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ऑनलाइन क्लॉसेज को बनाया अवसर, तकनीक से जुड़कर जारी रखी पढ़ाई

Thu, 25 Jun 2020 10:03 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 25 Jun 2020 10:03 AM IST
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prayagraj news: opportunity created for online classes
वेबिनार - फोटो : pixabay

अमर उजाला’ की वेबिनार शृंखला के तहत बुधवार को आयोजित ‘कोरोना काल: बदलाव और चुनौतियां’ विषयक वेबिनार में शामिल विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं से जुड़ीं शिक्षिकाओं, प्रधानाध्यापिकाओं, प्रधानाचार्यों ने कोरोना काल में शिक्षा के क्षेत्र में आए बदलावों से उपजी व्यावहारिक दिक्कतें बताईं। साथ ही उसके विकल्पों और उपयोगिता को भी बखूबी रेखांकित किया। कहा, इस दौरान सभी शिक्षा के ऑनलाइन विकल्प से परिचिति और लाभान्वित हुए।

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आने वाले समय में इसे और प्रभावी तरीके से विकसित करना होगा। एमएल कान्वेंट की प्रधानाचार्या निमिषा श्रीवास्तव ने कहा, अब तक कक्षाओं में सीधे संवाद की आदत थी, उसे बदला और हमने सफलतापूर्वक ऑनलाइन पढ़ाई का प्रयोग करते हुए विद्यार्थियों को कक्षाओं जैसा ही अनुभव और अभ्यास कराया। हालांकि कई अभिभावकों के पास तो की पैड वाले मोबइल थे सो दिक्कतें आईं।
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इसके बावजूद स्वास्थ की सुरक्षा रखते हुए पढ़ाई जारी रखी। पूर्व माध्यमिक विद्यालय, चाका की सहायक अध्यापिका नीरा टंडन ने कहा, ऑनलाइन पढ़ाई, इस दौर की सबसे बड़ी चुनौती रही लेकिन छात्राओं, शिक्षिकाओं ने तकनीक के बेहतर इस्तेमाल का तरीका सीखा और पढ़ाया । प्राथमिक विद्यालय जैतवार डीह की सहायक अध्यापिका श्वेता श्रीवास्तव बोलीं, निश्चित रूप से चुनौतियां थीं लेकिन हमने बच्चों, अभिभावकों को वर्चुअल क्लासेज के बारे में बताया, समझाया।
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मानसिक संबल बनकर उन्हें विषम परिस्थितियों से उबारा। आर्यकन्या इंटर कॉलेज की शिक्षिका सलोनी अग्रवाल ने कहा, कोरोना ने हमें हमारी संस्कृति की खूबियां बताते हुए उस ओर लौटने को प्रेरित किया। साथ ही नए प्रयोगों से जुड़ने को भी कहा।
मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज की शिक्षिका डॉ.रफत फाज़िल बोलीं, कोरोना काल ने पढ़ाई का तरीका बदल दिया। पढ़ाई ऑनलाइन होने लगी।

निश्चित रूप से ऑनलाइन पढ़ाई सरकार की बहुत अच्छी पहल है लेकिन ज्यादातर छात्राएं निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों से आती हैं सो उन्हें मोबाइल नहीं मिला और हमारी मेहनत बेकार गई। पूर्व माध्यमिक विद्यालय, कन्या, शिवगढ़ की सहायक अध्यापिका कल्पना तिवारी ने जोड़ा, ऑनलाइन पढ़ाई और विद्यालय आना जाना दोनों चुनौती है लेकिन प्रेरणा एप से विद्यालय का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर अध्ययन अध्यापन जारी रहा।  

दुर्गावती इटंरनेशनल स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ.स्वतंत्र मिश्रा ने कहा, इस बदलाव को हमने समस्या नहीं चुनौती और अवसर के रूप में लिया। सेहत की सुरक्षा के साथ शिक्षा जारी रखना चुनौती थी लेकिन यह संकल्प पूरा हुआ। प्राथमिक विद्यालय बिशुनदास का पुरा की प्रधानाध्यापिका सरिता दुबे ऑनलाइन पढ़ाई कोरोना की सबसे बड़ी चुनौती रही और शिक्षकों, विद्यार्थियों, दोनों से इसे अवसर में बदला। 

प्राथमिक विद्यालय मटियारा की सहायक अध्यापिका मधुलिका सिंह ने भी ग्रामीण क्षेत्रों के ज्यादातर बच्चों के पास एंड्रायड मोबाइल न होने का मुद्दा उठाया। कहा, जिन बच्चों को मोबाइल मिला, उन्हें अच्छा लगा लेकिन जिन बच्चों को मोबाइल नहीं मिला, उन तक कक्षाओं को लाभ नहीं पहुंचा और हमारी कोशिश बेकार गई। प्राथमिक विद्यालय जैतवार डीह की सहायक अध्यापिका अर्चना गुप्ता ने कहा, चुनौतियों को धैर्य और सूझबूझ के साथ समझ करके अवसर में बदला और मुश्किलों को आसान किया।

इलाहाबाद पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या अमिता मिश्रा ने कहा, कोरोना काल में ऑनलाइन विकल्प सुरक्षित और प्रभावी रहा। चुनौतियां निकट भविष्य में खत्म होने वाली नहीं हैं, सो ऑनलाइन व्यवस्था को प्रभावी बनाने में सभी को मिलकर कोशिश करनी होगी। 

समझना होगा वर्चुअल क्लासेज का महत्व, करना होगा सहयोग
महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर की प्रधानाचार्या सुष्मिता कानूनगो ने परिस्थितियां दोहराईं। बोलीं, देश में अचानक हुए लॉकडाउन ने आरंभिक तौर पर तो सब कुछ ठप कर दिया था। न रिजल्ट तैयार हो सके थे, न ही अगले सत्र की तैयारी ही। लेकिन तकनीक के बेहतर प्रयोग से शिक्षिक-शिक्षिकाओं ने पहले ऑनलाइन पढ़ाने का तरीका सीखा और फिर विद्यार्थियों को वीडियो, नोट्स आदि के माध्यम से पढ़ाया। सुरक्षित तरीकेसे रहकर अध्ययन, अध्यापन जारी रहा।

अभिभावकों ने वर्चुअल क्लासेज को महत्व नहृीं दिया, इसीलिए फीस देने में भी आनाकानी की। इससे तो दिन-रात तैयारी करके पढ़ाने वाले अध्यापक-अध्यापिकाओं को सैलरी देने में दिक्कतें आएंगी। अभिभावकों को इसे समझना और सहयोग करना होगा।

 
हकीकत दर हकीकत

0 ऑनलाइन कक्षाओं के लिए एंड्रायड फोन की जरूरत है जो ज्यादातर बच्चों, अभिभावकों के पास नहीं है, ऐसे में या तो कई बच्चों ने कक्षाएं साझा कीं या फिर वे उससे वंचित रह गए।
0 जब दफ्तर खुल गए तो अभिभावक शहर चले आए, ऐसे में उनकी वापसी पर ही बच्चों के हाथ मोबाइल लगा।
0 कोरोना काल में किसी को महंगे फोन के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता था, ऐसे में साझा करके पढ़ाई का सुझाव दिया गया।
0 कई बार मोबाइल रिचार्ज न होने पर शिक्षिकाओं ने पहल करते हुए छात्राओं के मोबाइल रिचार्ज कराए।
0 कोरोना आपदा के बढ़ते संक्रमण के बीच जूनियर कक्षाओं को फिलहाल नहीं आरंभ किया जाना चाहिए, वरना ऐसे बच्चों को संभालना मुश्किल होगी।

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