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एक्सक्लूसिवः डिफेंस कॉरीडोर में शामिल होगा प्रयागराज, कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने की पुष्टि

Tue, 03 Sep 2019 01:18 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: इलाहाबाद ब्यूरो Updated Tue, 03 Sep 2019 01:18 AM IST
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Exclusive: Prayagraj will join defense corridor
डिफेंस कॉरीडोर में शामिल होगा प्रयागराज

डिफेंस कॉरीडोर से अब प्रयागराज भी अब जुड़ने जा रहा है। यह सूबे का सातवां शहर होगा, जो केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना में शामिल होने जा रहा है। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और सूबे के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने इसकी पुष्टि की है।

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वर्तमान में यूपी के छह जिले अलीगढ़, आगरा, झांसी, चित्रकूट, कानपुर व लखनऊ ही इस कॉरीडोर में शामिल हैं। प्रयागराज को डिफेंस कॉरीडोर में शामिल किए जाने से यहां के लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
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दरअसल पिछले वर्ष लखनऊ में आयोजित इनवेस्टर्स समिट में ही प्रयागराज को डिफेंस कॉरीडोर में शामिल करने की चर्चा हुई थी। हालांकि इसमें कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ था। इस दौरान प्रदेश सरकार की कैबिनेट में भी यह मामला उठा। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता व सूबे के खादी मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह की माने तो प्रयागराज को डिफेंस कॉरीडोर में शामिल करने का रास्ता साफ हो गया है।
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उन्होंने बताया कि यहां यमुनापार में जमीन आदि देखी जा रही है। प्रयागराज के डिफेंस कॉरीडोर में शामिल होने से रक्षा क्षेत्र मेें निवेशक आकर्षित होंगे। इसके अलावा प्रयागराज में रोजगार के भी अवसर बढ़ेंगे। इस कॉरीडोर में रक्षा क्षेत्र के तमाम उपकरणों, हेलीकॉप्टर, टैंक, तोप आदि का निर्माण किया जा सकता है।

इसके साथ ही निवेश करने वाली इकाइयों को सरकार तमाम रियायतें भी देगी। वहीं दूसरी ओर डिफेंस कॉरीडोर के लिए चित्रकूट से प्रयागराज आने वाली सड़क का भी चौड़ीकरण होगा।

नैनी एयरो स्पेस की बढ़ जाएगी भूमिका

डिफेंस कॉरीडोर में नैनी स्थित हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की स्वाधिकृत सहायक संस्था नैनी एयरोस्पेस लिमिटेड (एनएएल) की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। क्योंकि पिछले वर्ष से ही यहां भारतीय सेना द्वारा प्रयोग किए जाने वाले ध्रुव हेलीकॉप्टर का ढांचा बनाने का काम शुरू हो जाएगा।

अभी यह ढांचा एचएएल सिर्फ बंगलूरू में ही बनाती है। इसके अलावा एचएएल ने विमानों में लगाने वाले लूम (तारों का गुच्छा) का निर्माण भी यहां शुरू कर दिया है। साथ ही नैनी एयरोस्पेस को एयरबस और बोइंग एयरक्राफ्ट के लूम बनाने का एएस 9100 डी सर्टिफिकेट भी पिछले वर्ष मिल गया है। डिफेंस कॉरीडोर में शामिल होने के बाद यहां कई अन्य रक्षा उपकरण बनाए जाने का भी रास्ता साफ हो जाएगा।

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