प्रयागराज : 13 साल बाद भी पुलिस नहीं सुलझा सकी हत्या की गुत्थी, आरोपी बरी
यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश चंद्रपाल द्वितीय की अदालत ने सुनाया। मामला 2010 का हैं। प्रयागराज के करछना थाना क्षेत्र के केशवपुर गांव में रहने वाले राजवंत सिंह 21 मार्च की रात घर के बाहर चारपाई पर सो रहे थे।
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करछना थानाक्षेत्र के केशवपुर में घर के बाहर सोते हुई राजवंत की हत्या कर दी गई। हमलावरों ने सिर पर हमला करने के साथ उसके हाथ की उंगलियां भी काट डाली थी। वर्ष 2010 में हुई इस सनसनीखेज वारदात को किसने अंजाम दिया, 13 साल बाद भी पुलिस इस गुत्थी को सुलझा नहीं सकी। इलाहाबाद की जिला अदालत ने एक युवती से नाजायज संबंध की काल्पनिक कहानी के आधार पर आरोपी बनाए गए कौशांबी के कुंवर सिंह और गांव के रमेश पासी को दोष मुक्त करने का आदेश दे दिया।
यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश चंद्रपाल द्वितीय की अदालत ने सुनाया। मामला 2010 का हैं। प्रयागराज के करछना थाना क्षेत्र के केशवपुर गांव में रहने वाले राजवंत सिंह 21 मार्च की रात घर के बाहर चारपाई पर सो रहे थे। देर रात अज्ञात हमलावरों ने उसके सिर पर वार करने के साथ ही धारदार हथियार से हाथो की उंगलियों को भी काट डाला था। हत्या के बाद चारपाई पर ही उसे चादर से ढक कर फरार हो गए। सुबह जागने पर लोगों ने चारपाई से बहते खून को देखा, तब पता लगा कि उसकी हत्या कर दी गई है।
राजवंत, शीलवंत, विजय सिंह, और शिव बहादुर चार भईया के सबसे बड़ा था। उसकी पत्नी की मौत 20 साला पहले हो चुकी थी और उसकी कोई संतान भी नही थी। हत्या की एफआईआर मृतक राजवंत के चाचा भगवंत सिंह ने लिखवाई थी।
बयान में था विरोधाभास
विवेचना के दौरान गांव के ही रमेश पासी और पिपरी कौशांबी निवासी कुंवर सिंह के बीच गांव की ही लड़की से नाजायज संबध बनाने को लेकर हुआ विवाद प्रकाश में आया। उसी विवाद को आधार मान कर पुलिस में कुंवर सिंह और रमेश पासी के खिलाफ हत्या का आरोप पत्र दाखिल कर दिया। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त चापड की बरामदगी कौशांबी निवासी कुंवर सिंह की निशानदेही पर दर्शाई थी।
लगभग 13 साल चले हत्या के इस मामले में अभियोजन की ओर से पेश गवाहों ने मृतक को शराब पीने का आदी बताया। लेकिन महिला से नाजायज संबध के सवाल पर विरोधाभाषी बयान दर्ज करवाया। लेकिन, पुलिस 13 साल बाद भी यह गुत्थी नही सुलझा सकी कि आखिर इस वारदात को अंजाम दिया किसने? अदालत ने पाया की अभियोजन की कहानी संभावनाओं और कल्पनाओं पर आधारित है। साक्ष्यों के अभाव में दोनो आरोपियों को दोषमुक्त करने का फैसला सुना दिया गया।