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रंगदारी के लिए फायरिंग करने के आरोपियों पर पुलिस मेहरबान
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प्रयागराज। रंगदारी के लिए फायरिंग करने के आरोपियों पर धूमनगंज पुलिस मेहरबान है। मामले में नामजद अतीक अहमद के करीबी आबिद प्रधान व उसके साथियों को पुलिस हफ्ते भर बाद भी नहीं पकड़ सकी है। स्थानीय पुलिस की भूमिका इसलिए भी सवालों में है क्योंकि घटना के बाद उसने तहरीर बदलवाने का भी दबाव डाला था।
रिपोर्ट पोंगहट पुल निवासी अब्दुल रहीम(80) की ओर से दर्ज कराई गई थी। आरोप लगाया था कि तीन नवंबर की सुबह 11.30 बजे रसूलपुर मरियाडीह स्थित जमीन पर जैद अपने दोनों भाई जसीम, जाफर व राहुल सिंह और अरकम के अलावा कई अज्ञात लोगों के साथ असलहों से लैस होकर आया और आबिद प्रधान के नाम से 25 लाख रुपयों की मांग की। असमर्थता जताने पर आरोपियों ने फायरिंग की जिसमें वह बाल-बाल बच गया। मौके से जसीम व राहुल मय पिस्टल पकड़े गए थे। मामले में कुल छह लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई जिसमें पकड़े गए दोनों आरोपियों के साथ ही आबिद प्रधान, जैद, जाफर व अरकम शामिल हैं। हालांकि अब तक अन्य आरोपियों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है।
शुरू से संदिग्ध है भूमिका
वैसे बता दें कि इस मामले में धूमनगंज पुलिस की भूमिका शुरू से ही सवालों के घेरे में है। मामले में मय पिस्टल दो लोगों के मौके से पकड़ने जाने के बावजूद पुलिस ने भुक्तभोगी की ओर से दी गई तहरीर बदलवाने की कोशिश की थी। एक नाम हटवाकर दूसरी तहरीर भी ले ली थी। हालांकि जानकारी पर कप्तान ने फटकार लगाई तब जाकर मूल तहरीर पर मुकदमा लिखा गया था।
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रिपोर्ट पोंगहट पुल निवासी अब्दुल रहीम(80) की ओर से दर्ज कराई गई थी। आरोप लगाया था कि तीन नवंबर की सुबह 11.30 बजे रसूलपुर मरियाडीह स्थित जमीन पर जैद अपने दोनों भाई जसीम, जाफर व राहुल सिंह और अरकम के अलावा कई अज्ञात लोगों के साथ असलहों से लैस होकर आया और आबिद प्रधान के नाम से 25 लाख रुपयों की मांग की। असमर्थता जताने पर आरोपियों ने फायरिंग की जिसमें वह बाल-बाल बच गया। मौके से जसीम व राहुल मय पिस्टल पकड़े गए थे। मामले में कुल छह लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई जिसमें पकड़े गए दोनों आरोपियों के साथ ही आबिद प्रधान, जैद, जाफर व अरकम शामिल हैं। हालांकि अब तक अन्य आरोपियों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है।
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शुरू से संदिग्ध है भूमिका
वैसे बता दें कि इस मामले में धूमनगंज पुलिस की भूमिका शुरू से ही सवालों के घेरे में है। मामले में मय पिस्टल दो लोगों के मौके से पकड़ने जाने के बावजूद पुलिस ने भुक्तभोगी की ओर से दी गई तहरीर बदलवाने की कोशिश की थी। एक नाम हटवाकर दूसरी तहरीर भी ले ली थी। हालांकि जानकारी पर कप्तान ने फटकार लगाई तब जाकर मूल तहरीर पर मुकदमा लिखा गया था।
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