प्रयागराज : इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा दारागंज रेलवे स्टेशन, ब्रिटिश हुकूमत में हुआ था निर्माण
गंगा पर हो रहे पुल निर्माण के बाद बंद हो जाएगा दारागंज स्टेशन। दारागंज रेलवे स्टेशन का निर्माण ब्रिटिश हुकूमत के दौरान हुआ था। वर्ष 1899 और 1913 के दौरान बनारस से प्रयागराज के बीच बिछाई गई रेल लाइन के दौरान ही यह स्टेशन बनाया गया।
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प्रयागराज का दारागंज रेलवे स्टेशन आने वाले समय में इतिहास बनकर रह जाएगा। वर्षों पुराने इस रेलवे स्टेशन को बंद करने की कवायद पूर्वोत्तर रेलवे ने शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि बनारस-प्रयागराज रामबाग रेलमार्ग के दोहरीकरण कार्य के कारण झूंसी को दारागंज से जोड़ने के लिए बनाए जा रहे गंगा पुल का निर्माण होने के बाद दारागंज स्टेशन बंद कर दिया जाएगा।
दारागंज रेलवे स्टेशन का निर्माण ब्रिटिश हुकूमत के दौरान हुआ था। वर्ष 1899 और 1913 के दौरान बनारस से प्रयागराज के बीच बिछाई गई रेल लाइन के दौरान ही यह स्टेशन बनाया गया। इस स्टेशन की उपयोगिता बीते कुछ वर्षों तक काफी रही। संगम क्षेत्र के नजदीक होने की वजह से यहां लगने वाले माघ और कुंभ मेले के दौरान हजारों की संख्या में यात्री यहां उतरते रहे हैं। इस बीच तकरीबन तीन वर्ष से बनारस से प्रयागराज के बीच रेल लाइन दोहरीकरण का काम चल रहा है।
इसके लिए गंगा पर एक नया पुल बनाया जा रहा है। दारागंज साइड में पुराने रेल पुल से तकरीबन 120 मीटर दूर इसे बनाया जा रहा है। इस पुल को परेड मैदान के रास्ते दारागंज रेलवे स्टेशन के आगे मिलाया जाएगा। ऐसे में पुल निर्माण के बाद वाराणसी रूट से आने वाली ट्रेनें सीधे प्रयागराज रामबाग पहुंच जाएंगी।
इस वजह से दारागंज स्टेशन की उपयोगिता नहीं रह जाएगी। बताया जा रहा है कि दिसंबर 2023 या उससे पहले गंगा पर रेल विकास निगम लिमिटेड द्वारा पुल का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। पूर्वोत्तर रेलवे इस तैयारी में है कि पुल निर्माण के बाद यह स्टेशन बंद कर दिया जाए। वहीं चर्चा यह भी कि रेलवे इसके पूर्व भी यह स्टेशन बंद कर सकता है।
बीते कुछ वर्षों के दौरान प्रयागराज में लगने वाले माघ और कुंभ मेले के दौरान श्रद्धालुओं की आने वाली भारी भीड़ की वजह से दारागंज स्टेशन यात्रियों के लिए बंद रहता है। क्योंकि यह स्टेशन काफी ऊंचाई पर है। यहां पहुंचने का रास्ता भी बेहद संकरा है। ऐसे में यहां भगदड़ की आशंका बनी रहती है। इस वजह से मेला अवधि में भी दारागंज स्टेशन की उपयोगिता नहीं रह जाती है।
सिर्फ दो जोड़ी ट्रेनों का ही है स्टेशन पर ठहराव
गंगा किनारे शहर के दारागंज रेलवे स्टेशन का संचालन रेलवे के लिए महंगा सौदा साबित हो रहा है। वर्तमान में यहां सिर्फ मऊ डीएमयू और बनारस पैसेंजर का ही दोनों ओर से ठहराव है। प्रतिदिन की यात्री आय भी दो से तीन हजार रुपये के ही आसपास है।
अहिमनपुर बन गया हॉल्ट, सैदाबाद और जंगीगंज स्टेशन भी कतार में
प्रयागराज रामबाग-बनारस रूट पर दारागंज स्टेशन को जहां बंद करने की तैयारी चल रही है तो वहीं दूसरी ओर इस रूट के अहिमनपुर स्टेशन को बंद कर तीन जुलाई 21 को उसे हॉल्ट में तब्दील कर दिया गया है। इसके अलावा अब जंगीगंज और सैदाबाद स्टेशन को भी हॉल्ट बनाने की तैयारी हो रही है। दरअसल हॉल्ट बनने के बाद वहां रेलवे का कोई भी स्टाफ तैनात नहीं रहेगा। इस दौरान वहां ट्रेन का ठहराव जरूर 30 सेकंड से एक मिनट तक का रहेगा।
आने वाले समय में दारागंज रेलवे स्टेशन को बंद किया जा सकता है। हो सकता है कि इसका उपयोग हॉल्ट स्टेशन के रूप में हो। गंगा पर बन रहे पुल के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। - अशोक कुमार, पीआरओ, वाराणसी मंडल ।