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Prayagraj Police : माफिया पर मेहरबानी, गैंगस्टर के मुल्जिमों पर कार्रवाई लंबित, नहीं कुर्क की जा सकी संपत्ति

Sun, 20 Oct 2024 01:18 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 20 Oct 2024 01:18 PM IST
सार

पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने के प्रमुख उद्देश्यों में संगठित अपराध पर लगाम लगाना भी था। हालांकि, पिछले दो साल के रिकॉर्ड को देखें तो जनपद में गिरोह बनाकर अपराध करने वालों पर कार्रवाई शिथिल हो गई है।

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Prayagraj Police: Kindness to mafia, action pending against gangster accused, property could not be attached
प्रयागराज पुलिस। सांकेतिक चित्र - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

जनपदीय पुलिस गैंगस्टर के आरोपियों पर कार्रवाई करने में लगातार पिछड़ रही है। पिछले ढाई साल में पूरे जनपद में जहां गैंगस्टर के महज छह मामले दर्ज हो पाए। वहीं, कुख्यात अपराधियों पर दर्ज गैंगस्टर के मुकदमों में उनकी संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी सालों से लंबित है। इनमें अंतरराज्यीय गैंग के सरगना के साथ ही कुख्यात गो तस्कर गिरोह के सदस्य तक शामिल हैं।

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पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने के प्रमुख उद्देश्यों में संगठित अपराध पर लगाम लगाना भी था। हालांकि, पिछले दो साल के रिकॉर्ड को देखें तो जनपद में गिरोह बनाकर अपराध करने वालों पर कार्रवाई शिथिल हो गई है। हाल यह है कि जहां कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद ढाई साल में गैंगस्टर के महज छह मुकदमे दर्ज हुए। वहीं, इससे पूर्व के दो साल में 150 से ज्यादा गिरोह पर शिकंजा कसा गया था।
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पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक प्रयागराज में 50 से ज्यादा रजिस्टर्ड गैंग हैं। इनके सदस्यों पर दर्जनों आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। गिरोह के सदस्य धन अर्जित करने के लिए संगठित होकर आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते हैं। कमिश्नरेट लागू होने के बाद यह माना गया कि संगठित अपराध पर अब और प्रभावी ढंग से कार्रवाई हो सकेगी।

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हालांकि, आंकड़े इसके उलट हैं। दिसंबर 2022 से अब तक पूरे जनपद में गैंगस्टर के महज छह मामले दर्ज हो सके हैं। यह मामले खुल्दाबाद, सिविल लाइंस, करेली, नैनी, खीरी, थरवई में लिखे गए। बड़ी बात यह है कि यमुनानगर व गंगानगर जोन में महज एक-एक गिरोह पर कार्रवाई हुई। जबकि, कमिश्नरेट लागू होने से पहले गैंग बनाकर अपराध करने वालों पर कार्रवाई के आंकड़े कहीं ज्यादा हैं। एक दिसंबर 2020 से एक दिसंबर 2022 तक कुल 168 गैंगस्टर के मुकदमे दर्ज किए गए। इनमें से सबसे ज्यादा खुल्दाबाद व झूंसी में 10-10 जबकि, धूमनगंज में नौ मुकदमे दर्ज हुए थे।

कौन-कौन से प्रमुख मामलों में कार्रवाई लंबित

गैंगस्टर के नए मामले दर्ज करने में तो कोताही बरती ही जा रही है, पूर्व में दर्ज मुकदमों में भी आरोपियों की अपराध से अर्जित संपत्ति कुर्क करने में भी लापरवाही की जा रही है। इनमें माफिया के करीबी से लेकर गोतस्कर तक शामिल हैं।

नैनी में माफिया पप्पू गंजिया के खिलाफ 2023 में दर्ज मामले में यह कार्रवाई अब तक लंबित है।
2022 में सिविल लाइंस में अंतरराज्यीय चोर गिरोह के सरगना पंकज सिंह उर्फ भूपेंद्र सिंह समेत अन्य की भी संपत्तियां अब तक नहीं खोजी जा सकी हैं।
पूरामुफ्ती में गोतस्कर गिरोह के सदस्य दो हिस्ट्रीशीटर भाइयों जैद-उबैद का भी नाम इन्हीं में शुमार है, जिन पर तीन साल पहले गैंगस्टर लग चुका है।
नैनी में कुख्यात गोतस्कर पर दो साल पहले गैंगस्टर का केस लिखा गया, जिसमें 14(1) की कार्रवाई लंबित है।

क्या है गैंगस्टर एक्ट

गैंगस्टर एक्ट को संगठित अपराध पर कार्रवाई के लिए सबसे मुफीद कानून माना जाता है। इसमें आर्थिक लाभ के लिए एक साथ मिलकर आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वालों का गैंगचार्ट तैयार होता है, जिसे पुलिस अपने रिकाॅर्ड में रजिस्टर्ड कर नाम दिया जाता है। गैंग के सदस्यों के आपराधिक इतिहास के आधार पर उसे डी, आईडी, आईआर, व आईएस गिरोह का नाम दिया जाता है। इस एक्ट की धारा 14(1) के तहत जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति से गैंग के सदस्यों की ओर से अपराध से अर्जित संपत्ति की जब्तीकरण की कार्रवाई भी की जाती है।

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