{"_id":"5e10e5c68ebc3e87c9332cae","slug":"prf-rl-hangaloo-allahabad-news-ald2648215155","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रो. हांगलू के विवादित निर्णयों की लंबी फेहरिस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रो. हांगलू के विवादित निर्णयों की लंबी फेहरिस्त
विज्ञापन
prf. RL Hangaloo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रो. हांगलू के विवादित निर्णयों की लंबी फेहरिस्त
0 तीन सदस्यीय कमेटी के सामने जांच के लिए होंगे ढेरों मुद्दे
0 मनमाने तरीके से सृजित किए पद, करीबियों को किया नियुक्त
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। प्रो. रतन लाल हांगलू ने कुलपति रहते हुए अपने चार साल के कार्यकाल में तमाम ऐसे विवादित निर्णय लिए, जिनकी लंबी फेहरिस्त है। यूजीसी के चेयरमैन की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय कमेटी के सामने जांच के लिए ढेरों मुद्दे होंगे।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रो. हांगलू के कार्यकाल में वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमिक अनियमितताओं की जांच कराने का निर्णय लिया है। साथ ही इविवि में यौन शोषण के तमाम मामलों में कार्रवाई में हीलाहवाली किए जाने की भी जांच होनी है। यौन शोषण से जुड़े तमाम मामलों पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अंतरिम रिपोर्ट भी आ चुकी है और इसी रिपोर्ट के आधार पर जांच होनी है, लेकिन इससे इतर भी वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमी अनियमितताओं के ढेरों मामले हैं, जिनकी जांच के लिए प्रो. हांगलू पर शिकंजा और कस सकता है।
प्रो. हांगलू पर आरोप लगे थे कि उन्होंने 58 प्रकार के पद अपनी मर्जी से सृजित कर लिए और इन पर अपने करीबियों को नियुक्त कर दिया। इसमें ओएसडी का पद भी था और यह पद सबसे विवादित रहा। इसके अलावा पूर्व रजिस्ट्रार कर्नल हितेश लव की बर्खास्तगी के मामले में भी प्रो. हांगलू चौतरफा घिरे थे। प्रो. हांगलू की इसी मनमानी से त्रस्त आकर इविवि के पूर्व कुलपति प्रो. सीएल खेत्रपाल ने कार्य परिषद के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था।
विज्ञापन
इतना ही नहीं, इविवि में एक महिला प्रोफेसर की वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए उनसे जूनियर दो शिक्षकों को कार्य परिषद का सदस्य नियुक्त कर दिया गया था। प्रो. हांगलू के कार्यकाल में प्रवेश परीक्षा में भी व्यापक पैमाने पर धांधली के आरोप लगे। वहीं, भर्ती में धांधली के आरोपों पर मंत्रालय स्तर से कई बार पत्र जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया। मुकदमों पर भी इविवि प्रशासन ने जमकर खर्च किया। इविवि के वकीलों की अनदेखी करते हुए बाहरी अधिवक्ताओं को मोटी फीस का भुगतान किए जाने का आरोप भी प्रो. हांगलू पर लगा।
इसके अलावा इविवि में तैनात 50 से अधिक संविदाकर्मियों को हटाने का आदेश हुआ था। हांगलू के कार्यकाल में ही नियमों की अनदेखी करते हुए 22 संविदा कर्मियों को लाखों रुपये एरियर का भुगतान कर दिया गया। प्रो. हांगलू पर यह आरोप भी लगा था कि उन्होंने नियमों को दरकिनार करते हुए सरकारी खर्च से लग्जरी वाहन खरीद लिया। इस मामले को लेकर भी वह काफी दिनों तक विवादों में रहे और मंत्रालय तक इसकी शिकायत भेजी गई।
विज्ञापन
0 तीन सदस्यीय कमेटी के सामने जांच के लिए होंगे ढेरों मुद्दे
0 मनमाने तरीके से सृजित किए पद, करीबियों को किया नियुक्त
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। प्रो. रतन लाल हांगलू ने कुलपति रहते हुए अपने चार साल के कार्यकाल में तमाम ऐसे विवादित निर्णय लिए, जिनकी लंबी फेहरिस्त है। यूजीसी के चेयरमैन की अध्यक्षता में बनी तीन सदस्यीय कमेटी के सामने जांच के लिए ढेरों मुद्दे होंगे।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रो. हांगलू के कार्यकाल में वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमिक अनियमितताओं की जांच कराने का निर्णय लिया है। साथ ही इविवि में यौन शोषण के तमाम मामलों में कार्रवाई में हीलाहवाली किए जाने की भी जांच होनी है। यौन शोषण से जुड़े तमाम मामलों पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अंतरिम रिपोर्ट भी आ चुकी है और इसी रिपोर्ट के आधार पर जांच होनी है, लेकिन इससे इतर भी वित्तीय, प्रशासनिक एवं अकादमी अनियमितताओं के ढेरों मामले हैं, जिनकी जांच के लिए प्रो. हांगलू पर शिकंजा और कस सकता है।
विज्ञापन
प्रो. हांगलू पर आरोप लगे थे कि उन्होंने 58 प्रकार के पद अपनी मर्जी से सृजित कर लिए और इन पर अपने करीबियों को नियुक्त कर दिया। इसमें ओएसडी का पद भी था और यह पद सबसे विवादित रहा। इसके अलावा पूर्व रजिस्ट्रार कर्नल हितेश लव की बर्खास्तगी के मामले में भी प्रो. हांगलू चौतरफा घिरे थे। प्रो. हांगलू की इसी मनमानी से त्रस्त आकर इविवि के पूर्व कुलपति प्रो. सीएल खेत्रपाल ने कार्य परिषद के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था।
विज्ञापन
इतना ही नहीं, इविवि में एक महिला प्रोफेसर की वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए उनसे जूनियर दो शिक्षकों को कार्य परिषद का सदस्य नियुक्त कर दिया गया था। प्रो. हांगलू के कार्यकाल में प्रवेश परीक्षा में भी व्यापक पैमाने पर धांधली के आरोप लगे। वहीं, भर्ती में धांधली के आरोपों पर मंत्रालय स्तर से कई बार पत्र जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया। मुकदमों पर भी इविवि प्रशासन ने जमकर खर्च किया। इविवि के वकीलों की अनदेखी करते हुए बाहरी अधिवक्ताओं को मोटी फीस का भुगतान किए जाने का आरोप भी प्रो. हांगलू पर लगा।
इसके अलावा इविवि में तैनात 50 से अधिक संविदाकर्मियों को हटाने का आदेश हुआ था। हांगलू के कार्यकाल में ही नियमों की अनदेखी करते हुए 22 संविदा कर्मियों को लाखों रुपये एरियर का भुगतान कर दिया गया। प्रो. हांगलू पर यह आरोप भी लगा था कि उन्होंने नियमों को दरकिनार करते हुए सरकारी खर्च से लग्जरी वाहन खरीद लिया। इस मामले को लेकर भी वह काफी दिनों तक विवादों में रहे और मंत्रालय तक इसकी शिकायत भेजी गई।