छात्र राजनीति से सियासी छलांग

अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 16 Jul 2016 01:40 AM IST
Political leap from student politics
विधायक आशा कुमारी ने 47,10,309 रुपये का लोन लिया है।
यूपी में मिशन-2017 सभी राजनीतिक दलों के सामने है। ऐसे में संख्या बल के आधार पर देश और प्रदेश की राजनीति में प्रभावी युवा एक बार फिर इनकी प्राथमिकता में हैं। इसका असर उच्च शिक्षण संस्थानों में अभी से दिखने लगा है और परिसर में चहल-पहल बढ़ने के साथ सियासी दाव-पेच शुरू हो गए हैं। आलम यह है कि इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में प्रवेश का मामला पूरी तरह से राजनीतिक रूप ले चुका है। इसे लेकर छात्रों के आंदोलन में सभी दल के नेता खुलकर सामने हैं। परिसर के अलावा भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता के मुद्दों को भी एक बार फिर गरमाने की कोशिश शुरू हो गई है और राजनीतिक दलों ने अपने युवा ब्रिगेड को आगे कर दिया है। इतना ही नहीं इस नर्सरी से निकले युवा चेहरों को प्रदेश की राजनीति में भी बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। कई युवा तथा छात्र नेता तो टिकट के दावेदारों में शामिल हैं।

प्रदेश में युवा मतदाताओं की संख्या 60 प्रतिशत से अधिक है। इनमें बड़ी संख्या छात्र-छात्राओं और प्रतियोगियों की है। इसलिए युवा सभी दलों की प्राथमिकता में हैं। समाजवादी पार्टी में इनकी अगुवाई खुद युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कर रहे हैं। वहीं सांसद केशव प्रसाद मौर्या को भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे पिछड़ा कार्ड खेलने के अलावा युवाओं के मुद्दों और आंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी भी मुख्य वजह रहा। इसके अलावा लोक सेवा आयोग की भर्तियों में अनियमितता का मामला रहा हो या इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दाखिला ये सभी दलों ने प्रमुखता से उठाया। संसद में भी ये मुद्दे उठे। संसद के मानसून सत्र में भी युवाओं के कई मांगों को उठाने की तैयारी है।

आगामी चुनाव में युवा सिर्फ मुद्दा बनकर भी रहने नहीं जा रहे। विधानसभा चुनाव में उनकी सीधी भागीदारी होगी। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के कई छात्र नेता प्रमुख दलों के टिकट पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं। विश्वविद्यालय का केंद्रीय दर्जा मिलने से पहले छात्रसंघ अध्यक्ष रहे हेमंत कुमार सिंह टुन्नु, उपाध्यक्ष निर्भय सिंह पटेल को सपा ने उम्मीदवार घोषित कर दिया है। निवर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह को भी पार्टी की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने का आश्वासन मिला है। इनके अलावा छात्रनेता अभिषेक यादव भी दावेदारी कर रहे हैं। भाजपा से छात्रनेता राणा यशवंत प्रताप सिंह, दिनेश सिंह यादव समेत कई छात्र नेता दावेदारी कर रहे हैं। कांग्रेस के विवेकानंद पाठक को बड़ी जिम्मेदारी मिली हुई है। विगत 10-12 वर्षों में ही विश्वविद्यालय से निकले छात्र नेताओं की बात करें तो कई और भी हैं जिनकी विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका तय है।

विधानसभा से पहले विश्वविद्यालयों और कालेजों में छात्रसंघ चुनाव होना है। युवाओं में पकड़ तथा मनोवैज्ञानिक बढ़त के लिहाज से इस चुनाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही वजह है कि इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में सियासी दलों की दखलअंदाजी अभी से दिखने लगी है। सभी दलों का छात्र संगठन तो विद्यार्थियों के मुद्दों को लेकर आवाज उठा ही रहा है, पार्टी के नेता भी सक्रिय हो गए हैं। परिसर में गतिविधि बढ़ने के साथ परिसर में बड़े नेताओं की सक्रियता और बढ़ने की बात कही जा रही है।

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