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Prayagraj Magh Mela : पौष से पूर्व मकर संक्रांति से ही आरंभ हो जाएगा एक कल्पवास
Wed, 12 Jan 2022 11:28 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 12 Jan 2022 11:28 PM IST
सार
मैथिल ब्राह्मणों का कल्पवास संक्रांति से संक्राति तक होता है। सो उनके कल्पवास की शुरुआत मकर संक्रांति से होगी जिसे अगली संक्रांति पर पूर्णता मिलेगी।
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Prayagraj News : माघ मेला।
- फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
संगम की रेती पर तंबुओं की नगरी में परंपरागत रूप से माह भर के जप-तप, नियम-संयम का माह भर का कल्पवास पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर माघी पूर्णिमा तक रहेगा। लेकिन, इस बार मकर संक्रांति का प्रमुख स्नानपर्व पौष पूर्णिमा से पहले ही पड़ रहा है, ऐसे में बड़ी संख्या में कल्पवासी मकर संक्रांति जैसे प्रमुख स्नानपर्व पर ही डुबकी लगाकर कल्पवास आरंभ करेंगे। वैसे पौष पूर्णिमा पर डुबकी लगाकर कल्पवास की शुरुआत करने वालों से इतर एक कल्पवास की शुरुआत मकर संक्रांति से ही हो जाएगी।
दरअसल मैथिल ब्राह्मणों का कल्पवास संक्रांति से संक्राति तक होता है। सो उनके कल्पवास की शुरुआत मकर संक्रांति से होगी जिसे अगली संक्रांति पर पूर्णता मिलेगी। इस परंपरा का निर्वाह करने वाले मुख्यत: बिहार और झारखंड के मैथिल ब्राह्मण होंगे लेकिन संक्रांति से संक्राति तक कल्पवास की परंपरा में उनके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश और नेपाल से आने वाले श्रद्धालु-कल्पवासी भी शामिल होंगे।
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दरअसल मैथिल ब्राह्मणों का कल्पवास संक्रांति से संक्राति तक होता है। सो उनके कल्पवास की शुरुआत मकर संक्रांति से होगी जिसे अगली संक्रांति पर पूर्णता मिलेगी। इस परंपरा का निर्वाह करने वाले मुख्यत: बिहार और झारखंड के मैथिल ब्राह्मण होंगे लेकिन संक्रांति से संक्राति तक कल्पवास की परंपरा में उनके अतिरिक्त हिमाचल प्रदेश और नेपाल से आने वाले श्रद्धालु-कल्पवासी भी शामिल होंगे।
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Prayagraj News : माघ मेले की तैयारी में जुटे मजदूर।
- फोटो : प्रयागराज
‘अमर उजाला’ से बातचीत में काली मछली निशान वाले तीर्थपुरोहित दीपू मिश्रा ने कहा, अबकी इन कल्पवासियों के लिए पौष पूर्णिमा से पहले मकर संक्रांति के मद्देनजर ही तैयारियां तकरीबन पूरी कर ली गई हैं।
ऐसे कल्पवासी मकर संक्रांति के दिन ही तांबे की लुटिया में तिल लेकर और उसे सिर पर रखकर संगम सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाएंगे और स्नान करके लौटने के बाद वह लुटिया तीर्थपुरोहित को दान कर देंगे फिर संकल्प लेकर उनका माह भर का कल्पवास आरंभ होगा जो अगली संक्रांति को पूरा हो जाएगा। स्नान से पहले श्रद्धालु क्षौरकर्म भी कराएंगे। हालांकि कई श्रद्धालु माघी पूर्णिमा तक भी संगम की रेती पर रुकेंगे।
ऐसे कल्पवासी मकर संक्रांति के दिन ही तांबे की लुटिया में तिल लेकर और उसे सिर पर रखकर संगम सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाएंगे और स्नान करके लौटने के बाद वह लुटिया तीर्थपुरोहित को दान कर देंगे फिर संकल्प लेकर उनका माह भर का कल्पवास आरंभ होगा जो अगली संक्रांति को पूरा हो जाएगा। स्नान से पहले श्रद्धालु क्षौरकर्म भी कराएंगे। हालांकि कई श्रद्धालु माघी पूर्णिमा तक भी संगम की रेती पर रुकेंगे।