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Prayagraj: 12 फीट गहरे तालाब में डूबे दो सगे भाई, दोनों की मौत
Tue, 07 Jul 2020 10:24 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 07 Jul 2020 10:24 PM IST
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घूरपुर के पिपिरसा गांव में मंगलवार शाम एक दर्दनाक हादसे में 12 फुट गड्ढे में बने तालाब में डूब कर दो सगे भाइयों की मौत हो गई। घटना से गांव में कोहराम मच गया। ग्रामीणों ने करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला और डॉक्टर के पास ले गए, जहां दोनों को मृत घोषित कर दिया गया।
घूरपुर के पिपिरसा गांव निवासी अमरनाथ यादव खेती किसानी के साथ दूध का धंधा करते हैं। उनके तीन बेटों में विपिन (12) व निखिल (10) छोटे थे। बड़ा सचिन 15 साल का है। तीनों बच्चे बरामार स्थित स्कूल में पढ़ते थे। गांव के बाहर एक ईंट-भट्ठे के समीप अमरनाथ ने धान की नर्सरी डाल रखी है। मंगलवार को अमरनाथ, उनकी पत्नी आशा यादव, बड़ा बेटा सचिन व अन्य लोग धान की रोपाई कर रहे थे।
विपिन व निखिल को अमरनाथ ने धान की नर्सरी ताकने के लिए कहा था, क्योंकि नील गाय का उपद्रव बहुत होता है। पांच बजे के करीब विपिन, निखिल और उनके पड़ोस का नौ साल का बच्चा यश पुत्र दिनेश यादव वहीं धान की नर्सरी के समीप खेल रहे थे। पास में ही ईंट-भट्ठे के बगल में मिट्टी की खोदाई की वजह से हुए करीब एक बीघे के लंबे चौड़े और 12 फीट गड्ढे नुमा तालाब के पास पहुंच गए। वहीं खेल-खेल में निखिल का पैर फिसल गया और वह गड्ढे में गिर गया।
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उसे गिरा देख बड़ा भाई विपिन बचाने के लिए पानी में कूद गया। एक दूसरे को बचाने के चक्कर में जब वह दोनों डूबने लगे तो यश रोने लगा। जब दोनों पानी में डूब गए तो वह भागते हुए घर की तरफ गया। रास्ते में जो मिला सभी से उसने घटना बताई। कुछ ही देर में वहां ग्रामीणों की भीड़ लग गई। अमरनाथ व आशा भी परिवार संग वहां पहुंच गए।
गहराई अधिक होने की वजह से दोनों बच्चों को ढूूंढने में दिक्कत आ रही थी। जाल व कटिया डाली गई। करीब डेढ़ घंटे बाद दोनों को बाहर निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। सूचना पर घूरपुर पुलिस भी पहुंच गई। सीओ करछना आशुुतोष तिवारी ने बताया कि बच्चे खेल-खेल में गड्ढे में गिर कर डूब गए हैं। पुलिस मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर रही है।
बाकी दिनों में तो कम, लेकिन बारिश के दिनों में ये गड्ढे बच्चे ही नहीं बड़ों और खासकर पालतू जानवरों के लिए काल से कम नहीं हैं। इस तरह के मौत के गड्ढे इस इलाके में एक दो नहीं बल्कि दर्जनों हैं। पुलिस और प्रशासन की यही लापरवाही और ईंट भट्ठा मालिकों की गैर जिम्मेदाराना हरकत मंगलवार की शाम को दो मासूमों का काल बन गई।
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घूरपुर के पिपिरसा गांव निवासी अमरनाथ यादव खेती किसानी के साथ दूध का धंधा करते हैं। उनके तीन बेटों में विपिन (12) व निखिल (10) छोटे थे। बड़ा सचिन 15 साल का है। तीनों बच्चे बरामार स्थित स्कूल में पढ़ते थे। गांव के बाहर एक ईंट-भट्ठे के समीप अमरनाथ ने धान की नर्सरी डाल रखी है। मंगलवार को अमरनाथ, उनकी पत्नी आशा यादव, बड़ा बेटा सचिन व अन्य लोग धान की रोपाई कर रहे थे।
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विपिन व निखिल को अमरनाथ ने धान की नर्सरी ताकने के लिए कहा था, क्योंकि नील गाय का उपद्रव बहुत होता है। पांच बजे के करीब विपिन, निखिल और उनके पड़ोस का नौ साल का बच्चा यश पुत्र दिनेश यादव वहीं धान की नर्सरी के समीप खेल रहे थे। पास में ही ईंट-भट्ठे के बगल में मिट्टी की खोदाई की वजह से हुए करीब एक बीघे के लंबे चौड़े और 12 फीट गड्ढे नुमा तालाब के पास पहुंच गए। वहीं खेल-खेल में निखिल का पैर फिसल गया और वह गड्ढे में गिर गया।
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उसे गिरा देख बड़ा भाई विपिन बचाने के लिए पानी में कूद गया। एक दूसरे को बचाने के चक्कर में जब वह दोनों डूबने लगे तो यश रोने लगा। जब दोनों पानी में डूब गए तो वह भागते हुए घर की तरफ गया। रास्ते में जो मिला सभी से उसने घटना बताई। कुछ ही देर में वहां ग्रामीणों की भीड़ लग गई। अमरनाथ व आशा भी परिवार संग वहां पहुंच गए।
गहराई अधिक होने की वजह से दोनों बच्चों को ढूूंढने में दिक्कत आ रही थी। जाल व कटिया डाली गई। करीब डेढ़ घंटे बाद दोनों को बाहर निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। सूचना पर घूरपुर पुलिस भी पहुंच गई। सीओ करछना आशुुतोष तिवारी ने बताया कि बच्चे खेल-खेल में गड्ढे में गिर कर डूब गए हैं। पुलिस मौके पर पहुंचकर कार्रवाई कर रही है।
घूरपुर में बने हैं दर्जनों मौत के गड्ढे, पुलिस प्रशासन नहीं देता ध्यान
घूरपुर(संवाद)। ईंट उद्योग की मंडी कहे जाने वाले घूरपुर इलाके में इस तरह के मौत के गड्ढे कदम-कदम पर हैं। हैरानी की बात है कि मौत रूपी इन गड्ढों पर हादसे के बाद भले ही कुछ दिन के लिए पुलिस प्रशासन कुछ सक्रियता दिखा दे तो अलग बात है, नहीं इस तरफ कोई झांकने तक नहीं जाता। जिसका नतीजा ये है कि भट्ठा मालिक अपनी सुविधानुसार खेतों की मिट्टी 12-12 फीट तक निकलवा ले रहे हैं।बाकी दिनों में तो कम, लेकिन बारिश के दिनों में ये गड्ढे बच्चे ही नहीं बड़ों और खासकर पालतू जानवरों के लिए काल से कम नहीं हैं। इस तरह के मौत के गड्ढे इस इलाके में एक दो नहीं बल्कि दर्जनों हैं। पुलिस और प्रशासन की यही लापरवाही और ईंट भट्ठा मालिकों की गैर जिम्मेदाराना हरकत मंगलवार की शाम को दो मासूमों का काल बन गई।