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प्रयागराजः चाऊमीन फैक्ट्री में लगी भीषण आग, फटे तीन सिलेंडर
Sat, 13 Apr 2019 09:32 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 13 Apr 2019 09:32 PM IST
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आग
- फोटो : amar ujala
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धूमनगंज के अलका विहार कॉलोनी स्थित एक चाऊमीन फैक्ट्री में बीती रात भीषण आग लग गई। वहां रखे तीन गैस सिलेंडरों भी आग की चपेट में आने से ब्लास्ट कर गए। इससे मोहल्ले में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर थोड़ी देर में फायर बिग्रेड की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। पांच घंटे की मशक्कत के बाद सुबह करीब छह बजे किसी तरह आग पर काबू पाया जा सका। आग की चपेट में आकर फैक्ट्री में रखे सभी उपकरण समेत गोदाम में रखा सामान जलकर पूरी तरह खाक हो गया।
पोंगहट पुल पास स्थित अलका विहार कॉलोनी में एयरफोर्स से रिटायर्ड जयशंकर श्रीवास्तव ने घर के निचले हिस्से में चाऊमीन बनाने की फैक्ट्री लगा रखी है। शुक्रवार रात करीब साढ़े बारह बजे काम बंद होने के बाद नूडल्स को ड्रायर में लगाकर सभी मजदूर सोने चले गए। उसी के बाद ड्रायर में शार्ट सर्किट होने से आग लग गई। अंदर करीब एक दर्जन सिलेंडर रखे हुए थे। बताया जा रहा इनमें भी कुछ सिलेंडरों में लीकेज था। इस वजह से आग बहुत तेजी से भड़कने लगी।
मजदूरों ने शोर मचाया तब ऊपर सो रहे जयशंकर जाग गए। उन्होंने वहां रखे अग्निरोधक उपकरणों से आग बुझाने की कोशिश की लेकिन आग फैलती जा रही थी। इस बीच मजदूरों ने चार सिलेंडर निकालकर बाहर कर दिए लेकिन तब तक आग सिलेंडरों तक पहुंच चुकी थी। सूचना मिलते ही थोड़ी देर में फायर बिग्रेड की गाड़ियां भी मौके पर पहुंच गईं। एयरपोर्ट में खड़ी दो गाड़ियों को भी वहां बुला लिया गया लेकिन इसी बीच एक-एक करके तीन सिलेंडर ब्लास्ट कर गए।
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सिलेंडरों के ब्लास्ट करने से घर के निचले मंजिल की दीवारों का प्लास्टर उखड़ गया। बढ़ते-बढ़ते आग ने घर के पूरे निचले हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया। करीब पांच घंटे तक भारी मशक्कत के बाद किसी तरह आग में काबू पाया जा सका। पुलिस के मुताबिक इसमें कोई भी घायल नहीं हुआ लेकिन चाऊमीन बनाने के सभी उपकरण समेत गोदाम में रखी चाऊमीन पूरी तरह नष्ट हो गई। धूमनगंज इंस्पेक्टर संदीप मिश्रा के मुताबिक फैक्ट्री मालिक की ओर से अभी नुकसान के बारे में जानकारी नहीं दी गई है।
आग इस कदर फैल चुकी थी कि उसे बुझाने में फायर बिग्रेड को तीन गाड़ियां मौके पर भेजनी पड़ी। रात में इनमें से दो गाड़ियों का पानी खत्म हो गया। इसके बाद यह गाड़ियां लौट गई और फिर से दो गाड़ियां भेजी गईं। उधर, एयरपोर्ट पर मौजूद दो गाड़ियों को भी बुला लिया गया था। करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
फैक्ट्री के भीतर करीब 11 सिलेंडर रखे हुए थे। गनीमत रही कि ज्यादातर सिलेंडर आग भड़कने से पहले ही निकाल लिए गए थे। फायर बिग्रेडकर्मियों के मुताबिक उनके पहुंचने से पहले मजदूरों ने चार सिलेंडर बाहर निकाल लिए थे। उन्होंने भी चार सिलेंडर बाहर निकाले लेकिन तीन सिलेंडर आग की चपेट में आकर ब्लास्ट कर गए। उनमें गैस कम थी लिहाजा, मकान का सिर्फ प्लास्ट आदि ही उखड़ा। अगर यह सिलेंडर पूरी तरह भरे होते तब कोई बड़ी जनहानि भी हो सकती थी। सिलेंडर के ब्लास्ट होने पर मोहल्ले में हड़कंप मच गया। लोग बदहवास हालत मेें मोहल्ले से निकलकर बाहर भागने लगे। फैक्ट्री के ऊपर मालिक जयशंकर परिवार के साथ रहते हैं। आग लगने पर परिवार के लोगों को भी किसी तरह से बाहर निकाला गया। इसके बाद सुबह छह बजे, आग बुझने तक लोग वहीं बाहर सड़कों पर ही खड़े रहे।
आवासीय इलाके में चल रही फैक्ट्री का यह कोई इकलौता मामला नहीं बल्कि शहर के भीतर सिविल लाइंस, कटरा, धूमनगंज, मम्फोर्डगंज जैसे आवासीय इलाकों के भीतर कई फैक्ट्रियां खतरनाक तरीके से काम कर रही हैं। इसी तरह पिछले वर्ष नैनी में एक आइस फैक्ट्री में जहरीली गैस रिसने से कई लोग गंभीर तौर पर बीमार हो गए थे। उस दौरान भी आवासीय इलाकों में चलने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियान चलाने की बात हुई थी लेकिन कोई भी अभियान नहीं चलाया जा सका।
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पोंगहट पुल पास स्थित अलका विहार कॉलोनी में एयरफोर्स से रिटायर्ड जयशंकर श्रीवास्तव ने घर के निचले हिस्से में चाऊमीन बनाने की फैक्ट्री लगा रखी है। शुक्रवार रात करीब साढ़े बारह बजे काम बंद होने के बाद नूडल्स को ड्रायर में लगाकर सभी मजदूर सोने चले गए। उसी के बाद ड्रायर में शार्ट सर्किट होने से आग लग गई। अंदर करीब एक दर्जन सिलेंडर रखे हुए थे। बताया जा रहा इनमें भी कुछ सिलेंडरों में लीकेज था। इस वजह से आग बहुत तेजी से भड़कने लगी।
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मजदूरों ने शोर मचाया तब ऊपर सो रहे जयशंकर जाग गए। उन्होंने वहां रखे अग्निरोधक उपकरणों से आग बुझाने की कोशिश की लेकिन आग फैलती जा रही थी। इस बीच मजदूरों ने चार सिलेंडर निकालकर बाहर कर दिए लेकिन तब तक आग सिलेंडरों तक पहुंच चुकी थी। सूचना मिलते ही थोड़ी देर में फायर बिग्रेड की गाड़ियां भी मौके पर पहुंच गईं। एयरपोर्ट में खड़ी दो गाड़ियों को भी वहां बुला लिया गया लेकिन इसी बीच एक-एक करके तीन सिलेंडर ब्लास्ट कर गए।
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सिलेंडरों के ब्लास्ट करने से घर के निचले मंजिल की दीवारों का प्लास्टर उखड़ गया। बढ़ते-बढ़ते आग ने घर के पूरे निचले हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया। करीब पांच घंटे तक भारी मशक्कत के बाद किसी तरह आग में काबू पाया जा सका। पुलिस के मुताबिक इसमें कोई भी घायल नहीं हुआ लेकिन चाऊमीन बनाने के सभी उपकरण समेत गोदाम में रखी चाऊमीन पूरी तरह नष्ट हो गई। धूमनगंज इंस्पेक्टर संदीप मिश्रा के मुताबिक फैक्ट्री मालिक की ओर से अभी नुकसान के बारे में जानकारी नहीं दी गई है।
आग इस कदर फैल चुकी थी कि उसे बुझाने में फायर बिग्रेड को तीन गाड़ियां मौके पर भेजनी पड़ी। रात में इनमें से दो गाड़ियों का पानी खत्म हो गया। इसके बाद यह गाड़ियां लौट गई और फिर से दो गाड़ियां भेजी गईं। उधर, एयरपोर्ट पर मौजूद दो गाड़ियों को भी बुला लिया गया था। करीब पांच घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
फैक्ट्री के भीतर करीब 11 सिलेंडर रखे हुए थे। गनीमत रही कि ज्यादातर सिलेंडर आग भड़कने से पहले ही निकाल लिए गए थे। फायर बिग्रेडकर्मियों के मुताबिक उनके पहुंचने से पहले मजदूरों ने चार सिलेंडर बाहर निकाल लिए थे। उन्होंने भी चार सिलेंडर बाहर निकाले लेकिन तीन सिलेंडर आग की चपेट में आकर ब्लास्ट कर गए। उनमें गैस कम थी लिहाजा, मकान का सिर्फ प्लास्ट आदि ही उखड़ा। अगर यह सिलेंडर पूरी तरह भरे होते तब कोई बड़ी जनहानि भी हो सकती थी। सिलेंडर के ब्लास्ट होने पर मोहल्ले में हड़कंप मच गया। लोग बदहवास हालत मेें मोहल्ले से निकलकर बाहर भागने लगे। फैक्ट्री के ऊपर मालिक जयशंकर परिवार के साथ रहते हैं। आग लगने पर परिवार के लोगों को भी किसी तरह से बाहर निकाला गया। इसके बाद सुबह छह बजे, आग बुझने तक लोग वहीं बाहर सड़कों पर ही खड़े रहे।
आवासीय इलाके में चल रही फैक्ट्री का यह कोई इकलौता मामला नहीं बल्कि शहर के भीतर सिविल लाइंस, कटरा, धूमनगंज, मम्फोर्डगंज जैसे आवासीय इलाकों के भीतर कई फैक्ट्रियां खतरनाक तरीके से काम कर रही हैं। इसी तरह पिछले वर्ष नैनी में एक आइस फैक्ट्री में जहरीली गैस रिसने से कई लोग गंभीर तौर पर बीमार हो गए थे। उस दौरान भी आवासीय इलाकों में चलने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियान चलाने की बात हुई थी लेकिन कोई भी अभियान नहीं चलाया जा सका।