प्रयागराज : हत्या के बाद प्रतापगढ़ भागा निलंबित सिपाही, तलाश में दबिश
घटना के बाद पुलिस को जानकारी मिली थी कि आरोपी करछना के नीबी का मूल निवासी है। जिसके बाद रात में ही पुलिस की एक टीम उसके घर पहुंची। लेकिन वह नहीं मिला। इसके बाद शुक्रवार को मेजा, कोरांव व सरायइनायत में रहने वाले उसके रिश्तेदारों के घर भी उसे तलाश करते हुए पहुंची।
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विधायक के बहनोई पर फायरिंग का आरोपी आबकारी विभाग का निलंबित सिपाही विमलेश पांडेय घटना के बाद से प्रतापगढ़ भाग निकला है। एसओजी की टीमें उसकी तलाश में प्रतापगढ़ व आसपास दबिश देती रहीं। उधर, रात में ही पुलिस की एक टीम उसके करछना स्थित पैतृक आवास पर पहुंची। उधर शुक्रवार को उसके कोरांव, मेजा व सरायइनायत में रहने वाले रिश्तेदारों के घर भी दबिश दी गई लेकिन वह नहीं मिला। फिलहाल उसके ससुराल पक्ष के एक करीबी रिश्तेदार को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ में जुटी है।
घटना के बाद पुलिस को जानकारी मिली थी कि आरोपी करछना के नीबी का मूल निवासी है। जिसके बाद रात में ही पुलिस की एक टीम उसके घर पहुंची। लेकिन वह नहीं मिला। इसके बाद शुक्रवार को मेजा, कोरांव व सरायइनायत में रहने वाले उसके रिश्तेदारों के घर भी उसे तलाश करते हुए पहुंची। लेकिन रिश्तेदार भी उसके बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके। सर्विलांस से उसके नंबर की लोकेशन प्रतापगढ़ में मिली जिसके बाद एसओजी गंगापार समेत अन्य टीमें वहां दबिश देती रहीं। इस दौरान न सिर्फ प्रतापगढ़ बल्कि उसके आसपास के इलाकों में भी दबिश दी गई लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। देर रात तक उसकी तलाश चलती रही।
निलंबित सिपाही समेत चार पर नामजद मुकदमा
कीडगंज फायरिंग मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी विमलेश पांडेय समेत चार के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया है। परिजनों की ओर से तहरीर देकर बताया गया है कि संदीप व विशाल उर्फ राजन दुकान पर थे, तभी सामने के मकान से विमलेश ने गालीगलौज शुरू कर दी। विरोध पर पिस्टल निकालकर गोलियां दाग दीं। आरोप है कि इस दौरान विमलेश का साथी सतीश पांडेय और उसके भतीजे संदीप व अवनीश भी मौजूद थे। एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह का कहना है कि हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया गा था जिसे हत्या में तरमीम कर लिया गया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।
अपराध से पुराना नाता, दिनदहाड़े हत्या में आया था चार भाइयों का नाम
अपनी दबंगई के लिए कुख्यात विमलेश पांडेय का अपराध से नाता नया नहीं है। यह बात अलग है कि उसका सीधे तौर पर नाम नहीं जुड़ा लेकिन उसके परिवार के लोगों का नाम कई बार आपराधिक वारदातों में आया। कुल नौ भाइयों में उसके चार भाई करछना थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं। जून 1995 में भीरपुर चौराहे पर व्यापारी रामबाबू पांडेय की हत्या में उसके चार भाई नामजद हुए थे। मृतक के बेटे अधिवक्ता सत्यम पांडेय ने बताया कि उक्त घटना में चारों आरोपियों को उम्रकैद की सजा हो चुकी है। जिसे उनकी ओर से ऊपरी अदालत में चुनौती दी गई है। वर्तमान में सभी आरोपी जमानत पर हैं।