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अनिवार्य सेवानिवृत्ति के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे कांस्टेबल

Tue, 23 Jul 2019 08:12 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jul 2019 08:12 PM IST
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police constable reached highcourt against compulsory retirement
अनिवार्य सेवानिवृत्ति के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे पुलिस कांस्टेबल
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प्रयागराज। पुलिस कांस्टेबलों को दी जा रही अनिवार्य सेवानिवृत्ति के खिलाफ कई जिलों के कांस्टेबलों ने हाईकोर्ट की शरण ली है। इसके खिलाफ दाखिल याचिकाओं में कहा गया है कि अधिकारी व्यक्तिगत नाराजगी या अन्य कारणों से मनमाने तरीके से अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश पारित कर रहे हैं। इसमें नियम-कानून का पालन भी नहीं किया जा रहा है। ऐसी तमाम याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र ने पुलिस विभाग और प्रदेश सरकार से 30 जुलाई तक जवाब मांगा है।
वाराणसी में तैनात कांस्टेबल महेंद्र कुमार पांडेय व कई अन्य सिपाहियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने एक साथ सुनवाई का निर्णय लिया है। याचिकाएं वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आगरा, गाजियाबाद, कानपुर सहित अन्य कई जिलों में तैनात कांस्टेबलों ने दाखिल की हैं। सिपाहियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का का कहना था कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश व्यक्तिगत नाराजगी के आधार पर जिले के पुलिस कप्तान द्वारा पारित किया जा रहा है । इस प्रकार का आदेश पारित करने से पूर्व सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट द्वारा पारित निर्णयों की अनदेखी की जा रही है। यहां तक कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति के संबंध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई गाइडलाइन का भी पालन नहीं किया गया है।
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सुप्रीमकोर्ट के निर्देशानुसार अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए एक स्क्रीनिंग कमेटी होगी, जो सेवानिवृत्ति किए जाने वाले कर्मचारी की सेवा से संबधित सारा ब्यौरा जुटाएगी। कर्मचारी का सर्विस रिकार्ड देखा जाएगा। उसकी प्रतिकूल प्रविष्टि आदि पर ध्यान दिया जाएगा तथा कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। इसके विपरीत पुलिस विभाग में बिना किसी जांच के मनमाने तरीके से सिपाहियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश दिया जा रहा है, जो गलत होने के साथ साथ गैरकानूनी है। याचिका में अनिवार्य सेवानिवृत्ति के ऐसे आदेशों को रद्द करने की हाईकोर्ट से मांग की है तथा कहा है कि सिपाहियों को 60 वर्ष की आयु तक उन्हें सेवा में बने रहने दिया जाए। याचिका के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट द्वारा पारित निर्णयों को आधार बनाया गया है।
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