prayagraj: दो दिन में आ सकते हैं आकाश के आतंकी
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कोरोना महामारी के बीच आकाश से टिड्डों का खतरा मंडराने लगा है। 50 लाख से एक करोड़ टिड्डे यहां दो से तीन दिनों में पहुंच सकते हैं। हवा ने साथ नहीं दिया तो हमला गंगापार या यमुनापार किसी भी तरफ से हो सकता है। इसे लेकर प्रशासन पहले ही एलर्ट जारी कर चुका है। बचाव के लिए फायर ब्रिगेड, टैंकर के साथ दवाएं भी मंगा ली गई हैं।
पाकिस्तान से निकला टिड्डों का झांसी तक पहुंच चुका है। सुबह हवा के रुख से उम्मीद जगी थी कि मध्य प्रदेश से होते हुए वापस हो जाएगा लेकिन दिन में फिर से इस तरफ दबाव बढ़ गया है। चूंकि टिड्डे हवा के साथ आगे बढ़ते हैं, ऐसे में हवा का रुख इधर की तरफ बना रहा तो दो से तीन दिनों में उनके यहां पहुंचने की आशंका है। इसे देखते हुए उन पर छिड़काव के लिए दवाएं मंगा ली गई हैं।
इसके अलावा आठ फायर ब्रिगेड और डेढ़ दर्जन टैंकर दवा के छिड़काव के लिए आरक्षित कर लिए गए हैं। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि हवा की दिशा प्रयागराज की तरफ रही तो दो से तीन दिनों में टिड्डों के यहां पहुंचने की आशंका है। यह हवा पर निर्भर करेगा कि चित्रकूट से यमुनापार होते हुए निकलते हैं या फिर फतेहपुर के रास्ते सोरांव से। उन्हाेंने बताया कि हर तरह की आशंका को देखते हुए तैयारी की गई है।
हरी फसल, पत्तियां कर जाते हैं चट
टिड्डों का दल रात में जमीन पर उतरता है और सुबह फिर आगे लिए निकलता है। टिड्डे एक दिन अपने वजन का तीन गुना हरी फसल को चट कर जाते हैं। ऐसे में ये इनका झुंड जिधर से गुजरता है वहां की सब्जियों, फल, चारा, अन्य फसलें को काफी नुकसान होता है। हालांकि टिड्डों से बचाव तथा उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने के लिए विशेषज्ञों की टीम लगातार उनके साथ चल रही है। इसके बावजूद यहां 50 लाख से एक करोड़ टिड्डों के दल के पहुंचने की आशंका है।
थाली-ढोल बजाने के साथ दवाओं का करें छिड़काव
टिड्डों से फसलों के बचाव के लिए ग्रामीणों को भी जागरूक किया जा रहा है। टिड्डे शाम होते ही खेतों में उतरने लगते हैं। ऐसे में उनका हमला होने पर ग्रामीणों को जगह-जगह एकत्रित होकर ढोल, थाली आदि बजाने की सलाह दी गई है। ढोल, थाली आदि की आवाज से टिड्डे खेतों में नहीं उतरेंगे। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि कई तरह की दवाओं के छिड़काव से भी फसलों को उनसे बचाया जा सकता है। किसानों को उन दवाओं के छिड़काव की सलाह दी जा रही है।