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गो, गंगा और सनातन संस्कृति की रक्षा जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 26 Jan 2018 02:06 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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लक्ष्मीनारायण मंदिर पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी घनश्यामाचार्य के माघ मेला शिविर में हुए संत सम्मेलन में एक बार फिर संतों ने कहा, गो, गंगा और सनातन संस्कृति की रक्षा जरूरी है, इसके लिए मतभेदों को भुलाकर सभी को एकजुट होना होगा। स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती ने कहा, गो, गंगा और सनातन संस्कृति की रक्षा जरूरी है।
काशी सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा, वर्ण व्यवस्था ही सनातन धर्म का आधार है। देश के कई पथभ्रष्ट लोग इस पर आघात कर रहे हैं, जिसे सहन नहीं किया जाएगा। यदि वर्ण व्यवस्था कमजोर हुई तो सनातन धर्म पर आंच आएगी।सरकार किसी भी तरह के अंतरजातीय विवाह पर अविलंब प्रतिबंध लगाए। माता-पिता की अनुमति के बिना हुए विवाह का पंजीकरण नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा करने वाले पर दंड मिले। सम्मेलन में स्वामी राघवाचार्य,रसिक पीठाधीश्वर जन्मेजय शरण, जगद्गुरु कृष्णाचार्य,अखाड़ा परिषद् के महामन्त्री महंत हरि गिरि, अखिल भारतीय दंडी सन्यासी प्रबन्धन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी विमल देव आश्रम, कोषाध्यक्ष स्वामी शंकराश्रम, स्वामी बृजभूषण दास सहित बड़ी संख्या में संत महात्मा मौजूद थे।
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काशी सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती ने कहा, वर्ण व्यवस्था ही सनातन धर्म का आधार है। देश के कई पथभ्रष्ट लोग इस पर आघात कर रहे हैं, जिसे सहन नहीं किया जाएगा। यदि वर्ण व्यवस्था कमजोर हुई तो सनातन धर्म पर आंच आएगी।सरकार किसी भी तरह के अंतरजातीय विवाह पर अविलंब प्रतिबंध लगाए। माता-पिता की अनुमति के बिना हुए विवाह का पंजीकरण नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा करने वाले पर दंड मिले। सम्मेलन में स्वामी राघवाचार्य,रसिक पीठाधीश्वर जन्मेजय शरण, जगद्गुरु कृष्णाचार्य,अखाड़ा परिषद् के महामन्त्री महंत हरि गिरि, अखिल भारतीय दंडी सन्यासी प्रबन्धन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी विमल देव आश्रम, कोषाध्यक्ष स्वामी शंकराश्रम, स्वामी बृजभूषण दास सहित बड़ी संख्या में संत महात्मा मौजूद थे।
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