प्रयागराज में प्रियंका गांधी की मौन डुबकी ने दिया मुखर सियासी संदेश
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यूपी में कांग्रेस की सियासी बागडोर संभाल चुकीं प्रियंका गांधी ने मौनी अमावस्या पर गंगा में डुबकी लगाने के बाद नाव का चप्पू भी अपने हाथों में थाम लिया और गंगा की लहरों पर खेवनहार बन नाव को किनारे लगाया। अगले साल होने वाले यूपी के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का ‘चप्पू’ उनके हाथों में होगा और वह प्रदेश में पार्टी की ‘खेवनहार’ की भूमिका में होंगी। नर्म हिंदुत्व की राह में लगातार आगे बढ़ रही कांग्रेेस की इस धारणा को प्रियंका गांधी ने मौन डुबकी लगाकर और मजबूत बनाने की कोशिश की है। बृहस्पतिवार को गंगा में डुबकी लगाकर उन्होंने मुखर सियासी संदेश दिया।
प्रयागराज आने से पहले एक दिन पहले कि प्रियंका पश्चिमी यूपी के सहारनपुर में थीं। वहां देवी के दर्शन किए और अगले ही दिन उन्होंने पूर्वी यूपी का रुख किया। मौनी पर प्रियंका की मौन डुबकी को आगामी चुनाव से पहले एक मजबूत सियासी सफर की शुरुआत भी माना जा रहा है। फूलपुर संसदीय क्षेत्र पंडित जवाहर लाल नेहरू की कर्मस्थली रही है।
नेहरू के बाद उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित ने इस संसदीय सीट से परिवार के सियासी सफर को आगे बढ़ाया और अब प्रियंका अपने पुरखों की सियासी विरासत को संभालने के लिए आगे आईं हैं। समय के साथ सियासत के मुद्दे भी तेजी से बदले हैं, सो नर्म हिंदुत्व के मुद्दे को भुनाने की प्रियंका की यह कोशिश आगामी चुनावों में विपक्षियों के लिए नई चुनौती पेश कर सकती है।
यूपी में कांग्रेस की कमान संभालने के बाद प्रियंका गांधी पिछली बार 19 मार्च 2019 को प्रयागराज आईं थीं। दुमदुमा घाट से उन्होंने जल यात्रा शुरू की थी। इससे पहले उन्होंने बड़े हनुमान मंदिर में दर्शन किए थे और गंगा जल का आचमन किया था। हालांकि उनके आने से कुछ दिनों पहले ही कुंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं उनकी कैबिनेट के कई मंत्री गंगा में डुबकी लगा गए थे। उस वक्त भाजपा ने इसे मुद्दा भी बनाया था, लेकिन बृहस्पतिवार को दोबारा प्रयागराज आईं प्रियंका गांधी ने गंगा में डुबकी लगाकर आलोचना करने वालों की जुबान पर ताला लगाने की भी कोशिश की है।