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पैसा न देने पर गर्भवती को सीएचसी में नहीं किया भर्ती, एम्बुलेंस में दिया नवजात को जन्म 

Sun, 08 Aug 2021 11:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 08 Aug 2021 11:01 PM IST
सार

  • जसरा सीएचसी का है मामला, स्टॉफ नर्स पर परिजनों ने लगाया पैसे मांगने का आरोप  

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Pregnant was not admitted to CHC for not paying money, gave birth to a newborn in an ambulance
prayagraj news : गर्भवती महिला को अस्पताल में नहीं भर्ती किया गया। - फोटो : prayagraj

विस्तार

रविवार को जसरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात स्वास्थ्य कर्मी का अमानवीय चेहरा सामने आया। पैसे की मांग पूरी न होने पर वहां तैनात स्टाफ नर्स द्वारा गर्भवती को भर्ती नहीं किया गया। प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला ने एंबुलेंस में ही नवजात को जन्म दे दिया। काफी मिन्नतें करने के बाद जब उसे अस्पताल में नहीं भर्ती किया गया तो परिजन उसे पास स्थित एक निजी अस्पताल ले गए। वहीं सीएचसी प्रभारी ने आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि हालत बिगड़ने पर एंबुलेंस में ही महिला का उपचार किया गया था।
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कौंधियारा थाना के लोटाढ़ जारी निवासी सुनील कुमार शुक्ला की पत्नी को रविवार शाम प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो वह एंबुलेंस से लेकर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसरा पहुंचे। आरोप है कि वहां पर तैनात स्टाफ नर्स द्वारा उसे भर्ती किए जाने के लिए पैसे की मांग की गई। मांग पूरी न होने पर वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मी महिला को भर्ती करने में हीलाहवाली करते रहे। इस बीच प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला ने एंबुलेंस में ही नवजात को जन्म दे दिया। नवजात के जन्म के बाद भी जच्चा बच्चा को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया।
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परिजन उन्हें भर्ती करने के लिए मिन्नतें करते रहे, लेकिन वहां मौजूद किसी भी स्वास्थ्य कर्मी का दिल नहीं पसीजा। थक हारकर परिजनों ने दोनों को पास स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। घर वालों ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी को फोन पर इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने भी मरीज की भर्ती किए जाने की बात कही तथा कहा कि आप अस्पताल लेकर जाइए उसे भर्ती किया जाएगा। परिवार ने उप जिला अधिकारी बारा को भी सोशल मीडिया द्वारा घटना से अवगत कराया। 
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क्या कहते हैं अधिकारी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. तरुण पाठक का कहना है कि अस्पताल पहुंचने पर महिला की हालत गंभीर थी। एंबुलेंस में ही बच्चे की नाल काटी गई तथा पूरा उपचार किया गया। लगातार हो रही ब्लीडिंग के चलते महिला की हालत खराब होती जा रही थी। इसलिए महिला को रेफर किया गया था। किंतु घरवाले ले ही नहीं गए। पैसे मांगने का आरोप पूरी तरह से निराधार व गलत है। उक्त घटना से उप जिलाधिकारी बारा को भी अवगत कराया गया है।
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