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सस्ते गल्ले की दुकान के आरक्षण शासनादेश की संवैधानिकता के खिलाफ याचिका खारिज
Mon, 21 Jun 2021 10:01 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 21 Jun 2021 10:01 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सस्ते गल्ले की दुकान के आवंटन में ब्लॉक स्तर पर आरक्षण लागू करने के शासनादेश 5 अगस्त 11 के उपखंड ।। (1) व (2) अनुच्छेद 14 व 15 के विपरीत करार देते हुए इसकी संवैधानिकता की चुनौती याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि शासनादेश में साफ कहा है कि विकास खंड को इकाई मानकर तहसील स्तरीय समिति आरक्षण की गणना करेगी और दुकान रिक्त होने पर ही आरक्षण लागू होगा। दुकानदार का लाइसेंस रद्द नहीं किया जाएगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति आरएन तिलहरी की खंडपीठ ने कुशीनगर गुलरिया गांव के अखिलेश तिवारी की याचिका पर दिया है।
याची का कहना था कि गुलरिया गांव की सस्ते गल्ले की दुकान आरक्षित थी। 26 जुलाई 19 को लाइसेंस निरस्त होने से दुकान खाली हुई। इसलिए सामान्य वर्ग के व्यक्ति को मिलनी चाहिए।
किन्तु शासनादेश के तहत यह दुकान अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित घोषित है। 29 जुलाई 19 को जारी एसडीएम के पत्र के अनुसार 92 दुकानों में से 25 एससी,एसटी व 50 ओबीसी की है। 75 दुकान आरक्षित श्रेणी की है, जो कोटे के काफी अधिक है। इसलिए गुलरिया में दुकान सामान्य वर्ग को दी जानी चाहिए। 13 नवंबर 19 को एससी वर्ग को दुकान का आवंटन रद्द किया जाए। कोर्ट ने कहा कि जिस वर्ग के लिए दुकान आरक्षित होगी खाली होने पर उसे आवंटित की जाएगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति आरएन तिलहरी की खंडपीठ ने कुशीनगर गुलरिया गांव के अखिलेश तिवारी की याचिका पर दिया है।
याची का कहना था कि गुलरिया गांव की सस्ते गल्ले की दुकान आरक्षित थी। 26 जुलाई 19 को लाइसेंस निरस्त होने से दुकान खाली हुई। इसलिए सामान्य वर्ग के व्यक्ति को मिलनी चाहिए।
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किन्तु शासनादेश के तहत यह दुकान अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित घोषित है। 29 जुलाई 19 को जारी एसडीएम के पत्र के अनुसार 92 दुकानों में से 25 एससी,एसटी व 50 ओबीसी की है। 75 दुकान आरक्षित श्रेणी की है, जो कोटे के काफी अधिक है। इसलिए गुलरिया में दुकान सामान्य वर्ग को दी जानी चाहिए। 13 नवंबर 19 को एससी वर्ग को दुकान का आवंटन रद्द किया जाए। कोर्ट ने कहा कि जिस वर्ग के लिए दुकान आरक्षित होगी खाली होने पर उसे आवंटित की जाएगी।
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