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Prayagraj: विपिन रावत के दौरे के बाद ही मिली थी अक्षय वट खोलने की सौगात
Thu, 09 Dec 2021 12:24 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 09 Dec 2021 12:24 AM IST
सार
- कुंभ से पहले अगस्त 2018 में तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन के साथ किया था निरीक्षण
- मंदिर के जीर्णोद्धार, सुंदरीकरण समेत अन्य कार्यों का तैयार किया था रोडमैप
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अगस्त 2018 में तत्कालीन रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन के साथ प्रयागराज आए विपिन रावत। फाइल फोटो
- फोटो : prayagraj
विस्तार
सीडीएस विपिन रावत का प्रयागराज से सीधा संबंध तो नहीं रहा है लेकिन श्रद्धालुओं के लिए अक्षयवट खोले जाने की सौगात उन्होंने ही दी। अगस्त 2018 में उनके प्रयागराज आगमन के बाद ही इसकी भूमिका तैयार हो गई थी। इस दौरान उन्हाेंने मंदिर के जीर्णोद्धार तथा सुंदरीकरण का भी खाका तैयार कर दिया था।
कुंभ-2019 से पहले तत्कालीन रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन ने संगम तथा किले का निरीक्षण किया था। इस दौरान बतौर आर्मी चीफ विपिन रावत भी उनके साथ मौजूद रहे। अक्षयवट खोले जाने की मांग लगातार उठती रहती थी लेकिन सुरक्षा कारणों से आम श्रद्धालुओं को पातालपुरी दर्शन के लिए जाने की अनुमति नहीं थी। कुंभ से पहले इस मांग ने फिर जोर पकड़ा तो केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों ने अक्षयवट खोले जाने का आश्वासन दिया।
इसी क्रम में रक्षा मंत्री के साथ आए विपिन रावत ने कुंभ के दौरान सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेने के साथ अक्षयवट खोले जाने का रोडमैप तैयार किया। उन्होंने इस संबंध में पुजारियों तथा स्थानीय प्रशासन के साथ वार्ता की। इसके बाद मंदिर खोले जाने तथा अक्षयवट के जीर्णोद्धार की कवायद तेज हो गई।
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श्री मंदिर अक्षयवट पातालपुरी पुजारी संघ के प्रबंधक रविंद्रनाथ योगेश्वर का कहना है कि मंदिर में अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान करना उनका लक्ष्य था। इसी क्रम में पातालपुरी में ग्रेनाइट पत्थर लगाए गए। परिक्रमा मार्ग का चौड़ीकरण, पेयजल, लाइटिंग समेत अनेक कार्य कराए गए। र
विंद्रनाथ ने बताया कि विपिन रावत के दौरे के कुछ दिनों बाद उनकी पत्नी भी यहां आईं थीं। हालांकि, पत्नी के साथ वह नहीं आए थे। रविंद्रनाथ तथा अन्य पुजारियों ने पूर्व आर्मी चीफ विपिन रावत के प्रति आभार प्रकट किया तथा उनके तथा उनकी पत्नी के निधन पर शोक प्रकट किया।
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कुंभ-2019 से पहले तत्कालीन रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन ने संगम तथा किले का निरीक्षण किया था। इस दौरान बतौर आर्मी चीफ विपिन रावत भी उनके साथ मौजूद रहे। अक्षयवट खोले जाने की मांग लगातार उठती रहती थी लेकिन सुरक्षा कारणों से आम श्रद्धालुओं को पातालपुरी दर्शन के लिए जाने की अनुमति नहीं थी। कुंभ से पहले इस मांग ने फिर जोर पकड़ा तो केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों ने अक्षयवट खोले जाने का आश्वासन दिया।
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इसी क्रम में रक्षा मंत्री के साथ आए विपिन रावत ने कुंभ के दौरान सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेने के साथ अक्षयवट खोले जाने का रोडमैप तैयार किया। उन्होंने इस संबंध में पुजारियों तथा स्थानीय प्रशासन के साथ वार्ता की। इसके बाद मंदिर खोले जाने तथा अक्षयवट के जीर्णोद्धार की कवायद तेज हो गई।
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श्री मंदिर अक्षयवट पातालपुरी पुजारी संघ के प्रबंधक रविंद्रनाथ योगेश्वर का कहना है कि मंदिर में अधिक से अधिक सुविधाएं प्रदान करना उनका लक्ष्य था। इसी क्रम में पातालपुरी में ग्रेनाइट पत्थर लगाए गए। परिक्रमा मार्ग का चौड़ीकरण, पेयजल, लाइटिंग समेत अनेक कार्य कराए गए। र
विंद्रनाथ ने बताया कि विपिन रावत के दौरे के कुछ दिनों बाद उनकी पत्नी भी यहां आईं थीं। हालांकि, पत्नी के साथ वह नहीं आए थे। रविंद्रनाथ तथा अन्य पुजारियों ने पूर्व आर्मी चीफ विपिन रावत के प्रति आभार प्रकट किया तथा उनके तथा उनकी पत्नी के निधन पर शोक प्रकट किया।
- 0 22 अगस्त 2018 को रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन और सीडीएस बिपिन रावत ने किया था अक्षयवट का निरीक्षण
- 0 16 दिसंबर 2018 को अंदावा की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी अक्षयवट खोले जाने की घोषणा
- 0 10 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दर्शन के बाद अक्षयवट आम लोगों के लिए खोल दिया गया