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दुर्गा पूजा की परंपरा बचाने को हाईकोर्ट की शरण लेंगी पूजा समितियां
Sun, 30 Aug 2020 01:13 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 30 Aug 2020 01:13 AM IST
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दुर्गा पूजा
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना संक्रमण में सामूहिकता वाले आयोजनों पर रोक की वजह से नवरात्रि महोत्सव में दुर्गा पूजा की परंपरा को बचाने के लिए पूजा समितियां आगे आने लगी हैं। दुर्गा पूजा को लेकर सरकार की ओर से जारी गाइड पर एतराज जताते हुए बंगाली वेलफेयर एसोसिएशन व परशुराम ब्राह्मण सभा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने का निर्णय लिया है। सोमवार को इस मसले पर जनहित याचिका दाखिल की जाएगी।
पूजा समितियों ने आशंका जताई है कि जिस तरह प्रशासन ने गणेश चतुर्थी के सार्वजनिक अनुष्ठान पर संक्रमण की आड़ लेकर रोक लगाई थी, उसी तरह दुर्गा पूजा महोत्सव पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इस आशंका को लेकर पूजा समितियां कोर्ट जाने के लिए तैयारी कर चुकी हैं। इतना ही नहीं, ऐसी आशंकाओं की वजह से इस बार दुर्गा पूजा बारवारी की सालाना बैठकों की शुरुआत भी अब तक नहीं हो सकी है। इससे मां दुर्गा के उपासक और श्रद्धालुओं में निराशा व्याप्त हो गई है।
इलाहाबाद दुर्ग पूजा सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ पीके राय ने शनिवार की शाम अमर उजाला को बताया कि सरकार ने दुर्गा पूजा को लेकर जो गाइड लाइन जारी की है, उससे महोत्सव पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। उनका कहना है कि हिंदू त्योहारों में नवरात्र, रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी, सरस्वती पूजा, गणेश और लक्ष्मी पूजनोत्सव का आयोजन घरों पर किया जा सकता है, लेकिन शारदीय नवरात्रि में दुर्गा पूजा का आयोजन किसी भी दशा में घरों में नहीं किया जा सकता।
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उनका कहना है कि इस दुर्गा पूजा को बंगाली समाज में ‘बोधन’ के नाम से भी जाना जाता है और पूजा में चिनमई यानी मिट्टी की मूर्ति की स्थापना कर पूजा की जाती है। इसमें कलश स्थापना नहीं की जाती। ऐसे में परंपरा बचाने के लिए कोर्ट की शरण ली जाएगी। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद दुर्गा पूजा समिति के उपाध्यक्ष और हाईकोर्ट के अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव और अधिवक्ता सुनीता शर्मा के नेतृत्व में जनहित याचिका सोमवार को दाखिल की जाएगी।
उधर, परशुराम सभा के अध्यक्ष योगेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि इस संक्रमण काल में कामर्शियल गतिविधियों पर रोक नहीं है, लेकिन धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि बीएचयू व अन्य विश्वविद्यालयों के अलावा नीट और जेईई मेंस की परीक्षा का आयोजन कराने पर सरकारी राजी हो सकती है तो सैकड़ों साल पुरानी दुर्गा पूजा की परंपरा को कैसे तोड़ा जा सकता है। इस पर विचार किया जाना चाहिए।
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पूजा समितियों ने आशंका जताई है कि जिस तरह प्रशासन ने गणेश चतुर्थी के सार्वजनिक अनुष्ठान पर संक्रमण की आड़ लेकर रोक लगाई थी, उसी तरह दुर्गा पूजा महोत्सव पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इस आशंका को लेकर पूजा समितियां कोर्ट जाने के लिए तैयारी कर चुकी हैं। इतना ही नहीं, ऐसी आशंकाओं की वजह से इस बार दुर्गा पूजा बारवारी की सालाना बैठकों की शुरुआत भी अब तक नहीं हो सकी है। इससे मां दुर्गा के उपासक और श्रद्धालुओं में निराशा व्याप्त हो गई है।
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इलाहाबाद दुर्ग पूजा सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ पीके राय ने शनिवार की शाम अमर उजाला को बताया कि सरकार ने दुर्गा पूजा को लेकर जो गाइड लाइन जारी की है, उससे महोत्सव पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। उनका कहना है कि हिंदू त्योहारों में नवरात्र, रामनवमी, कृष्ण जन्माष्टमी, सरस्वती पूजा, गणेश और लक्ष्मी पूजनोत्सव का आयोजन घरों पर किया जा सकता है, लेकिन शारदीय नवरात्रि में दुर्गा पूजा का आयोजन किसी भी दशा में घरों में नहीं किया जा सकता।
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उनका कहना है कि इस दुर्गा पूजा को बंगाली समाज में ‘बोधन’ के नाम से भी जाना जाता है और पूजा में चिनमई यानी मिट्टी की मूर्ति की स्थापना कर पूजा की जाती है। इसमें कलश स्थापना नहीं की जाती। ऐसे में परंपरा बचाने के लिए कोर्ट की शरण ली जाएगी। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद दुर्गा पूजा समिति के उपाध्यक्ष और हाईकोर्ट के अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव और अधिवक्ता सुनीता शर्मा के नेतृत्व में जनहित याचिका सोमवार को दाखिल की जाएगी।
उधर, परशुराम सभा के अध्यक्ष योगेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि इस संक्रमण काल में कामर्शियल गतिविधियों पर रोक नहीं है, लेकिन धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि बीएचयू व अन्य विश्वविद्यालयों के अलावा नीट और जेईई मेंस की परीक्षा का आयोजन कराने पर सरकारी राजी हो सकती है तो सैकड़ों साल पुरानी दुर्गा पूजा की परंपरा को कैसे तोड़ा जा सकता है। इस पर विचार किया जाना चाहिए।