Prayagraj Magh Mela 2020: सदियों से चली आ रही माघ मेले की परंपरा पर संकट के बादल
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संगम की रेती पर संतों-भक्तों के समागम वाले माघ मेले पर कोविड-19 की वजह से संकट के बादल छा गए हैं। पहले जहां सितंबर से पूर्व ही पांटून पुलों, चकर्ड प्लेट मार्गों और तंबुओं का नगर बसाने के लिए ठेके हो जाते थे, वहीं इस बार अभी तक टेंडर प्रक्रिया आरंभ ही नहीं हो सकी है। माघ मेले की तैयारी को लेकर प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से अब तक किसी तरह का खाका सार्वजनिक नहीं किया जा सका है। इससे मेला प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है।
गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर सदियों से लगने वाले माघ मेले को लेकर इस बार अनिश्चय की स्थिति बन गई है। कोरोना वायरस केबढ़ते संक्रमण की वजह से प्रयागराज मेला प्राधिकरण माघ मेले के स्वरूप को तय करने की दिशा में कदम नहीं बढ़ा सका है। ऐसे में इस आध्यात्मिक और सांस्कृति महत्व वाले मेले को लेकर संतों और तीर्थपुरोहितों की चिंता बढ़ती जा रही है।
वैसे इस सांस्कृतिक आयोजन की तैयारी हर साल जुलाई से ही आरंभ हो जाया करती थी। रेती पर मेला बसाने केस्वरूप के साथ ही बजट तैयार कर लिया जाता था। इसके बाद सिर्फ बाढ़ का पानी सिमटने का इंतजार रहता था और पानी कम होने के साथ ही पांटून पुलों और मार्गों के साथ ही बिजली ,पानी, संचार समेत अन्य संसाधनों पर काम शुरू हो जा था। लेकिन इस बार अभी तक टेंडर तो दूर, रूपरेखा पर मेला प्राधिकरण की बैठक तक नहीं हो सकी है।
कोरोना संक्रमण की वजह से तैयारी शुरू नहीं हो सकी है। शासन की ओर से मेले को लेकर गाइड लाइन अभी तक न मिलने की वजह से खाका तय नहीं हो सका है। इस संबंध में जल्द ही पत्रचार किया जाएगा। रजनीश मिश्र, प्रभारी अधिकारी, प्रयागराज मेला प्राधिकरण।