Research : भोजन की थाली तक पहुंचा प्लास्टिक, बरस भी रहे सूक्ष्म कण
काला मोती बनाने के लिए 2022 में पद्मश्री से सम्मानित डॉ. अजय सोनकर इन दिनों स्विटरलैंड की ज्यूरिक यूनिवर्सिटी के फोरेंसिक जेनेटिक मेडिसिन डिपार्टमेंट के साथ चल रहे रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं।
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प्लास्टिक कचरा अब हमारी भोजन की थाली में पहुंच गया है। यही नहीं, इसके माइक्राॅन के आकार वाले सूक्ष्म कण हवा में उड़ रहे हैं, बादलों के साथ बरस भी रहे हैं। यही कण भोजन के साथ शरीर में पहुंचकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को जन्म दे रहे हैं। संगमनगरी के वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. अजय सोनकर का यह शोध मलयेशिया की जलजीव विज्ञान की पत्रिका ‘इन्फोफिश इंटरनेशनल’ के नवंबर-दिसंबर अंक में प्रकाशित हुआ है।
काला मोती बनाने के लिए 2022 में पद्मश्री से सम्मानित डॉ. अजय सोनकर इन दिनों स्विटरलैंड की ज्यूरिक यूनिवर्सिटी के फोरेंसिक जेनेटिक मेडिसिन डिपार्टमेंट के साथ चल रहे रिसर्च प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। उन्होंने अंडमान द्वीप समूह के समुद्री सीप के मेंटल टिश्यू में सूक्ष्म प्लास्टिक कणों की मौजूदगी पाई है।
इस प्लास्टिक के स्रोत का पता लगाने के लिए उन्होंने समुद्रों के साथ कई नदियों और तालाबों से पानी के नमूने लिए। प्रयोगशाला में उनकी जांच की। उन्हें समुद्री पानी में भी माइक्राॅन आकार के प्लास्टिक के टुकड़े मिले। डॉ. सोनकर बताते हैं कि जब प्लास्टिक धूप या खारे पानी के संपर्क में आता है तो उसका लचीलापन घटकर धातु का रूप ले लेता है। इसके बाद प्लास्टिक सूक्ष्म कणों में टूटने लगता है।
ये कण हवा में तैरते रहते हैं लेकिन दिखाई नहीं देते। वाष्पीकरण के दौरान यही सूक्ष्म कण बादलों से मिल जाते हैं। बारिश के साथ बरसते भी हैं। डॉ. सोनकर के मुताबिक जल जीवों के शैवाल (एल्गी) में प्लास्टिक कणों का मिलना चिंताजनक है। यह बताता है कि प्लास्टिक हमारी भोजन श्रृंखला में शामिल हो चुका है।
हर साल समुद्र में 140 लाख टन कचरा
एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल 140 लाख टन प्लास्टिक समुद्र में फेंका जा रहा है। नदियों के माध्यम से भी यह समुद्र में जा रहा है। जहां पर्यावरण प्रदूषण नहीं है, वहां भी प्लास्टिक कण मिले हैं। अंडमान-निकोबार इसका जीता-जागता उदाहरण है।
किचन का हर सामान प्लास्टिक में पैक
डॉ. सोनकर बताते हैं कि यूं तो किचन में रखा ज्यादातर सामान प्लास्टिक पैक में ही है, लेकिन जब सिरका, आंवले का जूस जैसे अम्लीय पदार्थ पैकिंग की प्लास्टिक के संपर्क में आता है तो यह तेजी से टूटने लगता है। सूक्ष्म प्लास्टिक कण खाने के साथ हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं। यह किडनी-लिवर के लिए खतरनाक है। इससे कैंसर भी हो सकता है।
भारतीय समुद्र में पहली बार मिली प्लास्टिक की चट्टान
अध्ययन के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में प्लास्टिक निर्मित चट्टान (प्लास्टिग्लोमरेट) मिली है। भारतीय समुद्र क्षेत्र में यह पहली बार है। अभी तक प्लास्टिग्लोमरेट्स हवाई द्वीप के कामिलो बीच, इंडोनेशिया, अमेरिका, पुर्तगाल, कनाडा और पेरू में ही मिले हैं। इसका गठन प्लास्टिक के संपर्क में आए रेत, चट्टान के टुकड़े, सीप और अन्य सामग्रियों से होता है।
सौ फीसदी रीसाइकिल नहीं तो बंद हो प्रयोग
डॉ. सोनकर बताते हैं कि प्लास्टिक पूरी पृथ्वी के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। इसे भी रेडियोधर्मी तत्वों की तरह खुले वातावरण में पहुंचने से रोकना होगा। अगर इसे सौ फीसदी रीसाइकिल नहीं कर सकते तो उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना ही विकल्प है। इस त्रासदी को तभी रोका जा सकता है।