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प्रयागराजःएलटी ग्रेड में चयनित अभ्यर्थी को विद्यालय आवंटन का आदेश
Thu, 16 Jul 2020 12:23 AM IST
विनोद सिंह
news desk प्रयागराज अमर उजाला
news desk प्रयागराज अमर उजाला
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 16 Jul 2020 12:23 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती में चयनित अध्यापक को विद्यालय आवंटित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड और राज्य सरकार से कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो इसका कारण स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल किया जाए। चयनित अभ्यर्थी मनोज कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने दिया है।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक याची एससी कोटे का अभ्यर्थी है। उसने 1017 की अध्यापक भर्ती में हिंदी विषय से आवेदन किया था। वह चयनित हो गया। चयन बोर्ड ने उसे बुलंदशहर में प्रेम इंटर कालेज में नियुक्ति दी और वहां के जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देश दिया कि याची को ज्चाइन कराया जाए।
मगर, कालेज प्रबंधन यह कहते हुए नियुक्ति देने से मना कर दिया कि उनके यहां एससी कोटे का कोई पद खाली नहीं है। इसके बाद याची को श्रावस्ती के एक इंटर कालेज में नियुक्ति दी गई। वहां भी पद रिक्त न होने की बात कह कर नियुक्ति देने से इंकार कर दिया गया।
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याची ने इसकी जानकारी चयन बोर्ड और डीआईओएस को दी। मगर, उन्होंने कुछ नहीं किया तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। कहा गया कि सुप्रीमकोर्ट का निर्देश है कि चयनित अभ्यर्थी को नियुक्ति पाने का पूरा अधिकार है। ऐसे में उसे चयन देने से मना नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने चयन बोर्ड को निर्देश दिया है कि याची को प्रदेश के किसी भी इंटरमीडिएट कालेज में नियुक्ति दी जाए और यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो इसका कारण बताया जाए। याचिका पर अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
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याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह के मुताबिक याची एससी कोटे का अभ्यर्थी है। उसने 1017 की अध्यापक भर्ती में हिंदी विषय से आवेदन किया था। वह चयनित हो गया। चयन बोर्ड ने उसे बुलंदशहर में प्रेम इंटर कालेज में नियुक्ति दी और वहां के जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देश दिया कि याची को ज्चाइन कराया जाए।
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मगर, कालेज प्रबंधन यह कहते हुए नियुक्ति देने से मना कर दिया कि उनके यहां एससी कोटे का कोई पद खाली नहीं है। इसके बाद याची को श्रावस्ती के एक इंटर कालेज में नियुक्ति दी गई। वहां भी पद रिक्त न होने की बात कह कर नियुक्ति देने से इंकार कर दिया गया।
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याची ने इसकी जानकारी चयन बोर्ड और डीआईओएस को दी। मगर, उन्होंने कुछ नहीं किया तो हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। कहा गया कि सुप्रीमकोर्ट का निर्देश है कि चयनित अभ्यर्थी को नियुक्ति पाने का पूरा अधिकार है। ऐसे में उसे चयन देने से मना नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने चयन बोर्ड को निर्देश दिया है कि याची को प्रदेश के किसी भी इंटरमीडिएट कालेज में नियुक्ति दी जाए और यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो इसका कारण बताया जाए। याचिका पर अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।