धूमनगंज हत्याकांड : बेटे ने रिश्तों तो उसके दोस्त ने किया भरोसे का खून
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धूमनगंज में एक दिन पहले हुए जघन्य हत्याकांड में मृतक कारोबारी के बेटे आतिश ने रिश्तों का खून किया तो उसके दोस्त अनुज श्रीवास्तव ने परिवार के भरोसे का कत्ल किया। घर के चारों लोगों को मौत के घाट उतारते वक्त सबसे ज्यादा बेरहमी उसने ही की। उसने ही चारों लोगों का गला चाकू से रेता। हत्यारोपियों को लेकर शुक्रवार को पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची तो सीन रिक्रिएशन के दौरान यह बातें सामने आईं।
गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को लेकर शुक्रवार सुबह सीओ सिविल लाइंस वृजनारायण सिंह एक बार फिर घटनास्थल पर पहुंचे। यहां पहुंचकर आरोपियों से विस्तार से इस बात की जानकारी ली गई कि उन्होंने हत्याकांड को कैसे अंजाम दिया। इस दौरान पता चला कि चार लोगों को मौत के घाट उतारने के दौरान सबसे ज्यादा बर्बरता अनुज ने ही की। उसने ही परिवार के चारों लोगों की गर्दन चाकू से रेता था।
पूछताछ के दौरान उसने बताया कि उसके मामा राजकृष्ण ने कूलर की घास लेने के बहाने दरवाजा खटखटाया तो कारोबारी तुलसीदास नीचे आए। जैसे ही वह घास देने के लिए पीछे मुड़कर दुकान के भीतर गए, राजकृष्ण भी भीतर चला आया। इसके बाद अनुज भी दुकान में घुस गया। बेटे आतिश के साथ आने-जाने के दौरान अनुज कारोबारी से भी घुलमिल गया था, ऐसे में उन्होंने कोई विरोध भी नहीं किया। दोनों ने बातों में उन्हें बातों में उलझाया और इसी दौरान गोदाम में पहले से छिपा अंकित भी आ गया।
इसके बाद अंकित व राजकृष्ण ने कारोबारी को पकड़ लिया, जबकि अनुज ने उनकी गर्दन रेत दी। इसके बाद उसने कारोबारी की पत्नी किरण को आवाज देकर कहा कि आपको अंकल बुला रहे हैं। जैसे ही वह नीचे आईं, गले पर चाकू से वारकर उन्हें भी मौत के घाट उतार दिया।
इसके बाद उसने पानी मांगने के बहाने से बुलाकर कारोबारी की बहू प्रियंका को भी मौत के घाट उतार दिया। फिर अनुज अपने मामा राजकृष्ण को लेकर ऊपर गया और वहां मौजूद कारोबारी की बेटी निहारिका से कहा कि वह अपने साथी को किराये पर कमरा दिखाना चाहता है। जैसे ही निहारिका उठी, मौका पाकर उसका भी गला रेत दिया।
पुलिस का कहना है कि जांच पड़ताल में पता चला है कि आतिश के साथ आने जाने के दौरान अनुज ने उसके कारोबारी पिता व अन्य घरवालों से भी नजदीकी बढ़ा ली थी। बेटे का दोस्त समझकर वह धीरे-धीरे उस पर भरोसा भी करने लगे थे। यही वजह थी कि अनजान व्यक्ति के घर में घुसने के बाद भी उसे ही देखकर कारोबारी ने शोर तक नहीं मचाया। जबकि अनुज ने इसी भरोसे का फायदा उठाकर उनके साथ विश्वासघात किया।