पितृ विसर्जन : संगम तट पर पितरों का श्राद्ध करने के लिए उमड़ा जनसैलाब
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संगम तट पर पितृ विसर्जन के लिए बुधवार को माता-पिता, नाना-नानी समेत कई पीढ़ियों के ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के नाम पर पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण-अर्पण किया गया। पितरों के मोक्ष और सुख-समृद्धि की कामना के वंशजों ने दिन भर समूहों में श्राद्ध किए। पितृ पक्ष के आखिरी दिन पूर्वांचल ही नहीं, देश के दूसरे हिस्सों से भी लोग त्रिवेणी तट पर पिंडदान के लिए पहुंचे। तीर्थपुरोहितों की चौकियों पर इसके लिए दिन भर भीड़ लगी रही। अन्न, वस्त्र के दान और मन पसंद व्यंजनों के भोग के साथ पितरों को भावपूर्ण विदाई दी गई।
गंगा,यमुना और विलुप्त सरस्वती के संगम तट पर पिंडदान के लिए सुबह से भीड़ लगने लगी। मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड के अलावा राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु समेत कई राज्यों से लोग अपने पूर्वजों का संगम पर श्राद्ध करने के लिए पहुंचे। इस दौरान वेदियां बनाकर ध्वजा-पताकाएं सजाई गईं। इसके बाद विधि विधान से पिंडदान कर सुख-समृद्धि की कामना की गई।
कौआ और गाय को पितरों के नाम पर खिलाई पूरी-खीर
श्राद्ध और तर्पण-अर्पण के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ ही गाय और कौओं को खी खीर-पूरी और रसगुल्ला खिलाया गया। मान्यता है कि चींटी और कौओं को भोजन निकाले जाने से के बाद हवन करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। कौओं को खीर खिलाने के बाद घरों में आमंत्रित ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा देकर विदा किया गया। पूर्वजों की मनपसंद वस्तुओं के साथ ही तिल, स्वर्ण, चांदी, घी, गुड़, फल का भी दान किया गया।