Prayagraj : चयन बोर्ड की फर्जी वेबसाइट बना करोड़ों की ठगी का प्रयास करने वाले आरोपी को पुलिस ने दबोचा
- साइबर क्राइम सेल पुलिस ने मास्टरमाइंड को साथी के साथ घेरेबंदी कर दबोचा, पॉलीटेक्निक की डिग्री लेने के बाद मास्टरमाइंड ने बीटेक में लिया था दाखिला, बीच में पढ़ाई छोड़ करने लगा ठगी ।
विस्तार
करोड़ों की ठगी के मंसूबे से उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के नाम से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट बनाने वाले मास्टरमाइंड को साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने साथी के दबोच लिया।गिरफ्तार शातिर इससे पहले भी चाइल्ड रिसर्च डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाकर 55 लाख रुपये की ठगी कर चुके थे। इस बात की कहीं शिकायत न होने से उसका हौसला बढ़ गया और चयन बोर्ड के नाम से फर्जी वेबसाइट बना ली।
कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के नाम से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट बनाकर शातिरों ने विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन मांगे थे। बकायादा इसका विज्ञापन भी जारी किया था। इसकी जानकारी होने पर चयन बोर्ड की ओर से कर्नलगंज थाने में अज्ञात शातिरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
इस मामलें की जांच साइबर क्राइम थाने को दी गई थी। इंस्पेक्टर राजीव तिवारी, एसआई राघवेंद्र पांडेय, अनुज तिवारी, सिपाही सत्येश राय, आशीष यादव आदि के नेतृत्व में टीम मामले की जांच में जुटी। पुलिस ने सर्विलांस और अन्य माध्यमों से शातिरों तक पहुंच गई। पुलिस ने एटा जिले में कोतवाली देहात के नगला केवल गांव निवासी सचिन कुमार उर्फ ललित उर्फ कालू को उठाकर पूछताछ शुरू की। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने साहिल श्रीवास्तव निवासी छतौना लम्हुआ थाना चांदा सुल्तानपुर को उठाया। पूछताछ में सचिन ने बताया कि वह पहले भी ऐसी वारदात करता रहा है।
तीसरे प्रयास में फंसा पुलिस के चंगुल में
पहले एजुकेशन रिसर्च डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाकर विज्ञापन निकाला। इससे उसने पांच लाख रुपये कमाए। फिर सीआरडीओ के नाम फर्जी वेबसाइट बनाकर विज्ञापन निकाला और लगभग 55 लाख रुपये कमाए। इस फर्जी वाड़ा की कि सी को भनक तक नहीं लगी। इससे उसका हौसला बढ़ गया। सचिन ने फिर यूपी माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाई और विज्ञापन निकाला।
इसके लिए लाखों की संख्या में अभ्यर्थी आवेदन करते हैं। ऐसे में शातिरों को करोड़ों की कमाई का अनुमान था, लेकिन इससे पहले ही वे पुलिस के शिकंजे में फंस गया। इनके कब्जे से पुलिस ने दो लैपटॉप, एक टैबलेट, पेन ड्राइव, वेबसाइट से संबंधित कूटरचित दस्तावेज, आवेदन करने वाले 567 अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र, आवेदन शुल्क के दो लाख 17 हजार रुपये आदि बरामद हुए हैं।
इंस्पेक्टर राजीव तिवारी ने बताया कि मास्टरमाइंड सचिन बेहद शातिर दिमाग है। वह पॉलिटेक्निक के बाद बीटेक में दाखिला लिया। लेकिन तब तक उसकी संगत बिगड़ गई और जालसाजी से रकम कमाने का चस्का लग गया। इसके चलते बीटेक की पढ़ाई भी बीच में छोड़ दी। जबकि साहिल लखनऊ के एक नामी कॉलेज से बीटेक किया हुआ है। पुलिस के मुताबिक सचिन ने साहिल को बेहद गोपनीय काम बताकर वेबसाइट बनवाई थी।
पुलिस से बचने का शातिर ने भिड़ाया था हर जुगत
पुलिस के मुताबिक गिरोह का सरगना सचिन इतना शातिर है कि वह किसी से सीधे बात नहीं करता था। वह कांफ्रेंस कॉल करता था। वेबसाइट भी दूसरे से बनवाता था। पुलिस से बचने के लिए मोबाइल फोन में नेट का प्रयोग करते समय वीपीएन का प्रयोग करता था। वेबसाइट के लिए दूसरे के फर्जी नाम व मेल आईडी का प्रयोग करवाता था।