फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   PIL seeking issuance of practice certificate in thirty days rejected

हाईकोर्ट : तीस दिनों में प्रैक्टिस प्रमाणपत्र निर्गत करने वाली जनहित याचिका खारिज

Thu, 14 Mar 2024 02:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 14 Mar 2024 02:56 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश बार कौंसिल ऑफ इंडिया को ऑल इंडिया बार एक्जामिनेशन (एआईबीई) में शामिल होने वाले अधिवक्ताओं के घर तीस दिन में सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस भेजे जाने वाली जनहित याचिका पर निर्देश जारी करने से इन्कार कर दिया है।

विज्ञापन
PIL seeking issuance of practice certificate in thirty days rejected
अदालत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया और उत्तर प्रदेश बार कौंसिल ऑफ इंडिया को ऑल इंडिया बार एक्जामिनेशन (एआईबीई) में शामिल होने वाले अधिवक्ताओं के घर तीस दिन में सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस भेजे जाने वाली जनहित याचिका पर निर्देश जारी करने से इन्कार कर दिया है।

विज्ञापन


कोर्ट ने कहा, जनहित याचिका 2019 में सोशल मीडिया में वायरल रिपोर्टों के आधार पर दाखिल की गई है। इसमें अनुभवजन्य डाटा का अभाव है। लिहाजा, याचिका खारिज करने योग्य है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने प्रतीक शुक्ला की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
विज्ञापन


हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिका अच्छे उद्देश्यों के लिए दाखिल की गई है। इसमें इस बात को इंगित किया गया है कि जिन केंद्रों पर एआईबीई परीक्षा होती है, वहां कदाचार हुआ है और परीक्षा देने वाले उसमें शामिल हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि याची ने वर्ष 2021 में इसी तरह की एक याचिका दाखिल की थी, जिसे उसने वापस ले ली थी और लगभग तीन वर्ष बीत जाने के बाद फिर वही याचिका दाखिल कर दी। याचिका में कोई बदलाव नहीं किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

मामले में याची की ओर से जनहित याचिका दाखिल कर बार कौंसिल ऑफ इंडिया और यूपी बार कौंसिल ऑफ इंडिया को दो बिंदुओं पर निर्देश देने की मांग की गई थी। पहली मांग थी कि जिन केंद्रों पर एआईबीई आयोजित हो रही है, वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और परीक्षा में शामिल होने वालों के यहां तीस दिनों में प्रैक्टिस ऑफ सर्टिफिकेट (प्रैक्टिस प्रमाणपत्र) उनके घर भिजवा दिए जाएं।

कहा गया, एआईबीई हर वर्ष आयोजित की जा रही है, लेकिन इसमें हर वर्ष परेशानी सामने आ रही है। इससे परिणाम रोक दिए जाते हैं। यह तय करने की कोई व्यवस्था नहीं है कि कौन नकल कर रहा था और कौन नहीं। जबकि, कानून के मुताबिक इस व्यवस्था में सुधार की व्यवस्था की गई है।

वहीं विपक्षी की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि परीक्षा में कदाचार को रोकने के लिए बेहतर इंतजाम किए गए हैं। याचिका धारणा और अनुमान पर आधारित है। अब तक परीक्षा से कदाचार का कोई मामला सामने नहीं आया। लिहाजा, याचिका खारिज किए जाने योग्य है। कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed