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प्रयागराजः रामायण सर्किट में प्रभु श्रीराम विचरण पथ का होगा निर्माण
Mon, 11 Nov 2019 12:09 AM IST
विनोद सिंह
अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज
अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 11 Nov 2019 12:09 AM IST
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lord ram
- फोटो : lord ram
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रामायण सर्किट में शामिल प्रयागराज से शृंगवेरपुरधाम धाम तक को आध्यात्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की योजना पर काम आरंभ हो गया है। इसके तहत शृंगवेरपुर धाम में निषादराज पार्क व भगवान श्रीराम विचरण पथ का निर्माण होगा। इसके साथ ही यहां लगने वाले मेले व लोकोत्सवों को भी संरक्षित करने की योजना है। इस परियोजना पर 25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत शृंगवेरपुर धाम के विकास के लिए चार परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इसमें 10 एकड़ क्षेत्रफल में निषादराज पार्क का निर्माण, निषादराज से मिलते हुए भगवान श्री राम की प्रतिमा की स्थापना। वहां तक जाने के लिए चार सौ मीटर आरसीसी सड़क का निर्माण के अलावा भगवान श्रीराम विचरण पथ का भी निर्माण कराया जाएगा। यहां पर विद्युत शवदाह गृह भी स्थापित किया जाएगा। पर्यटन विभाग ने इस परियोजना के तहत शासन को भेजी गई रिपोर्ट में शृंगवेरपुर धाम के आध्यात्मिक महत्व का भी विस्तार से उल्लेख किया है।
पर्यटन विभाग की अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार शृंगवेरपुर धाम वह भूमि है, जहां पर मां गंगा केतट पर माता शांता व शृंगी ऋषि की तपोभूमि व आश्रम स्थित है। इस स्थल को और भव्यता प्रदान करने की जरूरत पर बल दिया गया है। कहा गया है कि त्रेता युग में पुत्र रत्न प्राप्ति की इच्छा से महाराजा दशरथ की ओर से कराए गए यज्ञ में आमंत्रण पर शृंगी ऋषि वहां पहुंचे थे और उन्होंने यज्ञ कराया था।
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इस यज्ञ केबाद ही दशरथ को भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न नामक चार पुत्रों की प्राप्ति हुई थी। पर्यटन विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने वन गमन के दौरान शृंगवेरपुर धाम में ही सीता व लक्ष्मण के साथ रात को प्रवास किया था और दूसरे दिन नाव से गंगा पार हुए थे। इतना ही नहीं निषादराज का आतिथ्य स्वीकार करते हुए उन्हें गले से लगाकर छुआछूत का भेद मिटाते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया था। शृंगवेरपुर में मुखवती गंगा हैं। वहां गंगा और सीता संवाद के भी प्रमाण मिले हैं।
-शृंगवेरपुर के मेले और लोकोत्सव
-राष्ट्रीय रामायण मेला, कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक उत्सव
-आषाढ़ सप्तमी पर तीन दिवसीय मेला
-प्रत्येक पूर्णिमा व अमावस्या का मेला
-हर शुक्रवार, सोमवार का मेला
-नवरात्रि का मेला
रामायण सर्किट के तहत शृंगवेरपुर को भव्यता प्रदान करने और पर्यटन की दृष्टि से उभारने का काम शुरू हो गया है। इसके तहत आरती स्थल व अन्य निर्माण कराए गए हैं। भगवान श्रीराम विचरण पथ का निर्माण पूरी भव्यता और दिव्यता के साथ कराया जाएगा। दिनेश कुमार, उप निदेशक, पर्यटन।
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मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना के तहत शृंगवेरपुर धाम के विकास के लिए चार परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। इसमें 10 एकड़ क्षेत्रफल में निषादराज पार्क का निर्माण, निषादराज से मिलते हुए भगवान श्री राम की प्रतिमा की स्थापना। वहां तक जाने के लिए चार सौ मीटर आरसीसी सड़क का निर्माण के अलावा भगवान श्रीराम विचरण पथ का भी निर्माण कराया जाएगा। यहां पर विद्युत शवदाह गृह भी स्थापित किया जाएगा। पर्यटन विभाग ने इस परियोजना के तहत शासन को भेजी गई रिपोर्ट में शृंगवेरपुर धाम के आध्यात्मिक महत्व का भी विस्तार से उल्लेख किया है।
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पर्यटन विभाग की अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार शृंगवेरपुर धाम वह भूमि है, जहां पर मां गंगा केतट पर माता शांता व शृंगी ऋषि की तपोभूमि व आश्रम स्थित है। इस स्थल को और भव्यता प्रदान करने की जरूरत पर बल दिया गया है। कहा गया है कि त्रेता युग में पुत्र रत्न प्राप्ति की इच्छा से महाराजा दशरथ की ओर से कराए गए यज्ञ में आमंत्रण पर शृंगी ऋषि वहां पहुंचे थे और उन्होंने यज्ञ कराया था।
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इस यज्ञ केबाद ही दशरथ को भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न नामक चार पुत्रों की प्राप्ति हुई थी। पर्यटन विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने वन गमन के दौरान शृंगवेरपुर धाम में ही सीता व लक्ष्मण के साथ रात को प्रवास किया था और दूसरे दिन नाव से गंगा पार हुए थे। इतना ही नहीं निषादराज का आतिथ्य स्वीकार करते हुए उन्हें गले से लगाकर छुआछूत का भेद मिटाते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया था। शृंगवेरपुर में मुखवती गंगा हैं। वहां गंगा और सीता संवाद के भी प्रमाण मिले हैं।
-शृंगवेरपुर के मेले और लोकोत्सव
-राष्ट्रीय रामायण मेला, कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक उत्सव
-आषाढ़ सप्तमी पर तीन दिवसीय मेला
-प्रत्येक पूर्णिमा व अमावस्या का मेला
-हर शुक्रवार, सोमवार का मेला
-नवरात्रि का मेला
रामायण सर्किट के तहत शृंगवेरपुर को भव्यता प्रदान करने और पर्यटन की दृष्टि से उभारने का काम शुरू हो गया है। इसके तहत आरती स्थल व अन्य निर्माण कराए गए हैं। भगवान श्रीराम विचरण पथ का निर्माण पूरी भव्यता और दिव्यता के साथ कराया जाएगा। दिनेश कुमार, उप निदेशक, पर्यटन।