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प्रयागराज : ओबीसी आरक्षण की अनदेखी पर भड़के छात्र, जीबी पंत संस्थान में शिक्षक भर्ती में धांधली का आरोप
Sat, 11 Dec 2021 10:13 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 11 Dec 2021 10:13 PM IST
सार
संस्थान के निदेशक प्रो. बद्री नारायण का कहना है कि जीबी पंत संस्थान एक शोध संस्थान है। विज्ञापन की शर्तों में शामिल था कि इंटरव्यू में न्यूनतम अर्हता के साथ उच्च शोध गुणवत्ता एवं अन्य योग्यताएं भी देखी जाएंगी। योग्य अभ्यर्थी न मिलने के कारण सीटें खाली रह गईं।
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Prayagraj News : शिक्षक भर्ती में आरक्षण की अनदेखी का आरोप लगाकर पुतला फूंकते अभ्यर्थी।
- फोटो : प्रयागराज
विस्तार
जीबी पंत संस्थान में हुई शिक्षक भर्ती के दौरान ओबीसी की सीटें रिक्त रह जाने से छात्र भड़के हुए हैं। उनका आरोप है कि संस्थान में ओबीसीस आरक्षण की अनदेखी की गई, ताकि वंचित और पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों को उच्च शिक्षण संस्थानों में आने से रोका जा सके। इसके विरोध में छात्रों ने शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन पर जीबी पंत संस्थान के निदेशक का पुतला फूंका।
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छात्रों का आरोप है कि यह आरक्षण को जानबूझकर कमजोर करने की कोशिश है। समस्त ओबीसी की सीटों और प्रोफेसर की सभी सीटों पर चयन के लिए इंटरव्यू देने वाले अभ्यर्थियों को नॉट फाउंड सुटेबल घोषित कर दिया गया। सवाल उठ रहे हैं कि अगर अभ्यर्थी योग्यता नहीं रखते थे तो उन्हें इंटरव्यू में शामिल क्यों किया या? एक सीट के मुकाबले आठ अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था, जो शिक्षक भर्ती के नियमों की अवहेलना है और हास्यास्पद भी है।
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नतीजा कि असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर की अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर किसी अभ्यर्थी का चयन नहीं हुआ। संस्थान यह बताने में भी विफल रहा कि आखिर ऐसे क्या मानदंड थे जो कि साक्षात्कार में आया एक भी अभ्यर्थी पूरा नहीं कर पाया। छात्रों ने संस्थान पर भ्रष्टाचार और सामाजिक न्याय के खिलाफ जाकर काम करने का आरोप लगाया है। संयुक्त संघर्ष समिति, समाजवादी छात्रसभा, स्टूडेंट्स फोडरेशन ऑफ इंडिया, आइसा के संयुक्त तत्वावधान में छात्रों ने निदेशक का पुतला भी फूंका।
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उधर, संस्थान के निदेशक प्रो. बद्री नारायण का कहना है कि जीबी पंत संस्थान एक शोध संस्थान है। विज्ञापन की शर्तों में शामिल था कि इंटरव्यू में न्यूनतम अर्हता के साथ उच्च शोध गुणवत्ता एवं अन्य योग्यताएं भी देखी जाएंगी। योग्य अभ्यर्थी न मिलने के कारण सीटें खाली रह गईं, जिसमें ओबीसी के साथ अनारक्षित, एससी और एसटी की सीटें भी शामिल हैं। कुछ लोग इसे गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं। ओबीसी, एससी और एसटी की रिक्त रह गई सीटों को भरने के लिए पुनर्विज्ञापन भी जारी किया गया है। साथ ही यूजीसी के निर्देश के अनुसार और इलाहाबाद विश्वविद्यालय का हिस्सा होने के नाते तय नियम के अनुरूप इंटरव्यू में अभ्यर्थियों को बुलाया गया था।