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प्रयागराज माघ मेला : सेक्टर पांच में शिफ्ट होंगी संगम नोज की धार्मिक संस्थाएं

Fri, 03 Dec 2021 02:23 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 03 Dec 2021 02:23 AM IST
सार

संगम की रेती पर तंबुओं की नगरी बसाने के लिए माघ मेला के क्षेत्रफल में विस्तार की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। संगम नोज पर महावीर मार्ग और सरस्वती मार्ग पर बसने वाली दर्जनों संस्थाओं की भूमि इस बार कटान से प्रभावित हो गई है।

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Prayagraj Magh Mela: Religious institutions of Sangam Nose will shift in Sector 5
Prayagraj News : माघ मेला के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

संगम की रेती पर माघ मेला बसाने के लिए भूमि के समतलीकरण का काम बृहस्पतिवार को तेज हो गया। कटान और दलदल की वजह से संगम नोज से विस्थापित होने वाली क ई संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने इस दिन मेला प्रशासन से सरस्वती मार्ग का निर्माण कराकर वहां शिविरों की स्थापना कराने का मुद्दा उठाया। भूमि कम होने की वजह से इस बार मेला प्रशासन ने सेक्टर पांच में ऐसी संस्थाओं को शिफ्ट करने का मन बनाया है। फिलहाल ऐसे अहम मसलों पर शुक्रवार को सलाहकार समिति की होने वाली बैठक में निर्णय लिया जाएगा।

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संगम की रेती पर तंबुओं की नगरी बसाने के लिए माघ मेला के क्षेत्रफल में विस्तार की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। संगम नोज पर महावीर मार्ग और सरस्वती मार्ग पर बसने वाली दर्जनों संस्थाओं की भूमि इस बार कटान से प्रभावित हो गई है। ऐसी संस्थाओं को सेक्टर पांच में शिफ्ट करने की मेला प्रशासन ने तैयारी कर ली हैै। हालांकि सरस्वती मार्ग की कुछ संस्थाओं ने बृहस्पतिवार को मेला प्रशासन से पूर्व निर्धारित स्थानों पर दलदल को पाट कर बसाने का आग्रह किया है।

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कई जगह हो गई है अधिक कटान

लेकिन, ऐसा हो पाएगा या नहीं अभी भविष्य पर निर्भर करेगा। सलाहकार समिति की शुक्रवार को होने वाली बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। नए मेलाधिकारी शेषमणि पांडेय ने सेक्टरवाइज मेले की बसाहट की समीक्षा के बाद समय से काम पूरा करने की अफसरों को हिदायत दी हैै, ताकि तैयारियां पिछड़ने न पाएं। कटान और दलदल की वजह से संगम नोज के अलावा खाक चौक और ओल्ड जीटी के पास कटान अधिक हो गई है।

इस वजह से उन इलाकों में समतलीकरण में भी दिक्कतें आने लगीं हैं। जल प्रवाह तेज होने और किनारों पर कटान बढ़ने से सबसे अधिक चुनौती पांटून पुलों के निर्माण को लेकर है। बावजूद इसके पांटून पहुंचाने और लिंक करने का काम तेज कर दिया गया है। इस बार पांच पांटून पुलों के निर्माण के लिए छह सौ पीपे की जरूरत है। इसके सापेक्ष सौ पीपे बृहस्पतिवार तक पहुंचा दिए गए थे।

गंगा में चार गुना अधिक प्रवाह होने से दिक्कतें

गंगा में प्रवाह तेज होने से मेला बसाने में दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। सिंचाई विभाग के अभियंताओं की रिपोर्ट के मुताबिक माघ मेला के समय सात हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जाता था। लेकिन, इस बार अभी 28 हजार क्यूसेक जल नियमित गंगा में आ रहा है। इस वजह से प्रवाह में तेजी की वजह से कटान बढ़ती जा रही है।

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