प्रयागराज : गंगा में बहे मजदूर का दूसरे दिन भी नहीं चला पता, मजदूरों ने माघ मेले का काम ठप कर किया प्रदर्शन
आक्रोशित मजदूर पीड़ित परिजनों को मुआवजा और अन्य सुविधाएं देने की मांग कर रहे थे। ठेकेदार और मेला प्रशासन की ओर से चार लाख रुपये और अन्य सुविधाएं देने की बात कही जा रही है।
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माघ मेला क्षेत्र में पीपा पुल तैयार कर रहा मजदूर मंगलवार को गंगा की तेज धारा में बह गया। दूसरे दिन बुधवार को भी उसका कुछ पता नहीं चला। गोताखोर और एनडीआरएफ की टीम ने पूरे दिन गंगा में सर्च अभियान चलाया लेकिन कुछ पता नहीं चला। इससे परिजनों में काफी आक्रोश रहा और उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया है।
इससे आक्रोशित साथियों ने माघ मेले का काम ठप करके काली सड़क पर प्रदर्शन किया। आक्रोशित मजदूर पीड़ित परिजनों को मुआवजा और अन्य सुविधाएं देने की मांग कर रहे थे। ठेकेदार और मेला प्रशासन की ओर से चार लाख रुपये और अन्य सुविधाएं देने की बात कही जा रही है। इस घटना के चलते माघ मेले की तैयारियां भी प्रभावित हो रही हैं। बताया जाता है कि काम में तेजी लाने के दबाव के चलते ही मजदूर के साथ यह हादसा हुआ है।
मंगलवार को गंगा में बह गया था मजदूर
माघ मेला क्षेत्र में निर्माण कार्य में जल्दबाजी एक मजदूर पर भारी पड़ी। मंगलवार को पीपा पुल निर्माण कार्य के दौरान झूंसी निवासी लल्लू निषाद (28) गंगा में डूब गया। चीखपुकार मची तो पुलिस के साथ ही एसडीआरएफ की टीम भी आ गई। घंटों खोजबीन चलती रही लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। मेला क्षेत्र में इन दिनों निर्माण कार्य जोरों पर है। इसी के तहत पीपा पुल का निर्माण भी चल रहा है।
दशाश्वमेध घाट के पास पीपा पुल निर्माण के कार्य में लल्लू निषाद भी लगा हुआ था। साथी मजदूरों ने बताया कि काम चल रहा था और पुल निर्माण के लिए बनाए गए अस्थायी रैंप पर लल्लू खड़ा था। इसी दौरान पांव फिसलने से वह नदी में जा गिरा और तेज बहाव की चपेट में आ गया। मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने शोर मचाया लेकिन देखते ही देखते वह आंखों से ओझल हो गया।
घटना की जानकारी दी गई तो दारागंज पुलिस के साथ ही जल पुलिस व एसडीआरएफ की टीम आ गई। इसके बाद शाम पांच तक तलाशी अभियान चलता रहा लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। इंस्पेक्टर दारागंज धर्मेंद्र दुबे का कहना है कि एसडीआरएफ व जल पुलिस की दो-दो व प्राइवेट गोताखोरों की एक टीम लगाकर मजदूर की तलाश की गई लेकिन कुछ पता नहीं चल सका। टीमें खोजबीन करते हुए संगम नोज तक गईं लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। बुधवार सुबह एक बार फिर से खोजबीन शुरू की जाएगी।
आरोप : बिना सुरक्षा उपकरण कराया जा रहा था काम
घटना की जानकारी मिलने पर मृतक की पत्नी कुंजन व अन्य परिजन भी आ गए। वह ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगा रहे थे। उधर, घटना से अन्य मजदूर भी आक्रोशित हो गए और उन्होंने निर्माण कार्य रोक दिया। उनकी मांग थी कि परिवार को आर्थिक मदद दी जाए और निर्माण कार्य में लगे मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। जानकारी पर मेला प्रशासन से जुड़े अफसर भी आ गए। बाद में किसी तरह आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया गया। लल्लू की दो बेटियां हैं और वह परिवार को अकेला कमाने वाला सदस्य था।
ज्यादातर काम अधूरे, अब जल्दी पूरा करने का दबाव
सूत्रों का कहना है कि मंगलवार को हुआ हादसा कहीं न कहीं मेला से जुड़े अफसरों की लापरवाही से हुआ। दरअसल मौजूदा समय मेंमेले से संबंधित ज्यादातर काम अधूरे हैं। पहले ध्यान नहीं दिया गया और अब काम समय से पूरा करने के दबाव में आपाधापी चल रही है। यही वजह है कि काम जल्दी पूरा करने के दबाव में सुरक्षा मानकों का भी ख्याल नहीं रखा जा रहा है।