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प्रयागराज SSP का तबादला : अटाला बवाल न रोक पाना पड़ा महंगा, सीएम ने जताई थी नाराजगी

Sun, 03 Jul 2022 05:55 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 03 Jul 2022 05:55 AM IST
सार

जिले में आईपीएस अजय कुमार का कार्यकाल महज 177 दिनों का रहा। चार जनवरी को तैनाती के 21 दिनों बाद ही उनका नाम तब सुर्खियों में आया जब शहर में रेलवे भर्ती परीक्षा के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों को हॉस्टल में घुसकर पुलिस ने पीटा।

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Prayagraj SSP transferred: Atala ruckus fell for not being able to stop, CM expressed displeasure
एसएसपी अजय कुमार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एसएसपी अजय कुमार को जुमे पर भड़की हिंसा भारी पड़ गई। तमाम इनपुट और यहां तक कि लोक ल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के बावजूद वह अटाला में बवाल रोक पाने में नाकाम रहे। इस मामले में उनकी जमकर किरकिरी हुई। यहां तक कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी जमकर नाराजगी जताई थी। इसके बाद से ही उन्हें लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया था।

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जिले में आईपीएस अजय कुमार का कार्यकाल महज 177 दिनों का रहा। चार जनवरी को तैनाती के 21 दिनों बाद ही उनका नाम तब सुर्खियों में आया जब शहर में रेलवे भर्ती परीक्षा के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों को हॉस्टल में घुसकर पुलिस ने पीटा। दो दिन बाद ही एक और सनसनीखेज वारदात सामने आई जब सलोरी में दुष्कर्म के बाद छात्रा की बेरहमी से हत्या कर लाश कुएं में फेंक दी गई।

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इसके बाद 22 अप्रैल को थरवई में सामूहिक हत्याकांड हुआ जिसमें खेवराजपुर गांव में एक ही परिवार केपांच लोगों की नृशंस हत्या कर दी गई। इस तरह से उनकेकार्यकाल में तमाम उतार-चढ़ाव आते रहे। लेकिन 10 जून को अटाला में जुमे के दिन हुए बवाल ने उनकी जमकर किरकिरी कराई।


लखनऊ तक इस बात की शिकायत पहुंची कि  शासन की ओर से अलर्ट जारी होने और लोकल इंटेलिजेंस के इनपुट के बावजूद वह अटाला में बवाल रोकने में नाकाम रहे। जिसे लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई थी। गौरतलब है कि तीन जून को कानपुर बवाल के बाद ही शासन की ओर से सभी जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया था। 

प्रयागराज की घटना पर बेहद गंभीर था शासन
सूत्रों का कहना है कि प्रयागराज में बवाल की घटना को शासन ने बेहद गंभीरता से लिया। दरअसल यह कई साल बाद हुआ था, जब प्रयागराज में माहौल सांप्रदायिक हुआ। जानकारों का कहना है कि गंगा-जमुनी तहजीब वाले इस शहर में छिटपुट घटनाओं को छोड़कर कभी भी सांप्रदायिक तनाव की ऐसी घटना नहीं हुई थी। मिश्रित आबादी वाले पुराने शहर के इलाकों में भी कभी सांप्रदायिक तनाव जैसी कोई बात नहीं हुई। यहां तक कि सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शन के दौरान भी माहौल शांतिपूर्ण ही रहा। इसे लेकर भी एसएसपी सवालों के घेरे में रहे।

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कई अन्य वजहों को लेकर भी चर्चा में रहे
अटाला बवाल के अलावा एसएसपी कई अन्य मामलों को लेकर भी चर्चा में रहे। विधानसभा चुनाव के दिन ही मतदान केंद्र के गेट पर बम मारकर युवक की हत्या की घटना को भी सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक माना गया। भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के मामलों में पुलिसकर्मियों पर उन्होंने ताबड़तोड़ कार्रवाई की। लेकिन कार्रवाई के बाद दागियों की झटपट बहाली और तैनाती को लेकर भी उन पर सवाल उठे। कर्नलगंज में पुलिस चौकी में निर्दोष छात्र की पिटाई और कोतवाली में कुख्यात अपराधियों के शरणदाताओं को थाने से छोड़ने के आरोपी पुलिसकर्मियों की बहाली और तैनाती जैसे मामले इन्हीं में शामिल रहे। 

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