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झटका: प्राइवेट मंदिर के खिलाफ नहीं सुनी जा सकती जनहित याचिका, इलाहाबाद हाईकोर्ट का हस्तक्षेप करने से इनकार
Wed, 15 Sep 2021 01:32 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 15 Sep 2021 01:32 AM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर को लेकर दाखिल की गई याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि प्राइवेट मंदिर के खिलाफ जनहित याचिका नहीं सुनी जा सकती। याची का कहना था कि मंदिर प्रोजेक्ट के तहत तमाम छोटे मंदिरों को तोड़ा जा रहा है। इस पर रोक लगाई जाए।
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फाइल फोटो
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर विंध्याचल, मिर्जापुर के निर्माणाधीन गलियारे के दायरे में आने वाले छोटे मंदिरों के ध्वस्तीकरण पर रोक की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि इससे पहले भी दाखिल जनहित याचिका कोर्ट ने यह कहते हुए 30 मार्च 2007 को खारिज कर दी थी कि प्राइवेट मंदिर के खिलाफ जनहित याचिका पोषणीय नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने याचिका ग्राह्य न मानते हुए खारिज कर दी है।
यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति एके ओझा की खंडपीठ ने अरुण पाठक की जनहित याचिका पर दिया है। कोर्ट को अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पिछले आदेश व मंदिर प्रोजेक्ट की जानकारी दी।
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कहा कि जनहित याचिका पोषणीय नहीं है। इसपर कोर्ट ने याचिका सुनने से इंकार कर दिया। याची का कहना था कि मंदिर प्रोजेक्ट के तहत तमाम छोटे मंदिरों को तोड़ा जा रहा है। इस पर रोक लगाई जाए।
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कोर्ट ने कहा है कि इससे पहले भी दाखिल जनहित याचिका कोर्ट ने यह कहते हुए 30 मार्च 2007 को खारिज कर दी थी कि प्राइवेट मंदिर के खिलाफ जनहित याचिका पोषणीय नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने याचिका ग्राह्य न मानते हुए खारिज कर दी है।
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यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति एके ओझा की खंडपीठ ने अरुण पाठक की जनहित याचिका पर दिया है। कोर्ट को अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पिछले आदेश व मंदिर प्रोजेक्ट की जानकारी दी।
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कहा कि जनहित याचिका पोषणीय नहीं है। इसपर कोर्ट ने याचिका सुनने से इंकार कर दिया। याची का कहना था कि मंदिर प्रोजेक्ट के तहत तमाम छोटे मंदिरों को तोड़ा जा रहा है। इस पर रोक लगाई जाए।