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प्रदूषण जांच केंद्रों पर चार गुना बढ़ी भीड़, वाहन मालिक परेशान
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Pollution check centers increase four times, vehicle owners upset
- फोटो : CITY DESK
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प्रयागराज। एक सितंबर से मोटर वेहिकल एक्ट में हुए संशोधन के बाद वाहन मालिकोें के लिए प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाना आसान नहीं रहा। हाल यह है कि पहले के मुकाबले इन केंद्रों पर चार गुना तक भीड़ बढ़ गई है। जिले में कुल 12 लाख पंजीकृत वाहन हैं लेकिन प्रदूषण जांच केंद्रों की संख्या महज आठ है। इसके लिए वाहन मालिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मोटर वेहिकल एक्ट में संशोधन के बाद अन्य मदों की तरह ही प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र न होने पर भी जुर्माने की राशि बढ़ा दी गई है। पूर्व में जहां इसके लिए एक हजार का जुर्माना अदा करना पड़ता था वहीं अब इसके लिए संबंधित को 2500 रुपये भरने होंगे। बता दें कि खरीदने के एक साल के बाद वाहन मालिक को हर छह महीने पर प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र बनवाना पड़ता है। संशोधित मोटर वेहिकल एक्ट लागू होने के बाद से प्रदूषण जांच कराने के लिए भी खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
हाल यह है कि एक सितंबर से जंाच केंद्रों पर भीड़ चार गुना तक बढ़ गई है। ट्रांसपोर्टनगर स्थित वेदांता सेवा संस्थान के अमित कुमार ने बताया कि पहले एक दिन में बमुश्किल 8-10 गाड़ियां प्रदूषण जांच के लिए आती थीं। लेकिन एक सितंबर के बाद से रोजाना 200-250 गाड़ियों को प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। इसी तरह स्टैनली रोड स्थित जांच केंद्र के रवि ने भी इसी तरह की बात बताई। कहा कि एक सितंबर से प्रदूषण जांच के लिए आने वाले वाहनों की भीड़ कई गुना बढ़ गई है। बढ़े हुए जुर्माने का ही असर है कि लोग प्रदूषण जांच के लिए काफी जागरूक हुए हैं।
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अफसर भी मानते हैं कमी
मामले में एआरटीओ सियाराम वर्मा का कहना है कि वर्तमान में ऑनलाइन यानी एनआईसी से संबद्ध प्रदूषण जांच केंद्रों से जारी प्रमाणपत्र ही मान्य हैं। जिनकी संख्या कुल संख्या आठ है। यह सही है कि जिले में पंजीकृत कुल 12 लाख वाहनों के हिसाब से यह संख्या कम है। लेकिन शासन के आदेश के बाद ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्थाएं ही अधिकृत हैं। हालांकि शासन ने इन्हीं दिक्कतों को देखते हुए पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर प्रदूषण जांच केंद्रों खोलने के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की है। जिसके तहत मानकों को पूरा करने वाली कोई भी संस्था आवेदन कर सकती है।
रोज होता है पांच गाड़ियों का चालान
ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र न होने पर रोजाना औसतन पांच वाहनों के चालान किए जा रहे हैं। संशोधित मोटर वेहिकल एक्ट लागू होने के बाद नौ सितंबर तक कुल 46 ऐसे वाहनों का चालान किया गया जिनके पास प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र नहीं था। इससे पहले एक से 31 अगस्त तक 169 वाहनों का चालान प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र न होने की वजह से किया गया। इससे पहले जुलाई में लगभग 200 वाहनों का चालान वायु प्रदूषण के चलते हुआ। टीआई राकेश कुमार सिंह कहते हैं कि बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन एक सितंबर के बाद से प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र लेकर चलने वाले वाहन मालिकों की संख्या में थोड़ी बढ़ोत्तरी हुई है। उम्मीद यही है कि लोग अपने वाहनों की प्रदूषण जांच को लेकर जागरूक होंगे।
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मोटर वेहिकल एक्ट में संशोधन के बाद अन्य मदों की तरह ही प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र न होने पर भी जुर्माने की राशि बढ़ा दी गई है। पूर्व में जहां इसके लिए एक हजार का जुर्माना अदा करना पड़ता था वहीं अब इसके लिए संबंधित को 2500 रुपये भरने होंगे। बता दें कि खरीदने के एक साल के बाद वाहन मालिक को हर छह महीने पर प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र बनवाना पड़ता है। संशोधित मोटर वेहिकल एक्ट लागू होने के बाद से प्रदूषण जांच कराने के लिए भी खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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हाल यह है कि एक सितंबर से जंाच केंद्रों पर भीड़ चार गुना तक बढ़ गई है। ट्रांसपोर्टनगर स्थित वेदांता सेवा संस्थान के अमित कुमार ने बताया कि पहले एक दिन में बमुश्किल 8-10 गाड़ियां प्रदूषण जांच के लिए आती थीं। लेकिन एक सितंबर के बाद से रोजाना 200-250 गाड़ियों को प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। इसी तरह स्टैनली रोड स्थित जांच केंद्र के रवि ने भी इसी तरह की बात बताई। कहा कि एक सितंबर से प्रदूषण जांच के लिए आने वाले वाहनों की भीड़ कई गुना बढ़ गई है। बढ़े हुए जुर्माने का ही असर है कि लोग प्रदूषण जांच के लिए काफी जागरूक हुए हैं।
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अफसर भी मानते हैं कमी
मामले में एआरटीओ सियाराम वर्मा का कहना है कि वर्तमान में ऑनलाइन यानी एनआईसी से संबद्ध प्रदूषण जांच केंद्रों से जारी प्रमाणपत्र ही मान्य हैं। जिनकी संख्या कुल संख्या आठ है। यह सही है कि जिले में पंजीकृत कुल 12 लाख वाहनों के हिसाब से यह संख्या कम है। लेकिन शासन के आदेश के बाद ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्थाएं ही अधिकृत हैं। हालांकि शासन ने इन्हीं दिक्कतों को देखते हुए पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर प्रदूषण जांच केंद्रों खोलने के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था की है। जिसके तहत मानकों को पूरा करने वाली कोई भी संस्था आवेदन कर सकती है।
रोज होता है पांच गाड़ियों का चालान
ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र न होने पर रोजाना औसतन पांच वाहनों के चालान किए जा रहे हैं। संशोधित मोटर वेहिकल एक्ट लागू होने के बाद नौ सितंबर तक कुल 46 ऐसे वाहनों का चालान किया गया जिनके पास प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र नहीं था। इससे पहले एक से 31 अगस्त तक 169 वाहनों का चालान प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र न होने की वजह से किया गया। इससे पहले जुलाई में लगभग 200 वाहनों का चालान वायु प्रदूषण के चलते हुआ। टीआई राकेश कुमार सिंह कहते हैं कि बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन एक सितंबर के बाद से प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र लेकर चलने वाले वाहन मालिकों की संख्या में थोड़ी बढ़ोत्तरी हुई है। उम्मीद यही है कि लोग अपने वाहनों की प्रदूषण जांच को लेकर जागरूक होंगे।