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राष्ट्रपति ने इलाहाबाद को शिद्दत से किया याद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 16 Dec 2017 01:09 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने छात्रों को प्रेरित करते हुए संगमनगरी की विभूतियों एवं यहां की परंपराओं को शिद्दत से याद किया। उन्होंने कहा कि यह संयोग ही है कि इस बार संस्थान का 14वां दीक्षांत समारोह है और वह देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में इसमें शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कुंभ मेले को यूनेस्को की ओर से विश्व की सांस्कृतिक धरोहर में शामिल करने को बड़ी उपलब्धि बताया।
राष्ट्रपति ने आजादी के आंदोलन के दौरान प्रयाग की महान परंपरा, आनंद भवन और स्वराज भवन को याद करते हुए उनसे जुड़ी स्मृतियों को नमन किया। कहा कि अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के शहीद स्थल पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करके मैं अपने आपको गौरवान्वित मान रहा हूं। अमर शहीद आजाद का शहीद स्थल आजादी के दीवानों के लिए तीर्थ स्थल है। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद की पहचान शिक्षा की नगरी के रूप में रही है, आज संगम में भले ही सरस्वती अदृश्य हैं, परंतु शिक्षा के रूप में वह यहां विद्यमान हैं। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य की चर्चा भी की।
राष्ट्रपति ने कहा कि प्रयाग की धरती से महान साहित्यकार प्रेमचंद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी, सुमित्रानंदन पंत, फिराक गोरखपुररी, हरिवंश राय बच्चन जैसी विभूतियां जुड़ी रहीं हैं। उपाधि ग्रहण कर रहे हमारे छात्र-छात्राएं इन विभूतियों के संघर्षों से सीख लें। इस धरती से महान शिक्षाविद एवं वैज्ञानिक मेघनाथ साहा, के. बनर्जी, गोरख प्रसाद, हरिश्चंद्र, एनआर धर जैसे लोग जुडे़ रहे हैं। छात्रों से कहा कि गोल्ड मेडल पाने के बाद आपकी जिम्मेदारी बढ़ गई है। अब आप इनकी परंपराओं को आगे बढ़ाएं। राष्ट्रपपति ने कहा कि इसी धरती से जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, चंद्रशेखर, राम मनोहर लोहिया, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर जैसे राजनेता भी जुड़े रहे हैं। उनकी परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी पर है।
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राष्ट्रपति कोविंद ने पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. कलाम और मेट्रो मैन श्रीधरन से सीख लेने की बात कही। गरीब परिवार से निकलकर डॉ. कलाम ने देश के महान वैज्ञानिक के साथ सर्वोच्च पद पर पहुंचकर मिसाल कायम की। इसी प्रकार मेट्रो मैन श्रीधरन ने उस परियोजना को सार्थक किया, जिसके बारे में अंग्रेज भी हार मान गए थे। उन्होंने दिल्ली मेट्रो की सफलता के साथ पूरे देश को गौरवान्वित किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि तकनीकी शिक्षा में भी छात्रों को यदि राष्ट्रीय बोध और नैतिकता की शिक्षा दी जाए तो वह अपनी ऊर्जा का सही दिशा में प्रयोग कर सकेंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि वह राष्ट्रहित के लिए जुड़ें। कोई भी काम कठिन नहीं है, यदि आप तय कर लें कि सफलता हासिल करनी है तो कुछ भी मुश्किल नहीं है। उन्होंने छात्रों ने नमामि गंगे में आगे आने के साथ प्रदूषण आदि समस्याओं पर लोगों को जागरूक करने को कहा।
इलाहाबाद की धरती से जुडे रहे अभिनेता अमिताभ बच्चन के जीवन से प्रेरणा लेने की बात भी राष्ट्रपति ने छात्रों से कही। बताया कि कोलकाता की एक कंपनी में इंजीनियर की सफल नौकरी छोड़कर उन्होंने अभिनय की दुनिया को चुना। दिल्ली आकर वह आकाशवाणी में एनाउंसर की परीक्षा में फेल हो गए। मुंबई पहुंचकर लगातार सात फिल्मों में असफलता के बाद अमिताभ ने सफलता की ऐसी कहानी लिखी की उनका जीवन सभी को प्रेरणा देता है।
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राष्ट्रपति ने आजादी के आंदोलन के दौरान प्रयाग की महान परंपरा, आनंद भवन और स्वराज भवन को याद करते हुए उनसे जुड़ी स्मृतियों को नमन किया। कहा कि अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के शहीद स्थल पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करके मैं अपने आपको गौरवान्वित मान रहा हूं। अमर शहीद आजाद का शहीद स्थल आजादी के दीवानों के लिए तीर्थ स्थल है। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद की पहचान शिक्षा की नगरी के रूप में रही है, आज संगम में भले ही सरस्वती अदृश्य हैं, परंतु शिक्षा के रूप में वह यहां विद्यमान हैं। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य की चर्चा भी की।
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राष्ट्रपति ने कहा कि प्रयाग की धरती से महान साहित्यकार प्रेमचंद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी, सुमित्रानंदन पंत, फिराक गोरखपुररी, हरिवंश राय बच्चन जैसी विभूतियां जुड़ी रहीं हैं। उपाधि ग्रहण कर रहे हमारे छात्र-छात्राएं इन विभूतियों के संघर्षों से सीख लें। इस धरती से महान शिक्षाविद एवं वैज्ञानिक मेघनाथ साहा, के. बनर्जी, गोरख प्रसाद, हरिश्चंद्र, एनआर धर जैसे लोग जुडे़ रहे हैं। छात्रों से कहा कि गोल्ड मेडल पाने के बाद आपकी जिम्मेदारी बढ़ गई है। अब आप इनकी परंपराओं को आगे बढ़ाएं। राष्ट्रपपति ने कहा कि इसी धरती से जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, चंद्रशेखर, राम मनोहर लोहिया, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर जैसे राजनेता भी जुड़े रहे हैं। उनकी परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी पर है।
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राष्ट्रपति कोविंद ने पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. कलाम और मेट्रो मैन श्रीधरन से सीख लेने की बात कही। गरीब परिवार से निकलकर डॉ. कलाम ने देश के महान वैज्ञानिक के साथ सर्वोच्च पद पर पहुंचकर मिसाल कायम की। इसी प्रकार मेट्रो मैन श्रीधरन ने उस परियोजना को सार्थक किया, जिसके बारे में अंग्रेज भी हार मान गए थे। उन्होंने दिल्ली मेट्रो की सफलता के साथ पूरे देश को गौरवान्वित किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि तकनीकी शिक्षा में भी छात्रों को यदि राष्ट्रीय बोध और नैतिकता की शिक्षा दी जाए तो वह अपनी ऊर्जा का सही दिशा में प्रयोग कर सकेंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि वह राष्ट्रहित के लिए जुड़ें। कोई भी काम कठिन नहीं है, यदि आप तय कर लें कि सफलता हासिल करनी है तो कुछ भी मुश्किल नहीं है। उन्होंने छात्रों ने नमामि गंगे में आगे आने के साथ प्रदूषण आदि समस्याओं पर लोगों को जागरूक करने को कहा।
इलाहाबाद की धरती से जुडे रहे अभिनेता अमिताभ बच्चन के जीवन से प्रेरणा लेने की बात भी राष्ट्रपति ने छात्रों से कही। बताया कि कोलकाता की एक कंपनी में इंजीनियर की सफल नौकरी छोड़कर उन्होंने अभिनय की दुनिया को चुना। दिल्ली आकर वह आकाशवाणी में एनाउंसर की परीक्षा में फेल हो गए। मुंबई पहुंचकर लगातार सात फिल्मों में असफलता के बाद अमिताभ ने सफलता की ऐसी कहानी लिखी की उनका जीवन सभी को प्रेरणा देता है।