चों का खर्च वहन करने की बात कही। वहीं मेजा थाना क्षेत्र के बिसेनपुर (परानीपुर) गांव के ब्रह्मदेव सिंह उर्फ चुनमुन सिंह जो चंदौली में क्राइम ब्रांच में सिपाही हैं उन्होंने बच्चों की पढ़ाई लिखाई के लिए अपने वेतन से हर माह एक हजार रूपये देने की बात कही है।

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वहीे अपने पिता की शहादत से बेखबर दोनों बच्चे आपस में खेलते नजर आए। बार-बार दोनों मासूम मां के पास जाते हैं और मां क्यों रो रही हो। यही सवाल करते नजर आते थे। इन दोनों मासूम के सवाल का जवाब मां के पास नहीं है। बच्चों के इस सवाल पर मां के साथ और लोग अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक पाए। मां के साथ-साथ मिलने आने वाले सभी लोगों से भी ये मासूम यही सवाल कर रहे हैं। पूछ रहे हैं हमारे घर में क्या हुआ है, क्यों इतने लोग आ रहे हैं... पापा कब आएंगे। इन मासूम के सवालों का किसी के पास कोई जवाब नहीं है।
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शहीद महेश के परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे देवकी नंदन ठाकुर

Pulwama attack: Road not made for Shaheed Mahesh Yadav' house

रविवार को शहीद महेश यादव के परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंचे कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर महाराज ने कहा कि पाकिस्तान के इस घिनौने हरकत का जवाब देना जरूरी है। उन्होंने शहीद की बहन को रोते-बिलखते देख खुद भावुक हो गए। नम आंखों से श्रद्धांजलि देते हुए परिजनों की हर संभव मदद करने का भरोसा दिलाया। करीब आधे घंटे तक शहीद के परिजनों से वार्ता करने के बाद वे प्रयागराज निकल गए। उनके साथ प्रधान संघ इकाई उरुवा के अध्यक्ष अरूण त्रिपाठी उर्फ टुनटुन, धीरज दूबे, अनूप तिवारी, देवनाथ मिश्रा, पप्पू उपाध्याय, सेठ मिश्रा, अधिवक्ता ओंकारनाथ मिश्रा, धीरज शुक्ला सहित कई लोग रहे।

जिसने दी देश के लिए जान उसके घर तक सड़क भी न बना सका प्रशासन

Pulwama attack: Road not made for Shaheed Mahesh Yadav' house
Martyr Mahesh kumar

इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहेंगे। जिस शहीद महेश कुमार ने देश के लिए अपनी जान दे दी, उसके घर तक पूरा कैबिनेट व प्रशासन मिलकर भी एक ईंट का खड़ंजा तक न बिछा सका। बीडीओ ने कोशिश भी की तो तीन नंबर के रद्दी ईंटों से कुछ दूर तक सड़क बनाई गई लेकिन वह भी घर से पचास मीटर पहले ही रोक दी गई। शहीद के घर पहुंचे कैबिनेट मंत्री और प्रशासन के लोग पगडंडियों के सहारे यात्रा पूरी की। शहीद के अंतिम संस्कार के दूसरे दिन रविवार को परिजनों ने बीडीओ के द्वारा बनाए गए अधूरे खड़ंजे पर आक्रोश जताया।

पुलवामा हमले में शहीद मेजा के सपूत महेश का पार्थिव शरीर बीते शनिवार को टुड़िहार गांव में पहुंचा तो हर ओर भीड़ उमड़ पड़ी। हजारों की संख्या में पहुंचे लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए शहीद के घर पहुंचने लगे। केंद्रीय कैबिनेट मंत्री अनुप्रिया पटेल, यूपी कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी, सांसद, डीएम, एसएसपी आदि भी शहीद के सम्मान में घर तक पहुंचे। इस दौरान शहीद के घर तक जाने के लिए सड़क न होने के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। हालात यह थे कि सड़क के अभाव शहीद के घर पर पार्थिव शरीर न रखकर स्थानीय प्रशासन ने कुछ दूर पहले रिश्तेदार के घर को ही ठिकाना बना लिया। बीडीओ की पहल पर तीन नंबर के रद्दी ईंटों के सहारे अधूरा खड़ंजा बिछाया गया लेकिन वह भी शहीद के घर से करीब पचास मीटर पहले ही रोक दिया गया।

सूत्रों की माने तो खराब ईंट खत्म होने के कारण खड़ंजा निर्माण रोक दिया गया था क्योंकि अच्छी गुणवत्ता वाली ईंटों के दाम महंगे थे। पार्थिव शरीर के अंतिम संस्कार के दूसरे दिन रविवार को परिजनों में काफी आक्रोश रहा। शहीद के पिता राजकुमार यादव का कहना है कि ब्लॉक कर्मियों ने शहीद के दादा के घर को शहीद का घर बताकर वहीं तक खड़ंजा मार्ग बनवा दिया। जबकि शहीद का घर उसके दादा के घर से पचास मीटर की दूरी पर है। वहीं लोगों को सीएम योगी आदित्यनाथ के न आने का भी मलाल है। रविवार को पत्नी और भाई ने भी मुख्यमंत्री के न आने पर कहा कि चुनावी सभाओं में समय से जाने वाले सीएम को शहीद के घर आने की फुरसत नहीं मिली। अधिवक्ता ओंकारनाथ मिश्रा का कहना है कि मुख्यमंत्री को शहीद के घर आना चाहिए था।

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